गडकरी की जासूसी पर भाजपा में कन्फ्यूजन, जानें क्या है विवाद

क्या है मामला
नरेन्द्र मोदी सरकार में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के आवास की कथित जासूसी मामले में सरकार और विपक्ष के बीच हमला शुरु हो गया है। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के घर से जासूसी के डिवाइस मिले हैं। अंग्रेजी वीकली ' द संडे गार्जियन' की खबर के मुताबिक गडकरी के 13 तीन मूर्ति लेन स्थित आवास में हाई पावर लिसनिंग डिवाइसेस मिले हैं।
जासूसी यंत्र के घर में पाए जाने की सूचना के बाद शुरूआती जांच में पता चला है कि विदेशी एजेंसी ने गडकरी के घर में बग्स प्लांट किए थे। विदेशी एजेंसियों के ऑपरेटिव्स ही परिष्कृत लिसनिंग डिवाइस का इस्तेमाल करती है। खासतौर पर सीआईए और नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी।
नितिन गडकरी की जासूसी का मामला सामने आने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की जासूसी का मामला सामने आ गया है हालांकि इसमें सिर्फ संदेह ही व्यक्त किया है अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पायी है।
गडकरी के घर हो रही जासूसी मामले में भारत और अमेरिका के बीच के संबंधों पर असर पड़ने के आसार है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह और गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने इस मामले में पड़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने खुद साफ कर दिया है कि जासूसी करने वाला कोई भी उपकरण नहीं पाया गया।
गडकरी के घर में मिला उपकरण इतनी उच्च तकनीकी क्षमता का था कि कहीं दूर बैठा व्यक्ति भी बेडरूम में होने वाली सारी बातें सुन सकता था। आमतौर पर पश्चिमी देशों में ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल होता है।
क्या कहते हैं स्वामी
बीजेपी के एक अन्य नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया है कि बीते अक्टूबर महीने में गडकरी के घर में जासूसी उपकरण लगाए गए थे। एक अंग्रेजी न्यूज चैनल के मुताबिक, स्वामी ने इस मामले में यूपीए की ओर इशारा करते हुए कहा कि यूपीए सरकार की मर्जी के बिना ऐसा होना मुमकिन ही नहीं था।
विरोधियों के हमले
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गडकरी जासूसी मामले को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की है। दिग्विजय ने अमित शाह और नितिन गडकरी पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों ही नेताओं की टैपिंग करने की पुरानी आदत रही है। कांग्रेस ने इसे मंत्रिमंडलीय सहयोगियों में आपसी अविश्वास का मामला करार देते हुए इसकी जांच कराने तथा इस पर संसद में सरकार के बयान की मांग की है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी इस मामले पर मोदी सरकार को घोरने की कोशिश की है।
बचाव में भाजपा
गडकरी के जासूसी मामले में जहां विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है तो वहीं सरकार उनका बचाव कर रही है। संसद में भारी शोर-शराबे के बाद राजनाथ सिंह ने भी इस मामले पर सफाई पेश की है। वहीं खुद नितिन गडकरी भी खुद ये बात कह रहे है कि उनके घर कोई जासूसी नहीं हुई है। उन्होंने कहा है उनके आवास पर कहीं भी कोई ऐसा उपकरण नहीं मिला है।लेकिन उनकी ही पार्टी के एक वरिष्ठ नेता सुब्रस्रण्यम स्वामी ने कहा है कि इस तरह के उपकरण पाए गए हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले की जांच कराने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि श्री गडकरी खुद इस बात का खंडन कर चुके हैं।
पहले भी आई जासूसी की खबरें
वाशिंगटन पोस्ट ने 30 जून को एडवर्ड स्नोडन के हवाले से खुलासा दिया कि अमेरिका की प्रमुख जासूसी एजेंसी ने भाजपा समेत दुनिया की कई राजनीतिक पार्टियों की जासूसी करवाई थी। जून 2011 में खबरें आईं कि वित्त मंत्रालय के दफ्तरों में जासूसी उपकरण लगाए गए थे। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी उस वक्त वित्त मंत्रालय संभाल रहे थे। एक साल बाद खबर आई कि रक्षा मंत्री ए के एंटनी के दफ्तर में भी जासूसी उपकरण लगाए गए थे।
अमेरिका करता है तांक-झांक
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका पर कई बार जासूसी के आऱोप लगे हैं। ताजा मामला इसी साल जुलाई का है। व्हिसिल ब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन के हवाले से खुलासा किया गया कि 2010 में भारत और भाजपा की जासूसी का ठेका एनएसए को दिया गया था। वहीं अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, फॉरेन इंटेलीजेंस सर्विलांस कोर्ट ने जिन छह विदेशी राजनीति दलों की जासूसी की मंजूरी दी थी, उनमें भाजपा भी है।












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