एम्स में इलाज कराने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाए जाने पर नहीं हुआ फैसला
केंद्र सरकार ने एम्स में इलाज करवाने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाने पर फैसला नहीं किया है। इस बात की जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सी के मिश्रा ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दी।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली ने पूर्व में कहा था कि जो मरीज अपना आधार नबंर उपलब्ध कराएंगे उनके लिए पंजीकरण शुल्क को जल्द ही समाप्त कर दिया जाएगा और बिना आधार कार्ड वाले मरीजों को 10 गुना रजिस्ट्रेशन फीस भरनी होगी।
एम्स ने यह व्यवस्था अपने यहां जनवरी से लागू कर दी है। ये व्यवस्था मरीजों के डेटाबेस को मजबूत करने के लिए की जा रही है। अभी एक मरीज को एम्स में अपना इलाज कराने के लिए मरीजों को 10 रुपए का पंजीकरण करवाना होता है, जिसके बाद उन्हें एक विशेष स्वास्थ्य पहचान नबंर दी जाती है।
ये यूएचआईडी नबंर मरीज की पहचान होती है, जिसके जरिए उनका पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है, पर कई बार ओपीडी कार्ड और दस्तावेज गुम हो जाने की वजह से एक ही मरीज के कई यूएचआईडी नबंर बन जाते हैं। इसे मजबूत करने के लिए अब मरीजों के आधार नबंर को अनिवार्य करने की बात चल रही है। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजकर अधिसूचना जारी करने की मांग की गई थी।












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