वक्त से पहले रिहा नहीं होगा नैना साहनी के शव को काटकर तंदूर में जलाने वाला सुशील शर्मा
नई दिल्ली। देश के साथ-साथ पूरी दुनिया को हिलाकर रख देने वाले नैना साहनी मर्डर केस के कुख्यात दोषी की रिहाई के आवेदन को सजा समीक्षा बोर्ड ने सिरे से खारिज कर दिया। यहां तक कि दिल्ली सरकार में गृह मंत्री सत्येंद्र जैन की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने उसकी अर्जी पर सुनवाई तक से इनकार कर दिया, जिसके बाद इस केस को अंजाम देने वाले हत्यारे सुशील शर्मा का जेल से बाहर आना असंभव हो गया है।

नैना साहनी मर्डर केस
90 के दशक में हुआ नैना साहनी मर्डर केस क्रूरता, नफरत, दंबगई का वो घिनौना रूप है जिसे कोई कभी नहीं भूल सकता है। सत्ता के नशे में चूर एक पति ने अपनी पत्नी को शक के आधार पर ना केवल मारा बल्कि उसके शरीर के टुकड़े-टूकड़े करके तंदूर में फूंक डाला था।

शक के आधार पर की बीवी की हत्या
आपको बता दें कि नैना साहनी एक निजी विमान कंपनी में पायलट थी। कांग्रेस नेता सुशील शर्मा उस समय कांग्रेस का युवा नेता था। शर्मा नैना को अपने पूराने कॉलेज के दोस्त करीम से कई बार बात करते हुए देख चुका था।

नैना साहनी के शव को तंदूर में जलाया
जिसके बाद उसके दिल-दिमाग पर शक का कीड़ा घुस गया कि उसकी बीवी के उसके साथी करीम से अवैध संबंध हैं, जिसके बाद उसने नफरत और गुस्से में आकर 2 जुलाई को अपनी बीवी को गोली मार दी और सबूत मिटाने के लिए नैना साहनी के शव को बड़े चाकू से कई टुकड़ों में काटकर तंदूर में झोंक दिया।

पहले फांसी बाद में उम्र कैद
इतना ही नहीं जब शव के टुकड़े पूरी तरह नहीं जल पाए तो उसने तंदूर में मक्खन डालकर उन्हें जलाने की कोशिश की थी। इस मामले में सजा से बचने के लिए सुशील ने अपने राजनीतिक संपर्कों का भी भरपूर इस्तेमाल किया था लेकिन पुलिस ने 10 जुलाई को शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। 2003 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने शर्मा को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी लेकिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी को उम्र कैद में बदल दिया था।












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