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फांसी की भनक से ही थरथर कांप रहे निर्भया गैंगरेप दोषी, जानिए जेल में फांसी की पूरी प्रक्रिया!

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बेंगलुरू। हैदराबाद में 4 गैंगरेप आरोपियों की पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत के बाद दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के 4 दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाने की कवायद शुरू हो चुकी हैं। पिछले एक पखवाड़े से निर्भया गैंगरेप में दोषी ठहराए गए चारों अपराधियों को जल्द फांसी पर लटकाने की मांग ने जोर पकड़ी हैं।

Nirbhaya

हैदराबाद की वेटनरी डाक्टर के साथ हैवानियत करने वाले चारों आरोपियों की घटना के महज 10 दिन बाद पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत के बाद निर्भया की मां का धैर्य जवाब दे गया, जो पिछले 7 वर्ष से निर्भया के दोषियों को फांसी के फंदे पर झूलाने का इंतजार कर रहीं थी। यही वजह थी कि निर्भया की मां ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में दोषियों को जल्द फांसी पर लटकाने के लिए अपील की।

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निर्भया की मां ही नहीं, बल्कि पूरा देश अब 16 दिसंबर, 2012 में हुए दिल्ली गैंगरेप की घटना को याद करते हुए निर्भया के दोषियों को फांसी के फंदे पर चढ़ाने के लिए सड़कों पर उतर आया है और सभी जल्द से जल्द सभी दोषियों को फांसी के फंदे पर झूलता देखना चाहते हैं।

अदालत पहुंची निर्भया की मां ने चारों दोषियों के लिए जल्द से जल्द फांसी की मांग की है। निर्भया की मां की दलील दी है कि दोषी सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा पाने के बावजूद अभी भी जेल में ही बंद है इसलिए कोर्ट जल्द उनके खिलाफ डेथ वारंट जारी करें और साथ ही सभी दोषियों की फांसी की तारीख भी सुनिश्चित करें।

हालांकि 13 दिसंबर को हुई पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई टल गई, क्योंकि निर्भया गैंगरेप केस के एक दोषी ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर रखी है, जिसकी सुनवाई 17 दिसंबर को होनी है। पटियाला कोर्ट अब दोषियों को डेथ वारंट सुनाने और उन्हें फांसी पर चढ़ाने की सुनवाई 18 दिसंबर को करेगी। इसलिए अब 18 दिसंबर के बाद ही चारों दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाया जा सकेगा। अटकलें थी कि दोषियों को 16 दिसंबर को फांसी पर चढ़ाया जा सकता है।

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उल्लेखनीय है 16 दिसंबर, 2012 को ही दोषियों ने निर्भया के साथ गैंगरेप को अंजाम दिया था, जिसके बाद सड़क पर फेंक दिया। गंभीर हालत में इलाज के लिए पीड़िता को सिंगापुर इलाज के लिए ले जाया गया, जहां बीच इलाज में पीड़िता ने दम तोड़ दिया थाा। पीड़िता की मौत के बाद पूरे देश में व्यापक प्रदर्शन हुआ।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट में 9 महीने के बाद सुनवाई में दोषी पाए गए सभी दोषियों को 2013 में फांसी की सजा सुनाई गई थी। गैंगरेप-मर्डर के इस केस में एक नाबालिग आरोपी को तीन साल के लिए सुधार गृह भेज दिया था, जहां से उसे बाद में रिहा कर दिया गया। वहीं, दोषी राम सिंह ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी।

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चूंकि अभी निर्भया के दोषियों को फांसी की तिथि सुनिश्चित नहीं हुआ है, लेकिन तिहाड़ जेल प्रशासन ने दोषियों को फांसी पर लटकाने की तैयारी शुरू कर दी हैं, जहां अंतिम बार फांसी की सजा आतंकी अफजल गुरु को दी गई थी। हालांकि दिल्ली की तिहाड़ जेल में यह पहला मौका होगा जब एक साथ चार लोगों को फांसी की सजा दी जाएगी।

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इसके पहले पुणे की यरवदा जेल में 27 नवंबर 1983 को जोशी अभयंकर केस में दस लोगों का कत्ल करने वाले चार लोगों को एक साथ फांसी दी गई थी। तिहाड़ में 37 साल पहले 31 जनवरी 1982 को रंगा-बिल्ला को फांसी दी गई थी।

दोषियों की पुनर्विचार याचिका, रिव्यू याचिका और दया याचिका

फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के छह माह के बाद निर्भया गैंगरेप केस के तीन दोषियों ने दिल्‍ली हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दी। फांसी की सजा को लेकर दोषियों की मनोदशा कैसी है।

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इसका पता चलता है जब दोषी इसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गए। अप्रैल 2016 से निर्भया गैंगरेप केस में फास्‍ट ट्रैक मोड में सुनवाई शुरू हुई। मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने भी चारों आरोपियों की मौत की सजा को बरकरार रखते हुए एक बार फिर उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में खारिज होनी तय है आखिरी रिव्यू पिटीशन

इसी मामले में जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट में दायर रिव्‍यू पीटीशन भी खारिज हो चुकी है। चूंकि चारों में से तीन दोषियों की ही रिव्‍यू पिटीशन खारिज हो चुकी है, तो अब चौथा दोषी भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जिसकी सुनवाई 17 दिसंबर को होनी है। माना जा रहा है पिछले रिव्यू पिटीशन की तरह यह भी सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो जाएगा।

दोषी ने कहा, जब दिल्ली के प्रदूषण से मरने वाले हैं तो फांसी क्यूं?

इस बीच, चारों दोषियों में से एक पवन गुप्ता के पिता हीरालाल गुप्ता ने कहा कि उनका बेटा निर्दोष है। हीरालाल ने माना कि पीड़िता के साथ हैवानियत हुई थी, लेकिन दोषी के पिता का कहना था कि पवन को जबरन फंसाया गया है। इसी दौरान एक दोषी अक्षय सिंह ठाकुर ने फांसी की सजा से बचने के लिए सुप्रीम में अपील करते हुए याचिका दायर किया कि जब दिल्ली में प्रदूषण से मरने ही वाले हैं तो उसे फांसी क्यों दी जा रही है।

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फांसी पर लटकने की भनक लगी तो गायब हो गई भूख और प्यास

निर्भया गैंगरेप दोषियों को जब से जल्द फांसी पर लटकाए जाने की भनक लगी है तब से डर से चारों दोषियों को कंपकंपी छूट रही है। उनमें से एक ने तो खाना भी कम कर दिया है। उनकी भूख और प्यास दोनों गायब हो गए हैं। यही वजह है कि बीते हफ्तेभर में सभी कैदियों का वजन कई किलो तक घटा है।

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जेल प्रशासन लगातार करवा रही है चारों के स्वास्थ्य की निगरानी

इसलिए जेल प्रशासन लगातार चारों कैदियों की स्वास्थ्य की निगरानी करवा रही हैं ताकि फांसी पर लटकाए जाने से पहले उनकी मौत न हो पाए। यही नहीं, डर से कांप रहे तीन दोषी पांच दिन से काम पर भी नहीं गए। दोषी अक्षय, मुकेश और पवन एक ही सेल में बंद हैं जबकि विनय की तबियत खराब है। विनय वही है, जिसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजी गई थी, जिसे बाद में वापस ले ली गई थी।

निर्भया केस: डेथ वारंट में क्या होता है फॉर्म-42, जो तय करता है दोषी की फांसी

जानिए क्या होता है जब सुनिश्चित हो जाती है दोषी को फांसी पर लटकाए जाने की तिथि-

फांसी की संभावना के मद्देनजर दोषियों की विशेष निगरानी

फांसी की संभावना के मद्देनजर दोषियों की विशेष निगरानी

तमिलनाडु स्पेशल पुलिस के जवान इन पर विशेष निगरानी रखेंगे, ताकि दोषी खुदकुशी का प्रयास न कर सकें। डेथ सेल में बंद दोषियों को नाड़ा वाला पायजामा तक पहनने की इजाजत नहीं होगी। निर्भया के सभी गुनाहगारों को एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। दिल्ली में अब तक एक साथ पहली बार चार गुनाहगारों को फांसी पर लटकाया जाएगा। इससे पहले 1982 में रंगा बिल्ला को फांसी पर लटकाया गया था।

सभी 4 दोषियों को हमउम्र कैदियों के साथ रखा जा रहा है

सभी 4 दोषियों को हमउम्र कैदियों के साथ रखा जा रहा है

जेल सूत्रों का कहना है कि सभी दोषियों को अलग अलग सेल में रखा गया है। इनके साथ हम उम्र दो-दो कैदियों को रखा गया है। इनके साथ ऐसे कैदियों को रखा गया है जो स्वभाव से उग्र नहीं हैं और उनका व्यवहार अच्छा है। उन कैदियों को इन्हें समझाने-बुझाने के लिए कहा गया है।

अभी तक तिहाड़ में एक साथ चार दोषियों को फांसी नहीं मिली

अभी तक तिहाड़ में एक साथ चार दोषियों को फांसी नहीं मिली

तिहाड़ जेल में इससे पहले कभी भी एक साथ चार दोषियों को फांसी नहीं दी गई है। आखिरी बार 31 जनवरी 1982 में रंगा-बिल्ला को एक साथ फांसी दी गई थी। जेल के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि तिहाड़ प्रशासन एक साथ चार दोषियों को फांसी देने को लेकर तैयारी कर रहा है। इससे पहले पुणे के यड़बड़ा जेल में वर्ष 1983 में दस लोगों की हत्या के चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई थी।

फांसी पर लटकाए जाने वाले तख्त की लंबाई होगी करीब 10 फीट

फांसी पर लटकाए जाने वाले तख्त की लंबाई होगी करीब 10 फीट

जेल सूत्रों के मुताबिक, तिहाड़ में जो फांसी घर है उसके तख्त की लंबाई करीब दस फीट है, जिसके ऊपर दो दोषियों को आसानी से खड़ा किया जा सकता है। इस तख्ते के ऊपर लोहे की रॉड पर दो दोषियों के लिए फंदे लगाने होंगे। तख्त के नीचे भी लोहे की रॉड होती है, जिससे तख्त खुलता और बंद होता है।

इस रॉड का कनेक्शन तख्त के साइड में लगे लिवर से होता है। लिवर खींचते ही नीचे की रॉड हट जाती है और तख्त के दोनों सिरे नीचे की तरफ खुल जाते हैं, जिससे तख्त पर खड़ा दोषी के पैर नीचे झूल जाते हैं। हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि वह दोषियों को एक-एक कर फांसी देंगे।

दोषियों के वजन से तैयार होते हैं फांसी के फंदे

दोषियों के वजन से तैयार होते हैं फांसी के फंदे

जेल अधिकारियों के मुताबिक, दोषियों के वजन के हिसाब से फंदे की रस्सी की लंबाई तय होती है। तख्त के नीचे की गहराई करीब 15 फीट है, ताकि फंदे पर लटकने के बाद झूलते पैर का फासला हो। कम वजन वाले दोषी को लटकाने के लिए रस्सी की लंबाई ज्यादा रखी जाती है, जबकि भारी वजन वाले के लिए रस्सी की लंबाई कम रखी जाती है। सूत्रों का कहना है कि अफजल की फांसी के ट्रायल के दौरान दो बार रस्सी टूट गई थी।

फांसी से पूर्व दोषी की वसीयत और आखिरी मुलाकात कराई जाती है

फांसी से पूर्व दोषी की वसीयत और आखिरी मुलाकात कराई जाती है

किसी भी दोषी को फांसी दिए जाने से पहले दोषी अगर वसीयत तैयार करना चाहता है और अपने रिश्तेदार से मिलने की ख्वाहिश करता है तो उसे इस बात की इजाजत दी जाती है। वसीयत तैयार करने के दौरान मजिस्ट्रेट को जेल में बुलाया जाता है। फांसी के दिन दोषी को नहाने के बाद पहनने के लिए नए कपड़े दिए जाते हैं।

मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में दोषी को सेल से फांसी के तख्ते पर लाया जाता है

मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में दोषी को सेल से फांसी के तख्ते पर लाया जाता है

दोषी को तैयार करने के बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में दोषी को सेल से फांसी के तख्ते पर ले जाया जाता है। इस दौरान उसके चेहरे को कपड़े से ढक दिया जाता है ताकि वह आसपास चल रही गतिविधि को नहीं दे सके। फांसी के तख्ते तक ले जाने के दौरान मौत को सामने देखकर दोषी चल नहीं पाता है। ऐसी स्थिति में उसके साथ चल रहे पुलिसकर्मी उसे सहारा देकर ले जाते हैं। जेल मैन्युअल के अनुसार, इस दौरान एक डॉक्टर, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट, जेलर, डिप्टी जेलर और करीब 12 पुलिसकर्मी मौजूद रहते हैं।

रुमाल गिराकर इशारा करके खामोशी में दी जाती है फांसी

रुमाल गिराकर इशारा करके खामोशी में दी जाती है फांसी

फांसी घर में एकदम खामोशी होती है। यहां सारी कार्रवाई इशारों में होती है। ब्लैक वारंट में तय समय पर दोषी को वहां लाकर उसकी गर्दन में फंदा पहनाया जाता है, फिर जेलर के रुमाल गिराकर इशारा करने पर जल्लाद या फिर जेल का कर्मचारी लिवर को खींच देता है। लिवर खींचते ही तख्त खुल जाता है और फंदा पर लटका दोषी नीचे चला जाता है। कुछ देर बाद डॉक्टर वहां पहुंचकर उसकी जांच करता है। धड़कन बंद होने की पुष्टि होने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। उसके बाद उसे फंदे से उतार लिया जाता है।

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English summary
Since the date of execution of the convicts of Nirbhaya has not been confirmed yet, the Tihar Jail administration has started preparations to hang the convicts, where the last execution was given to terrorist Afzal Guru. However, this will be the first time in Delhi's Tihar Jail when four people will be hanged together.
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