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निर्भया गैंगरेपः ऐसा हुआ तो खुद को फांसी से बचाने में कामयाब हो जाएगा चौथा दोषी!

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बेंगलुरू। दिल्ली की पटियाला हाऊस कोर्ट द्वारा डेथ वारेंट जारी करने के बाद पिछले 7 वर्ष 22 दिन से इंसाफ की बाट जोह रही निर्भया और उसके परिवार को इंसाफ मिलना तय हो चुका है। डेथ वारेंट के मुताबिक निर्भया के चार दोषियों क्रमशः मुकेश सिंह, अक्षय कुमार सिंह, पवन गुप्ता और विनय शर्मा को 22 जनवरी, सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया जाएगा।

    Nirbhaya case: Curative petition पर Supreme court में इस दिन सुनवाई | वनइंडिया हिंदी

    Vinay

    तिहाड़ जेल प्रशासन ने चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने की पूरी तैयारी कर ली है और दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए उत्तर प्रदेश से दो जल्लाद का इंतजाम भी कर लिया है। हालांकि डेथ वारेंट जारी होने के बाद भी चारों दोषियों ने हथियार नहीं डाले हैं और फांसी को टालने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

    Vinay

    दरअसल, फांसी पर लटकाए जाने की तिथि की घोषणा के बाद से जघन्य अपराध करने वाले चारों दोषियों को पसीने छूट रहे हैं और उन्होंने जेल में खाना-पीना बंद कर दिया है। यहां तक चारों दोषियों की नींद भी गायब हो गई है, जिससे पिछले कुछ ही दिनों में उनके वजन में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है।

    चारों दोषी किसी भी तरह से फांसी से फंदे से खुद को बचाने की जद्दोजहद में लग गए है और शेष बचे कानूनी विकल्पों को आजमाने से नहीं चूकना चाहते हैं। दोषी मुकेश शर्मा और विनय शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में क्यरेटिव याचिका दायर की है, जिसके जरिए उन्होंने सजा में नरमी की विनती की है और अगर सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विनय शर्मा पर गौर किया तो जांच तक फांसी टलना तय है।

    Vinay

    गौरतलब सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव चायिका दायर करने वाले दोषी विनय शर्मा सबसे अधिक फांसी की सजा से डरा हुआ है और फांसी की सजा से बचने के लिए सबसे पहले उसने ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका और राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी थी और दोनों ही याचिकाएं क्रमशः सुप्रीम कोर्ट और गृह मंत्रालय द्वारा खारिज की जा चुकी हैं।

    निर्भया गैंगरेप का चौथा दोषी विनय शर्मा, जो एक बॉडी बिल्डर है और वारदात से पहले जिम इंस्ट्रक्टर था, तिहाड़ जेल दो बार में आत्महत्या की कोशिश कर चुका है। एक बार उसने कुछ दवाइयां खाकर जान देने की कोशिश की थी और दूसरी बार गमछे (तौलिया) को गले में बांधकर खुद का मारने की कोशिश की। हालांकि दोनों बार वह असफल रहा और तिहाड़ के जेल नंबर-8 में बंद था दोषी विनय शर्मा को जेल प्रशासन द्वारा इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करना पड़ गया था।

    Vinay

    9 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल क्यूरेटिव याचिका में विनय शर्मा ने फांसी से बचने की आखिरी कोशिश करते हुए खुद को नाबालिग करार दिया है। विनय शर्मा ने दाखिल याचिका में कहा है कि वह 16 दिसंबर, 2012 जब वारदात हुई थी तब नाबालिग था, लेकिन कोर्ट में उसकी दलील नहीं सुनी गई।

    विनय शर्मा ने क्यूरेटिव याचिका में आरोप लगाया है कि कोर्ट ने उसके नाबालिग होने को गलत तरह से खारिज किया। क्यूरेटिव याचिका में दोषी ने लिखा है कि फांसी का फैसला सुनाते समय कोर्ट द्वारा उसकी सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति, बीमार माता-पिता सहित परिवार में निर्भर लोगों की संख्या, जेल में अच्छे व्यवहार और सुधार की संभावना पर ध्यान नहीं दिया गया। इससे न्याय का उल्लंघन होता है।

    Vinay

    याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि कोर्ट ने अपने फैसले में 'समाज की सामूहिक चेतना' और 'सार्वजनिक राय' जैसी बातों को तथ्य के तौर देखकर उसे और अन्य लोगों को मौत की सजा दी, जबकि इससे पहले कोर्ट ऐसे ही मामलों में मौत की सजा को उम्रकैद में बदला जा चुका है।

    बताया जा रहा है कि डेथ वारंट जारी होने के बाद सबसे अधिक दोषी विनय शर्मा अधिक डरा हुआ है और उसने फांसी से बचने के लिए अपने अंतिम विकल्प क्यूरेटिव याचिका का भी इस्तेमाल कर लिया है जबकि तीन अन्य दोषियों में शामिल पवन गुप्ता, अक्षय कुमार सिंह ने अभी तक फांसी के खिलाफ पुनर्विचार याचिका भी दायर नहीं किया है।

    Vinay

    हालांकि यह दोषियों के वकील की फांसी की तारीख को टालने की रणनीति भी हो सकती है, क्योंकि विनय शर्मा के बाद अब दोषी मुकेश सिंह भी क्यूरेटिव याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया है, जो दोषियों की रणनीति की पुष्टि कर देते हैं।

    यह भी पढ़ें- गुनहगारों को फांसी पर लटकते हुए अपनी आंखों से देखना चाहती हैं निर्भया की मां

    जानिए क्या है क्यूरेटिव याचिका?

    जानिए क्या है क्यूरेटिव याचिका?

    क्यूरेटिव याचिका (क्यूरेटिव पिटीशन तब दायर किया जाता है जब किसी मामले के दोषी की राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है। ऐसे में क्यूरेटिव पिटिशन ही उस दोषी के पास मौजूद अंतिम मौका होता है, जिसके जरिए वह अपने लिए पहले से तय की गई सजा में नरमी की गुहार लगा सकता है। खास बात यह है कि क्यूरेटिव याचिका किसी भी मामले में अभियोग की अंतिम कड़ी होता है। क्यूरेटिव पिटिशन पर सुनवाई होने के बाद दोषी के लिए कानून के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं।

    क्यूरेटिव याचिका में दोषी विनय शर्मा ने खुद को बताया है नाबालिग

    क्यूरेटिव याचिका में दोषी विनय शर्मा ने खुद को बताया है नाबालिग

    विनय ने याचिका में कहा कि कोर्ट ने उसके नाबालिग होने को गलत तरह से खारिज किया। साथ ही फैसला देते समय उसकी सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति, बीमार माता-पिता सहित परिवार में निर्भर लोगों की संख्या, जेल में अच्छे व्यवहार और सुधार की संभावना पर ध्यान नहीं दिया गया। इससे न्याय का उल्लंघन होता है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट ने अपने फैसले में ‘समाज की सामूहिक चेतना' और ‘सार्वजनिक राय' जैसी बातों को तथ्य के तौर देखकर उसे और अन्य लोगों को मौत की सजा दी। इससे पहले कोर्ट ऐसे ही मामलों में मौत की सजा को उम्रकैद में बदल चुका है।

    डेथ वारंट जारी जारी होने के बाद अधिक डरा हुआ है विनय शर्मा

    डेथ वारंट जारी जारी होने के बाद अधिक डरा हुआ है विनय शर्मा

    फांसी की तारीख मुकर्रर होने के बाद से निर्भया के चारों गुनहगारों के बर्ताव में लगातार परिवर्तन आ रहा है। जेल सूत्रों का कहना है कि मौत को नजदीक आते देखकर सभी खामोश हो गए हैं। मेडिकल जांच के दौरान कुछ भी पूछने पर भड़क जाते हैं। डेथ वारंट जारी होने के बाद बीते तीन दिन में चारों दोषियों का वजन भी कुछ कम हो गया है। उसकी वजह चिंता और ठीक से भोजन नहीं करना बताया जा रहा है। डेथ वारंट जारी होने के बाद सबसे अधिक विनय डरा हुआ है। डेथ वारंट जारी होने के बाद बीते तीन दिन में चारों दोषियों का वजन भी कुछ कम हो गया है। उसकी वजह चिंता और ठीक से भोजन नहीं करना बताया जा रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई है एक और दिलचस्प याचिका

    सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई है एक और दिलचस्प याचिका

    एक एनजीओ ने कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए मांग है कि उन्हें जेल में बंद दोषियों से उन्हें मिलने दिया जाए ताकि हम उनको अंग दान करने के लिए प्रेरित कर सके। यह इसलिए अधिक दिलचस्प तब है कि निर्भया गैंगरेप के चार दोषियों में से एक विनय कुमार शर्मा ने फांसी की सजा के खिलाफ लगातार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एनजीओ आरएसीओ की तरफ से पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए वकील आर कपूर ने कहा कि उन्होंने कोर्ट में अर्जी दी है, जिसमें निर्भया केस के दोषियों को उनके अंगों को दान करने के लिए प्रेरित करने के लिए उनसे मिलने की अनुमति मांगी गई है। उन्होंने कहा कि 19 दिसंबर को इस संबंध में हम तिहाड़ जेल प्रशासन से मिले थे और उन्होंने हमें अदालत से आदेश लेने के लिए कहा था।

    अब कहां है छठा आरोपी जिनसे की थी सबसे ज्याद दरिंदगी

    अब कहां है छठा आरोपी जिनसे की थी सबसे ज्याद दरिंदगी

    निर्भया कांड का जब-जब जिक्र होगा, तब-तब लोग उस दरिंदे को याद करेंगे, जिसने निर्भया के साथ सबसे ज्यादा बेरहम सुलूक किया। भले ही वह उस वक्त नाबालिग था। आज वह जहां भी होगा लगभग 24 साल का हो गया होगा। निर्भया का छठा आरोपी 16 दिसंबर, 2012 के दिन जरूर नाबालिग था, लेकिन वह कुछ महीने बाद ही बालिग होने वाला था। हालांकि उस समय के कानून के मुताबिक उसे नाबालिग ही माना गया और मौजूदा कानून के आधार पर उसे सजा देने की बजाय सुधार गृह में भेजने का फैसला सुनाया था।

    नए कानून में 18 से घटाकर 16 की गई है नाबालिगों की उम्र

    नए कानून में 18 से घटाकर 16 की गई है नाबालिगों की उम्र

    निर्भया के साथ हुई दरिंदगी में शामिल रहा और मृतका निर्भया के साथ सबसे बुरा बर्ताव करने वाला दोषी नाबालिग 7 वर्ष 22 दिन बाद अब जहां भी होगा 24 साल का हो चुका होगा। 5 मई, 2017 में जब कोर्ट ने नाबालिग होने के चलते उसे तीन वर्ष के लिए सुधार गृह में भेज दिया था, जहां से उसे दिसंबर 2016 में ही मुक्त कर दिया गया। ऐसी अपुष्ट जानकारी है कि फिलहाल वह दक्षिण भारत के किसी राज्य में कुक का काम कर रहा है। उसने दिल्ली में प्रेक्षणगृह में खाना पकाने का काम सीखा था। एक एनजीओ के अधिकारी ने बताया कि उसने अपना नया नाम रख लिया है। नाबालिग आरोपी के गांववालों को भी नहीं पता कि वह अब कहां है, लेकिन लोग गांव के लिए आज भी उसे कलंक ही मानते हैं।

    उत्तर प्रदेश के जल्लाद देगा निर्भया के दोषियों को फांसी

    उत्तर प्रदेश के जल्लाद देगा निर्भया के दोषियों को फांसी

    मेरठ का रहने वाले पवन नामक जल्लाद निर्भया के दोषियों को फांसी देगा। तिहाड़ जेल प्रशासन ने यूपी के जेल राज्य मंत्री को एक पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश के जेलों से 'जल्लादों' की जानकारी मांगी थी, साथ ही मेरठ जेल के जल्लाद पवन की सेवाएं लेने की अनुमति भी मांगी थी। वहीं, प्रदेश के जेल राज्यमंत्री ने इसके लिए अनुमति दे दी है। पार्ट टाइम में वो इस शहर में साइकिल पर कपड़ा बेचने का का काम करता है। करीब दो तीन साल पहले जब निठारी हत्याकांड के दोषी ठहराए सुरेंद्र कोली को फांसी दी जाने वाली थी, वो उसके लिए पवन को ही मुकर्रर किया गया था। हालांकि बाद में वो फांसी टल गई।

    चलती बस में गैंगरेप के बाद निर्भया से सड़क पर फेंक दिया था

    चलती बस में गैंगरेप के बाद निर्भया से सड़क पर फेंक दिया था

    आज से 7 वर्ष 22 दिन पूर्व गत 16 दिसंबर, 2012 की रात को एक नाबालिग समेत छह लोगों ने एक चलती बस में 23 वर्षीय निर्भया का सामूहिक बलात्कार किया था और उसे और उसके दोस्त को चलती बस से बिना कपड़ों के बाहर सड़क के किनारे फेंक दिया था। इस घटना की निर्ममता के बारे में जिसने भी पढ़ा-सुना उसके रोंगटे खड़े हो गए। इस घटना के बाद पूरे देश में व्यापक प्रदर्शन हुए और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर आंदोलन शुरू हो गया था। निर्भया को जब बरामद किया गया तो उसकी सांसें चल रहीं थी और इलाज के लिए उसे सिंगापुर ले जाया गया था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका था।

    6 गुनहगार, 1 ने सुसाइड किया, दूसरा नाबालिग, 4 को होगी फांसी

    6 गुनहगार, 1 ने सुसाइड किया, दूसरा नाबालिग, 4 को होगी फांसी

    5 मई, 2017 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा ने निर्भया गैंगरेप के चार दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा। इनमें दोषी मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, अक्षय कुमार सिंह और विनय शर्मा का नाम शामिल था। चूंकि पांचवें आरोपी और बस ड्राइवर राम सिंह ने जेल के भीतर ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी और छठे आरोपी को कोर्ट ने नाबालिग के आधार पर तीन वर्ष के लिए बाल सुधार गृह में भेज दिया था, जो दिसंबर 2016 में छूट गया है और अब दक्षिण भारत के किसी राज्य में अज्ञातों की तरह जीवन व्यतीत कर रहा है।

    भारत में पिछले तीन दशकों में होगी 20वीं फांसी

    भारत में पिछले तीन दशकों में होगी 20वीं फांसी

    निर्भया गैंगरेप के चार दोषियों को 22 जनवरी, सुबह 7 बजे फांसी दिया जाना तय है। यह पिछले तीन दशकों में भारत में दी जाने वाली 20 फांसी होगी। इससे पहले दुष्कर्मी धनंजय चटर्जी को फांसी की सजा दी गई थी। धनंजय को 14 साल की नाबालिक लड़की से दुष्कर्म करने और उसकी हत्या का दोषी पाया गया था और उसे 14 अगस्त 2004 को कोलकाक की अलीपोर सेंट्रल करेक्शनल होम में फांसी दी गई थी। हालांकि अलग-अलग मामलों में अब तक देश में 16 दोषियों को फांसी की सजा दी जा चुकी है।

    2008 में अजमल कसाब को यरवदा जेल में दी गई फांसी

    2008 में अजमल कसाब को यरवदा जेल में दी गई फांसी

    21 नवंबर 2012 को मुंबई 26/11 हमले के दोषी अजमल कसाब को पुणे के यरवदा जेल में फांसी दी गई थी। वहीं, 9 फरवरी 2013 को भारतीय संसद पर हमले में दोषी पाए गए आतंकी अफजल गुरु को फांसी दी गई थी। 2015 में याकूब मेमन को नागपुर की जेल में फांसी हुई थी। उसे 1993 के मुबंई धमाकों में षडयंत्र के लिए फांसी दी गई। इससे पूर्व तिहाड़ में इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिह और केहर सिंह को 1989 में फांसी के फंदे पर लटकाया गया।

    1982 में बिल्ला और रंगा को तिहाड़ जेल में दी गई फांसी

    1982 में बिल्ला और रंगा को तिहाड़ जेल में दी गई फांसी

    राजधानी स्थित सबसे बड़े सेंट्रल जेल तिहाड़ में 1982 में बिल्ला और रंगा नामक दोषी को तिहाड़ में ही फांसी पर लटकाया गया था। जसबीर सिह उर्फ बिल्ला व कुलजीत सिंह उर्फ रंगा दिल्ली की एक नाबालिग लड़की के अपहरण व हत्या का दोषी था। इसके बाद 1984 अलगाववादी मकबूल बट्ट को 1984 में फांसी पर लटकाया गया था। इसके बाद 1985 में विद्या जैन हत्या मामले के दोषी करतार सिंह व उजागर को फांसी पर लटकाया गया था।

    English summary
    In a curative petition filed in the Supreme Court on 9 January, Vinay Sharma, while making his last attempt to escape the execution, has declared himself a minor. Vinay Sharma has said in the petition that he was a minor when the incident took place on December 16, 2012, but his plea was not heard in the court. Vinay Sharma has alleged in the curative petition that the court wrongly rejected his minor.
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