नालंदा विश्वविद्यालय कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं, आसान नहीं है मोदी सरकार की राह

नरेंद्र मोदी ने जब तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो इसमे नीतीश कुमार जदयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी का अहम योगदान है। दोनों के सहयोग के बिना इस बार मोदी सरकार का चल पाना संभव नहीं है। हालांकि नीतीश कुमार को लेकर सवाल खड़े होते रहते हैं कि वह कभी भी दल-बदल कर सकते हैं।

नीतीश कुमार को संकेतों की राजनीति कि लिए जाना जाता है। जब भी वह दल-बदल करते हैं तो इसके पहले से वो अलग-अलग मंच पर संकेत देते हैं। कुछ इसी तरह के संकेत उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में दिया। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी भी पहुंचे थे।

nitish kumar

2009 की सरकार का किया जिक्र

पीएम मोदी के सामने बोलते हुए नीतीश कुमार ने 2008-09 का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे दबाव की वजह से ही संसद में इस विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए बिल लाया गया। उस वक्त पूर्व के लोगों की सरकार थी।

हमने ही इस विश्वविद्यालय के लिए जमीन का आवंटन किया, इसके लिए बिहार विधानसभा में बिल बनाया और कार्य को शुरू किया। अपने भाषण में नीतीश कुमार ने बार-बार यह कहा कि हमने यहां बहुत काम किया, आप यहां आए हैं तो अच्छा ही।

पीएम मोदी की बदली भाव-भंगिमा

जिस वक्त नीतीश कुमार ने यह कहा कि हमारे दबाव की वजह से ही पूर्व की सरकार ने इस विश्वविद्यालय के निर्माण को लेकर संसद में बिल लाई थी तो पीएम मोदी की भाव-भंगिमा थोड़ी अलग नजर आई। नीतीश ने अपने भाषण में इस विश्वविद्यालय के निर्माण का पूरा इतिहास सुनाते हुए कहा कि लोगों को पता होना चाहिए कि कैसे यह विश्वविद्यालय बना।

नीतीश कुमार ने कहा कि नवंबर 2005 से हम लोगों को काम करने का मौका मिला, तबसे बिहार के विकास काम शुरू हुआ है। उसी बीच मार्च 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम बिहार आए थे। उन्होंने अपने संबोधन में नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से स्थापित करने की बात कही थी।

वही व्यक्ति थे, जिन्होंने पहली बार इस विश्वविद्यालय को स्थापित करने की बात कही थी। उन्होंने जब यहां आकर विश्वविद्यालय को देखा था तो विधानमंडल में अपने संबोधन में कहा था कि नालंदा विश्वविद्यालय को स्थापित करना चाहिए।

उसके बाद से हम लोगों ने नालंदा अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी स्थापित करने की पहल शुरू की। इस नए विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना था, इसके लिए हमने उस समय की केंद्र सरकार से अनुरोध किया, लेकिन वो लोग सुन नहीं रहे थे, इसमे देरी की जा रही थी।

हमने किया 455 एकड़ भूमि का अधिग्रहण

जिसके बाद बिहार सरकार ने नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से स्थापित करने के लिए नया कानून बना दिया और नालंदा विश्वविद्यालय के लिए 455 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया।इसके बाद 2008 में जब अब्दुल कलाम जी का बतौर राष्ट्रपति कार्यकाल समाप्त हो गया था तो वह पहले विजिटर के तौर पर यहां आए थे।

यह सब बता देना जरूरी है

यह सब बता देना जरूरी है कि ताकि सब लोग जान लीजिए, पुरानी बातों को जान लीजिए, कैसे बना, यह जरूरी है। हमारे अनुरोध पर लोकसभा में बिल पारित किया गया। उस समय सरकार दूसरे की थी। लेकिन हम लोग इतना ज्यादा कहते रहे, उसके बाद फिर एक बार ये लोग उसको लोकसभा में लाए।

हमने केंद्र सरकार को किया ट्रांसफर

इसके बाद राज्य सरकार ने भूमि आदि को केंद्र सरकार को ट्रांसफर कर दिया। जिसके बाद विश्वविद्यालय का काम धीरे-धीरे करके बढ़ता रहा। 2014 से थोड़ी पढ़ाई यहां शुरू हो गई। 2016 में प्रणव मुखर्जी ने कार्यक्रम का शिलान्यास किया। अब नालंदा विश्वविद्यालय पूरी तरह से तैयार हो गया है और 17 देशों के 400 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं।

आपको भी अच्छा लगेगा कि आप यहां आए

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विश्वविद्यालय का पूरे तौर पर उद्घाटन कर रहे हैं, यह खुशी की बात है, आपको भी बहुत अच्छा लगेगा कि आप आ गए हैं, राजगीर सबसे पौराणिक जगह है, आज का थोड़े है।

आप आ गए, बड़ी खुशी की बात है। यहां पर पांच प्रमुख धर्मों का संगम स्थल है। नीतीश कुमार ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास काफी गौरवशाली है। यहां तकरीबन 10 हजार छात्र पढ़ते थे और 2 हजार शिक्षक पढ़ाते थे।

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