'अविश्वास प्रस्ताव चर्चा के लिए स्वीकार हो चुका है, अब....': विपक्षी दलों को क्या कुछ सुना गए ओवैसी?
एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में जारी गतिरोध पर सवाल उठाया है और विपक्षी दलों का आह्वान किया है कि सदन में व्यवस्था कायम करना आवश्यक है। उनका बयान ऐसे समय में आया है, जब मणिपर मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष संसद में आमने-सामने है और सामान्य विधायी कार्य बाधित हो रही है।
'विपक्ष को संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए'
हैदराबाद के सांसद ने एनडीटीवी से कहा है कि 'मेरी राय में विपक्ष को संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए।' उन्होंने कहा है कि जब विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया गया है, तो सदन की कार्यवाही भी शुरू होनी चाहिए।

एआईएमआईएम नेता ने विपक्ष की रणनीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि 'यह सही बात है कि अब जब अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया है तो सदन की कार्यवाही होने देना चाहिए। विपक्षी दलों को इस सवाल का जवाब देना चाहिए।'
'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमने सत्र के कई दिन गंवा दिए हैं'
विपक्षी सांसद ने विरोध की वजह से संसद का बहुमूल्य वक्त बर्बाद होने पर भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमने सत्र के कई दिन गंवा दिए हैं। हमें सरकार से सीधे सवाल पूछने की जरूरत है, उनकी नाकामियों को उजागर करना है।' इस दौरान उन्होंने प्रश्न काल की अहमियत पर भी जोर दिया और कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम प्रश्न काल गंवा रहे हैं।'
'महत्वपूर्ण विधेयक शोरगुल के दौरान पास हो गए'
ओवैसी ने यह मुद्दा भी उठाया है कि हंगामें के बीच कई महत्वपूर्ण बिल पास हो रहे हैं, जिसमें से कुछ की विस्तार से छानबीन करने की जरूरत है। वो बोले, 'महत्वपूर्ण विधेयक शोरगुल के दौरान पास हो गए, हम बिल की खामियों को उजागर नहीं कर पाए।'
केंद्र सरकार पर बरसे ओवैसी
हैदराबाद के एमपी ने विपक्षी दलों को नसीहत देने के साथ ही सरकार की भी जमकर आलोचना की है। उन्होंने कहा, 'सरकार राजस्थान और पश्चिम बंगाल की हिंसा पर चर्चा की बात करके हिंसा को जायज ठहराने की कोशिश कर रही है। कैबिनेट मंत्री की ओर से कुकियों के साथ सामूहिक बर्बर्ता की तुलना अन्य राज्यों की घटनाओं से करना बहुत गलत है।'
गौरतलब है कि संसद का सत्र 20 जुलाई से चल रहा है। लेकिन, मणिपुर की घटना को लेकर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सामान्य ढंग से चल ही नहीं पा रही है। बुधवार को विपक्षी दलों की ओर से मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा स्पीकर को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया, जिसे चर्चा के लिए स्वीकार किया जा चुका है।
लेकिन, बावजूद इसके गुरुवार को फिर से वही हाल रहा। मणिपुर के मुद्दे पर विपक्षी सांसदों का हंगामा जारी रहा। विपक्षी दलों के कई सांसद मणिपुर की घटना पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए काले कपड़े में आए थे। लोकसभा की कार्यवाही 3 बजे शुरू हुई, लेकिन फिर हंगामें के चलते पूरी दिन के स्थगित कर दिया गया। विपक्ष की मांग थी कि अविश्वास प्रस्ताव पर गुरुवार को ही चर्चा शुरू हो, लेकिन यह नहीं हो पाया है। संभावना है कि यह अगले हफ्ते हो सकता है।












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