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Nirbhaya: पिछले 7 वर्षों में कई बार खुद को जेल में नुकसान पहुंचा चुका है शातिर विनय शर्मा!

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बेंगलुरू। दिल्ली गैंगरेप व मर्डर केस के सभी चारो दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए नई तारीख 3 मार्च, सुबह 6 बजे मुकर्रर किया गया है, लेकिन सभी चार दोषियों में शातिर दोषी विनय शर्मा ने एक बार फांसी से बचने की कोशिश की है। विनय शर्मा इससे पहले भी कई बार जेल में रहते हुए खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है।

एक दफा तो वह जेल के भीतर खुदकुशी करने की कोशिश कर चुका है। एक बार फिर दोषी विनय शर्मा ने जेल की दीवार में अपना सिर मारकर खुद को घायल कर लिया है। इसकी तस्दीक तब हुआ जब कोर्ट ले जाते समय उसके सिर पर सफेद रंग का कपड़ा बंधा हुआ था।

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दोषी विनय शर्मा की यह कवायद फांसी की तारीख को एक बार फिर फांसी की तारीख को टालने की मंशा से किया गया लगता है, क्योंकि चारो दोषियो के वकील एपी सिंह ने मीडिया में दिए हालिया बयान में विनय शर्मा को मानसिक रूप से परेशान बताया था और अदालत में मानसिक बीमारी का हवाला देकर उसकी फांसी रूकवाने के मंसूबों का भी खुलासा कर दिया था।

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हालांकि दोषी पवन गुप्ता को छोड़कर शेष सभी दोषियों के पास फांसी से बचने के लिए सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं। शायद यही कारण है कि विनय शर्मा ने फांसी की तिथि को आगे बढ़ाने के लिए नया ट्रिक तैयार किया है।

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गौरतलब है दिल्ली की पटियाला हाऊस कोर्ट ने चारो दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए तीसरा डेथ वारेंट जारी किया है, जिसके मुताबिक चारों दोषियों को 3 मार्च, सुबह 6 बजे लटकाया जाना है। चूंकि अभी दोषी पवन गुप्ता के पास क्यूरेटिव और दया याचिका का विकल्प शेष बचा हुआ है, इसलिए एक बार फिर चारों दोषियों की फांसी के दिन पर आशंका के बादल मंडरा रहे हैं। माना जा रहा है कि कानूनी विकल्पों की मौजूदगी में विनय शर्मा द्वारा दीवार पर सिर टकराया जाना वकील एपी सिंह की अह्म नीति का हिस्सा है।

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यह इसलिए क्योंकि वकील एपी सिंह की सलाह पर ही चारों दोषियों ने अपनी कानूनी विकल्पों को बारी-बारी से इस्तेमाल करते हुए फांसी की तिथि को लगातार टालने में सफल रहे हैं। चूंकि अभी दोषी पवन गुप्ता के पास ही कानूनी विकल्प मौजदू हैं इसलिए फांसी को टालने के लिए यह नया नाटक रचा गया है।

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क्योंकि कानूनन मेडिकली फिट नहीं होने पर किसी अपराधी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है। इससे भली-भांति परिचित वकील एपी सिंह ने यह नई चाल चली है ताकि 3 मार्च से दोनों कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किए बिना ही फांसी को लटकाया जा सके। इस तरह तीसरा डेथ वारेंट भी स्वतः कैंसिल हो जाएगा।

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बताया जाता है कि गत 16 जनवरी को दोषी विनय शर्मा ने जेल की दीवार पर अपना सिर दे मारा था, जिसमें उसे कितना गंभीर चोटें आई हैं, इसका पता नहीं चल सका है। हालांकि विनय शर्मा को दीवार पर सिर पटकता देखकर वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोक दिया।

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हालांकि जेल प्रशासन का दावा है कि दोषी विनय शर्मा की चोट मामूली है, लेकिन विनय शर्मा की हरकतों को देखते हुए अब अन्य दोषियों को लेकर भी जेल प्रशासन मुस्तैद हो गया है। सूत्र बताते हैं कि तीसरी बार डेथ वारेंट जारी होने के बाद चारो दोषियों के बर्ताव में काफी बदलाव देखा गया है और उन्हें छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ रहा है।

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उल्लेखनीय है जेल प्रशासन अब सीसीटीवी पर भी चारो दोषियों के बर्ताव की मॉनीटरिगं कर रहा है और चारो दोषियों पर नज़र रखने के लिए बाकायदा एक कर्मचारी की नियुक्त किया गया है। यह बात पूरी तरह से स्पष्ट है कि दोषी विनय शर्मा द्वारा खुद को फांसी से बचाने की यह आखिरी चाल है।

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और अगर वह खुद को मेडिकल अनफिट करने में सफल रहा तो फांसी एक बार टल सकती है, लेकिन यह उसकी आखिरी हो कोशिश होगी, क्योंकि इसके बाद शेष तीनों दोषियों के साथ उसका फांसी के तख्ते पर चढ़ना तय है। हालांकि पता चला है कि अस्पताल ले जाए गए विनय शर्मा को इलाज के बाद तत्काल डिस्चार्ज कर दिया गया था।

Final Death Warrant: इसलिए 3 मार्च को निर्भया के चारो दोषियों का फांसी पर लटकना तय है!

फांसी से बचने के लिए दोषी पवन गुप्ता के पास शेष हैं सिर्फ दो विकल्प!

फांसी से बचने के लिए दोषी पवन गुप्ता के पास शेष हैं सिर्फ दो विकल्प!

निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस में चारों दोषियों में से एक पवन गुप्ता के पास ही फांसी से बचने के दो विकल्प बचे हैं, जिसकी वजह से वह खुद के अलावा अपने बाकी गुनहगार साथियों को भी फांसी पर लटकने से कुछ दिनों के लिए बचा सकता है। दोषियों के वकील ने अक्षय ठाकुर की ओर से भी एक और नई मर्सी पिटीशन लगाने की भी बात कर रहा है, हालांकि यह उसकी बौखलाहट को साबित करती है। यही कारण है कि उसने आरोप लगाया है कि मीडिया और राजनेताओं के दबाव के चलते कोर्ट ने तीसरा डेथ वारंट जल्दबाजी में जारी किया है।

दोषी विनय शर्मा को मानसिक रोगी बताने में जुट गया है उसका वकील

दोषी विनय शर्मा को मानसिक रोगी बताने में जुट गया है उसका वकील

एक-एक करके निर्भया के तीन दोषियों के कानूनी विकल्पों को समाप्त होता देखकर चारों दोषियों के वकील एपी सिंह ने नए डेथ वारेंट को कैंसिल कराने के लिए अब एक नई चाल चलने की कोशिश की है। नई चाल के तहत एपी सिंह ने दोषी विनय शर्मा को मानसिक रोगी करार देने में लगा हुआ है। एक बयान में एपी सिंह ने कहा कि उनका मुवक्किल विनय शर्मा गंभीर मानसिक बीमारी की दौर से गुजर रहा है। उसके सिर में गंभीर चोटे आई हैं, इसलिए ऐसी हालत में उसे फांसी नहीं दी जा सकती। दोषियों के वकील के मुताबिक विनय के सिर पर पट्टियां बंधी हुई हैं, जो कि मुलाकात करने गई उसकी मां ने भी देखी है। उन्होंने अदालत से उसके सिर में चोट की जांच के लिए मेडिकल रिपोर्ट की भी मांग की।

1 फरवरी को डेथ वारेंट कैंसिल हुआ तो निर्भया की मां के आंखों से आंसू बह निकले

1 फरवरी को डेथ वारेंट कैंसिल हुआ तो निर्भया की मां के आंखों से आंसू बह निकले

निर्भया के पिता यहीं नहीं रुके, उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली की महिलाएं यह समझ लें कि दिल्ली में सिर्फ बिजली और पानी ही जरूरी है, महिलाओं की सुरक्षा भी जरूरी है। अगर दिल्ली में महिलाएं सुरक्षित नहीं है, तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ अरविंद केजरीवाल ही जिम्मेदार हैं। वहीं, निर्भया की मां आशा देवी के जज्बे को सलाम किया जाना चाहिए, जो लड़ाई आगे भी जारी करते हुए अपने जज्बातों को काबू मे किया हुआ है। हालांकि जब 1 फरवरी को डेथ वारेंट कैंसिल हुआ तो उनकी आंखों में आंसू बह निकले। पिछले 7 वर्षों से अपने जज्बातों पर काबू करती आ रहीं मां आशा देवी ने मीडिया के सामने आई तो अपने जज्बात को छुपा नहीं पाईं।

22 जनवरी को फांसी पर चढ़ाने के लिए जारी हुआ था पहला डेथ वारेंट

22 जनवरी को फांसी पर चढ़ाने के लिए जारी हुआ था पहला डेथ वारेंट

18 दिसंबर, 2019 वह आखिरी तारीख थी जब सुप्रीम कोर्ट ने सभी दोषियों की अंतिम अपीलों को खारिज कर दिया और 7 जनवरी को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 22 जनवरी को सभी दोषियों को फांसी पर चढ़ाने के लिए डेथ वारेंट जारी किया। यही वह समय था जब न्याय और कानूनी प्रक्रिया के बीच पिस रही निर्भया के मां की एक और जंग शुरू हुई।

रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस में पूरे देश में 'ऑन द स्पॉट न्याय' की मांग उठी

रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस में पूरे देश में 'ऑन द स्पॉट न्याय' की मांग उठी

दिल्ली गैंगरेप और मर्डर की तरह हैवानियत हैदराबाद में वेटनरी डाक्टर के साथ भी चारो आरोपियों द्वारा किया गया। एक सुर में पूरे देश में आवाज उठी कि दिल्ली गैंगरेप केस में दोषी पाए गए चारो दरिंदों का भी ऐसा ही अंजाम होना चाहिए था। कहते हैं देर से मिला न्याय भी अन्याय के बराबर होता है और भारतीय न्यायिक प्रणाली की लचर व्यवस्था को आधार बनाकर उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम देश के हर कोने से लोगों ने हैदराबाद पुलिस के कृत्य को जायज ठहराते हुए ऐसे रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस में ऑन द स्पॉट न्याय को वक्त की जरूरत तक बता डाला।

जेल मैनुअल में बदलाव के लिए केजरीवाल को मिल चुकी है फटकार

जेल मैनुअल में बदलाव के लिए केजरीवाल को मिल चुकी है फटकार

दिल्ली की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी पर निर्भया के दोषियों को बचाने का आरोप लगाया है, जिसे दिल्ली सीएम ने राजनीति करार देकर पल्ला झाड़ लिया है। हालांकि निर्भया के दोषियों की फांसी में देरी के लिए जिस संशोधित जेल मैनुअल को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, उस पर अभी तक आम आदमी पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री की ओर से कोई सफाई नहीं आई है। जबकि जेल मैनुअल में बदलाव के लिए दिल्ली हाईकोर्ट तक केजरीवाल सरकार को फटकार लगा चुकी है। हाईकोर्ट भी जेल मैनुअल किए गए बदलाव को निर्भया के दोषियों की फांसी में हो रही देरी के लिए जिम्मेदार ठहरा चुकी है।

दिल्ली सरकार के संशोधित नए जेल मैनुअल का रूल 854 है दोषी

दिल्ली सरकार के संशोधित नए जेल मैनुअल का रूल 854 है दोषी

दिल्ली के कोर्ट द्वारा जारी हुआ आखिरी डेथ वारेंट भी कैंसिल हो चुका है। लगातार डेथ वारेंट क्यों कैंसिल हो रहे हैं इसका जवाब दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित जेल मैनुअल में छिपा हुआ है। संशोधित नए जेल मैनुअल का रूल 854 कहता है कि एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है, जब तक कि प्रत्येक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए।

मोदी सरकार ने मौत की सजा पर नई गाइडलाइन तय करने की मांग की थी

मोदी सरकार ने मौत की सजा पर नई गाइडलाइन तय करने की मांग की थी

निर्भया के गुनहगारों की फांसी में हो रही देरी को देखते हुए इस साल 22 जनवरी को केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। गृह मंत्रालय ने अपनी याचिका में यह मांग की थी कि मौत की सजा पर सुधारात्मक याचिका दाखिल करने के लिए समयसीमा तय की जाए। मौजूदा नियमों के मुताबिक, किसी भी दोषी की कोई भी याचिका लंबित होने पर उस केस से जुड़े बाकी दोषियों को भी फांसी नहीं दी जा सकती।

मौत की सजा पर भविष्य में छह महीने के भीतर अपील पर सुनवाई होगी

मौत की सजा पर भविष्य में छह महीने के भीतर अपील पर सुनवाई होगी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देश में मौत की सजा के मामले में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ छह माह के भीतर अपील पर सुनवाई तय कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के सर्कुलर में कहा गया है कि किसी मामले में जब हाईकोर्ट मौत की सजा की पुष्टि करता है या उसे बरकरार रखता है और अगर सुप्रीम कोर्ट भी उस पर सुनवाई की सहमति जताता है तो आपराधिक अपील पर सहमति की तारीख से छह माह के भीतर मामले को शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया जाएगा, भले ही यह अपील तैयार हो पाई हो या नहीं। यह निः संदेह इंसाफ की राह देख रहे पीड़ित और उसके परिवार के लिए राहत की बात है

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English summary
The act of convicting Vinay Sharma with a head injury in the wall seems to be done once again with the intention of postponing the execution date, as AP Singh, the lawyer of the four convicts, in the latest statement in the media called Vinay Sharma as mentally ill Was. The lawyer had also revealed the plans to stop his hanging in the court citing mental illness.
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