निर्भया के पिता बोले- दोषियों की हर नई याचिका बढ़ाती है धड़कनें, कोर्ट से की ये मांग

नई दिल्ली। निर्भया केस के चारों दोषियों में से एक पवन कुमार गुप्ता को सोमवार को उस वक्त सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा जब उसकी स्पेशल लीव पिटिशन अदालत में खारिज हो गई। इस याचिका में दोषी की तरफ से दावा किया गया था कि वारदात के वक्त वह नाबालिग था। वहीं, कोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने पर निर्भया के माता-पिता ने खुशी जाहिर की। इस दौरान निर्भया के पिता ने कोर्ट से एक मांग की।

याचिका के लिए गाइडलाइन बनानी चाहिए- निर्भया के पिता

याचिका के लिए गाइडलाइन बनानी चाहिए- निर्भया के पिता

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी पवन की याचिका खारिज होने पर निर्भया के पिता ने अपील की और कहा कि इन दोषियों को किसी तरह की कोई रियायत ना दी जाए। साथ ही उन्होंने कोर्ट से मांग करते हुए कहा, 'अदालत को ये तय करने के लिए एक गाइडलाइन बनानी चाहिए, कि दोषी खुद को बचाने के लिए कितनी याचिकाएं कर सकता है।' उन्होंने कहा कि जब-जब कोई नयी याचिका दायर होती है, उनकी धड़कनें तेज होने लगती हैं। वहीं, निर्भया की मां ने इस याचिका को पहले ही फांसी में देरी की एक कोशिश बताया था।

निर्भया की मां बोलीं- दोषी फांसी में देरी के हथकंडे अपना रहे हैं

निर्भया की मां बोलीं- दोषी फांसी में देरी के हथकंडे अपना रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी पवन की याचिका खारिज होने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, 'मैं केवल तभी संतुष्ट हो पाऊंगी जब सभी दोषी 1 फरवरी को फांसी पर लटकाए जाएंगे। जैसे वे एक के बाद एक फांसी में देरी के हथकंडे अपना रहे हैं, वैसे ही उन्हें एक-एक कर फांसी पर लटकाया जाना जाना चाहिए ताकि उनको कानून के साथ खिलवाड़ करने का नतीजा समझ आए।'

दोषी पवन ने नाबालिग होने का किया था दावा

दोषी पवन ने नाबालिग होने का किया था दावा

सोमवार को दोषी पवन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो वकील एपी सिंह ने अदालत के सामने दलील देते हुए कहा था कि वारदात के वक्त उसकी ( दोषी पवन) उम्र 17 साल, 1 महीने और 20 दिन थी। दोषी पवन कुमार गुप्ता के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच के सामने दलील दी थी कि अपराध के वक्त उम्र को ध्यान में रखते हुए उसकी भूमिका को एक किशोर के रूप में देखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

वहीं, वकील की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि 9 जुलाई, 2018 को कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन अब एक और याचिका के जरिए इसी मुद्दे को क्यों उठा रहे हैं। वकील की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि इसमें किसी नए तथ्य को नहीं रखा गया है। बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी किया है, जिसके मुताबिक उनको 1 फरवरी को फांसी दी जानी है।

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