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निर्भया केस: जेल में मिलने आए पिता को देख फूट-फूटकर रोने लगा दोषी विनय, की ये गुजारिश

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नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप केस में चार में से दो दोषियों विनय कुमार शर्मा और मुकेश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। क्यूरेटिव पिटीशन खारिज होने के बाद मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी है। चारों दोषियों को 22 जनवरी सुबह सात बजे फांसी पर लटकाया जाना है और जैसे-जैसे फांसी की तारीख नजदीक आ रही है, दोषियों के मन में डर और बेचैनी बढ़ती जा रही है। दोषी विनय डेथ वारंट जारी किए जाने के बाद सो नहीं रहा है। वहीं, तिहाड़ जेल में पिता से मुलाकात के दौरान वह फफक-फफक कर रोने लगा।

पिता को देख रोने लगा विनय

पिता को देख रोने लगा विनय

सूत्रों के मुताबिक, विनय के पिता तिहाड़ जेल में उससे मिलने पहुंचे थे। जेलर ऑफिस में पिता को सामने देख विनय फूट-फूटकर रोने लगा। उसने अपने पिता से एक बार गले लगने की गुजारिश भी की। इस दौरान वह लड़खड़ाकर गिरने वाला था, हालांकि जेलकर्मियों ने उसे संभाल लिया। डेथ वारंट जारी होने के बाद दोषी विनय के अलावा मुकेश भी बहुत बेचैन है। इन दोनों द्वारा दायर की गई क्यूरेटिव पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने खारिज कर दिया था।

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क्यूरेटिव पिटीशन हो चुकी है खारिज

क्यूरेटिव पिटीशन हो चुकी है खारिज

विनय कुमार शर्मा के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर कर फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। इस याचिका में विनय की तरफ से कहा गया था कि SC को विचार करना चाहिए कि घटना के समय विनय केवल 19 वर्ष का था। युवावस्था और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि को देखते हुए मामले की गंभीरता कम करने के फैक्टर के तौर पर इसे लिया जाना चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।

चारों को कोई पछतावा नहीं- जेल अधिकारी

चारों को कोई पछतावा नहीं- जेल अधिकारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चारों के सेल में टीवी लगा हुआ है, जहां उनको न्यूज में क्यूरेटिव पिटीशन खारिज होने की खबर मिली। इन दोनों के अलावा अक्षय और पवन चुपचाप अपने सेल में पड़े रहते हैं। चारों एक-दूसरे से ज्यादा बातचीत नहीं करते हैं। डेथ वारंट जारी होने के बाद चारों की नींद उड़ी हुई है। जेल अधिकारियों के मुताबिक, चारों को देखने से नहीं लगता है कि उनको अपने गुनाह का पछतावा हो।

राष्ट्रपति के पास मुकेश ने भेजी दया याचिका

राष्ट्रपति के पास मुकेश ने भेजी दया याचिका

संविधान के आर्टिकल-72 के तहत राष्ट्रपति को दया याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार है। संविधान के तहत राष्ट्रपति गृह मंत्रालय की सलाह पर किसी भी दोषी को माफ कर सकते हैं, उसकी सजा कम कर सकते हैं या फिर उसकी दया याचिका लौटा दे सकते हैं। लेकिन, जैसे ही राष्ट्रपति के यहां से ये याचिका नामंजूर होती है, मुजरिम के पास फांसी से बचने के सारे कानूनी अधिकार खत्म हो जाते हैं। जब तक राष्ट्रपति मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज नहीं करते किसी भी दोषी को फांसी नहीं दी जा सकेगी।

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English summary
nirbhaya gangrape: convict vinay kumar sharma breaks down to see his father
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