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निर्भया को न्याय के लिए जल्लाद की तलाश, कठोर दिल के साथ एक जल्लाद में चाहिए ये सभी खूबियां

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नई दिल्‍ली। निर्भया गैंगरेप और मर्डर की घटना को 16 दिसंबर को सात साल पूरे हो जाएंगे। सभी को इंतजार है कि क्‍या राष्‍ट्रपति इस सात साल पूरे होने से पहले उन चारों दोषियों की याचिका को खारिज करेंगे जिन्‍होंने बेदर्दी के साथ एक 23 साल की लड़की का रेप करने के बाद उसकी हत्‍या कर दी थी। वहीं, तिहाड़ जेल अथॉरिटीज की मानें तो इस घटना को अंजाम देने वाले विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह और पवन गुप्‍ता को फांसी पर लटकाने के लिए उनके पास जल्‍लाद नहीं है। हैदराबाद में डॉक्‍टर के गैंगरेप और उनके मर्डर के बाद कुछ लोगों की तरफ से निर्भया के कातिलों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए जल्‍लाद बनने की पेशकश की गई है। लेकिन क्‍या वाकई जल्‍लाद बनना इतना आसान है, नहीं।

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साल 2015 के बाद होगी फांसी

साल 2015 के बाद होगी फांसी

अगर निर्भया के बलात्‍कारियों का फांसी दी जाती है तो साल 2015 के बाद देश में किसी को फांसी पर चढ़ाया जाएगा। वहीं, साल 2004 के बाद यह रेप का पहला मामला होगा जिसमें दोषियों को फांसी पर लटकाया जाएगा। साल 2015 में 1993 के मुंबई (उस समय बॉम्‍बे) ब्‍लास्‍ट के दंगों के दोषी याकूब मेमन, साल 2013 में संसद पर हमलों के दोषी अफजल गुरु और साल 2012 में मुंबई आतंकी हमलों में जिंदा पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब को फांसी दी गई थी। कसाब और मेमन दोनों को ही महाराष्‍ट्र की यरवदा जेल में फांसी दी गई तो गुरु को तिहाड़ में ही फांसी दी गई थी। तीनों को किस जल्‍लाद ने फांसी दी, उनका नाम सुरक्षा कारणों की वजह से जेल प्रशासन ने गुप्‍त रखा था।

क्‍या पवन कुमार ही देंगे निर्भया के दोषियों को फांसी

क्‍या पवन कुमार ही देंगे निर्भया के दोषियों को फांसी

निर्भया के दोषियों को कौन फांसी देगा, फिलहाल इस पर संस्‍पेंस ही है। मगर एक नाम सबकी जुबां पर है और वह नाम है मेरठ के पवन कुमार का। पवन कुमार अपने खानदान की चौथी पीढ़ी हैं जो इस काम को करते आ रहे हैं। उनके पिता कालू जल्लाद देश के जाने माने जल्लाद थे। इंदिरा गांधी के हत्यारों को सूली पर फंदे से लटकाने का काम उन्होंने किया था। साल 2011 में पवन कुमार ने ब्रिटिश अखबार द इंडिपेंडेंट को जो इंटरव्‍यू दिया था उसमें उन्‍होंने एक बेहतरीन जल्‍लाद की खूबियां बताई थीं। उनहोंने बताया था कि एक अच्‍छे जल्‍लाद को रस्‍सी में गांठ लगाना, फांसी देते समय रस्‍सी को आसानी से गर्दन के आसपास सरकाना, रस्‍सी में लूप कैसे लगाना है, फांसी देने वाले लीवर ठीक से ऑपरेट करना, ये सब आना चाहिए।

क्‍या होती है जल्‍लाद की खूबियां

क्‍या होती है जल्‍लाद की खूबियां

पवन ने कहा था कि गांठ को सही तरीके से बनाने की कई प्रक्रिया होती है। गांठ इस तरह की होनी चाहिए ताकि व्‍यक्ति को तकलीफ न हो। फांसी देने से पहले एक ड्राइ रन होता है। इसमें एक बैग में रेत भरकर उसे रस्‍सी से लटकाया जाता है। यह प्रक्रिया इसलिए बार-बार दोहराई जाती है ताकि आखिरी मौके पर फांसी देते समय कोई गलती न हो। पवन ने अपने दादा और पिता के साथ मदद देने के दौरान करीब 80 फांसी देखीं। करीब दो तीन साल पहले निठारी हत्याकांड के दोषी ठहराए सुरेंद्र कोली को फांसी दी जाने वाली थी, वो उसके लिए पवन को ही मुकर्रर किया गया था। बाद में वो फांसी टल गई।

नाटा मलिक ने दी थी आखिरी बार रेपिस्‍ट को फांसी

नाटा मलिक ने दी थी आखिरी बार रेपिस्‍ट को फांसी

साल 2004 में नाटा मलिक ने कोलकाता की अलीपुर जेल में रेप के आखिरी आरोपी धनजंय चटर्जी को फांसी पर लटकाया था। नाटा मलिक ने 84 साल की उम्र में उस फांसी को अंजाम दिया था। उन्‍हें उसके एवज में करीब 31, 000 रुपए और दनके पोते को जेल के रखरखाव का काम किया दिया गया था। मलिक भी अपने खानदान की तीसरी पीढ़ी थे जिन्‍होंने फांसी को अंजाम दिया था। आजादी के बाद से उन्‍होंने ने 25 लोगों को फांसी दी थी। चटर्जी को फांसी देते समय मलिक ने रस्‍सी को साबुन से चिकना किया था और साथ ही कच्‍चे केले को लेप भी बार-बार लगाया था। ऐसा उन्‍होंने इसलिए किया था ताकि चटर्जी का सिर गड्ढे में गिरते समय धड़ से अलग न हो।

दुनिया का वह मशहूर जल्‍लाद

दुनिया का वह मशहूर जल्‍लाद

साल 2007 में नाटा मलिक ने फांसी देने को एक कला बताया था। साल 2009 में उनकी मौत हो गई थी। अल्‍बर्ट पियरप्‍वाइंट दुनिया के वह जल्‍लाद रहे हैं जिन्‍होंने 25 साल के अपने करियर में करीब 600 लोगों को फांसी पर लटकाया था। 1992 में उनका निधन हो गया था और उनके रिकॉर्ड में सबसे ज्‍यादा वो लोग थे ऑस्ट्रिया और जर्मनी में वॉर क्राइम के दोषी थे। इस समय उन्‍होंने 200 लोगों की आधिकारिक तौर पर जान ली थी।

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English summary
Nirbhaya rape case: India is looking for good hangman for the convicts lodged at Tihar Jail.
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