चुनावी सर्वे केवल टीआरपी की फंडा: नीतीश कुमार

पटना में एक सरकारी कार्यक्रम में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पहले से भी कहते रहे हैं कि उन्हें ऐसे सर्वेक्षणों में विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा, "दो-चार लोगों से पूछ लेने से क्या चुनावी सर्वे हो जाता है? चुनावी सर्वे अब विश्वसनीय नहीं रह गए है और यह केवल एक मनोरंजक कार्यक्रम बनकर रह गया है।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ दिनों पहले कुछ लोगों और एक निजी चैनल द्वारा कराया गया सर्वे कुछ हद तक सही होता था, लेकिन वे सब अब सर्वे करते ही नहीं हैं, इसलिए ऐसे सर्वे को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। ये सब बेकार की चीजें हैं। किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि चुनाव के परिणाम आने के बाद 'कुछ लोगों' को ज्यादा तकलीफ होगी।
नीतीश कुमार के इस कमेंट पर राजनीतिक पंडितों का कहना है कि नीतीश कुमार ने अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी के पीएम इन वेटिंग नरेन्द्र मोदी की ओर था क्योंकि लगभग हर सर्वे में बीजेपी और मोदी की ही जीत बतायी जा रही है और मोदी-नीतीश के बीच की जंग तो किसी से छुपी नहीं है इसलिए ही शायद नीतीश कुमार को ओपेनियन पोल बेकार की चीज लगती है।












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