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निर्भया केस में सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई अब ये पीआईएल, क्या कोर्ट देगा इसकी परमीशन?

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बेंगलुरु। निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के चारों दोषियों को तीन मार्च को फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। तिहाड़ जेल प्रशासन ने इन्‍हें फांसी दिए जाने संबंधी सभी तैयारी एक बार फिर से शुरु कर दी हैं। तिहाड़ जेल प्रशासन ने चारों दरिंदों को लिखित तौर पर सूचना दी है कि अंतिम मुलाकात जब करनी हो, वे अपने परिवार और जेल प्रशासन को बता दें।

nirbhya

अगर निर्भया के दोषियों को होने वाली फांसी टलती नहीं है तो दोषी अपने परिवार से आखिरी बात मुलाकात करेंगे। वहीं निर्भया केस के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गयी हैं। जानिए ये जनहित याचिका किस लिए दायर की गयी और क्या कोर्ट इसकी परमीशन देगा?

जनहित याचिका दाखिल कर इस बात की मांगी इजाजत

जनहित याचिका दाखिल कर इस बात की मांगी इजाजत

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका शुक्रवार को दाखिल की गई हैं जिसमें निर्भया गैंगरेप कांड के चारो दोषियों को शरीर और अंग दान करने का विकल्‍प देने की मांग की गई है। ताकि इन दोषियों का शरीर और अंग दान करने के बाद मेडिकल रिसर्च और किसी जरुरतमंद लोगों के काम आ सके। इस याचिका में मांग की गई है कि सरकार और जेल प्रशासन को निर्देश दिया जाए कि वह चारों दोषियों को शरीर और अंग दान का विकल्‍प दें। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गयी याचिका में फांसी की सजा पाए कैदियों व अन्य कैदियों के अंग दान के बारे में एक नीति बनाए जाने की भी मांग की गई है। इस याचिका में अपील की गयी हैं कि इसके संबंध में जेल नियमों में आवश्‍यक बदलाव करने का भी निर्देश दिया जाए।

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 नीति बनाने की गई मांग

नीति बनाने की गई मांग

शुक्रवार का सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गयी याचिका पर सुनवाई की अभी तारीख नहीं तय हुई है। कोर्ट में ये याचिका वकील कमलेन्द्र मिश्रा के जरिए सेवानिवृत न्यायाधीश माइकल एफ सलदाना और एक अन्य ने दाखिल की गई है। इस पीआईएल में चिंता व्‍यक्त की गई कि भारत में अंग दान के मामले में बहुत कमी हैं। अगर अन्‍य देशों की भांति भारत में भी ये नीति बन जाए तो मृत्युदंड पाए कैदी को जहां पश्‍चाताप करने का मौका मिलेगा और वहीं उनके दान किए अंग से कुछ लोगों को नई जिंदगी मिल जाएगी।

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निर्भया के दरिंदों को पश्‍चाताप करने का दिया जाए मौका

निर्भया के दरिंदों को पश्‍चाताप करने का दिया जाए मौका

इस याचिका में दिसंबर 2012 को दिल्ली में 23 वर्षीय पैरामेडिकल की छात्रा के साथ हुए गैंगरेप और हत्‍या की बर्बरता का जिक्र करते हुए कहा गया है उसके चारों हत्‍यारों को कानून के तहत फांसी होने वाली हैं, ऐस में अंग दान के रुप में पश्‍चाताप का उन्‍हें अंतिम मौका दिया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि इससे न केवन उनके गलत कुकृत्यों की भरपाई होगा बल्कि उन लोगों की भी मदद होगी जिन्‍हें अंगप्रत्‍यारोपण की दरकार है। इससे कई लोगों की जिंदगी बच सकेगी।

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अंग दान करने का विकल्प मिलने से कई लोगों को मिलेगी नई जिंदगी

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पीआईएल दाखिल करने वाले रिटायर्ड जस्टिस सलदाना ने इस बात का जिक्र किया कि जब वह मुंबई और कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश थे तब कुछ मौकों पर उन्होंने दोषी की मौत की सजा को सही ठहराने वाले फैसले में यह भी निर्देश दिया था कि मेडिकल रिसर्च के लिए शरीर दान करने और अंग दान करने विशेषकर आंख, किडनी, लीवर, दिल आदि जो अंग सही हों उन्हें दान करने का दोषी को विकल्प दिया जाए। इससे कुछ जरूरतमंद लोगों को जिंदगी मिल सकती है।

इस केस मे अपने किए पर शर्मिन्‍दा कैदी ने मांगी थी ये इजाजत

इस केस मे अपने किए पर शर्मिन्‍दा कैदी ने मांगी थी ये इजाजत

सलदाना ने इस याचिका में पिछली एक घटना का भी जिक्र किया है। जिसमें कोर्ट में उक्त केस की अपील पर सुनवाई के दौरान विशेष इजाजत के तहत कोर्ट में मौजूद दोषी ने कोर्ट के मृत्युदंड पर मुहर लगाए जाते ही कहा था कि वह अब आगे अपील करने का इच्छुक नहीं है क्योंकि उसने जितनी जघन्यता से तीन लोगों की हत्या की है, उसे यही सजा मिलनी चाहिए थी। हालांकि उसने कोर्ट से अनुरोध किया कि उसे अंग दान की इजाजत दी जाए और कोर्ट ने इस पर सरकार व जेल अथारिटी को संज्ञान लेने को कहा था। मृत्युदंड के बाद उसके अंग निकाले गए और बाद में रिपोर्ट आयी कि सभी अंग जरूरतमंदों को लगाए गए।

अंगदान में पिछड़ा हुआ देश है भारत

अंगदान में पिछड़ा हुआ देश है भारत

गौरतलब है कि याचिका में दुनिया के ऐसे देशों का भी जिक्र किया गया है जहां मृत्युदंड व अन्य कैदियों के अंग दान की नीति हैं और भारत को भी उन देशों से सीख लेकर इसी तरह की नीति बनाए जाने की अपील की गयी हैं। बता दें भारत में अंगदान के लिए किसी तरह की कोई जबरदस्‍ती नहीं की जा सकती हैं अंग दान पूर्ण रुप से ऐच्छिक हैं। ये ही कारण है जिस कारण हमारे देश में अंग दान में हमेशा कमी रहती है।

इन देशों में लागू है ये नीति

इन देशों में लागू है ये नीति

बता दे इस याचिका में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि एशिया के देश जैसे चीन, सिंगापुर, फ्रांस, और ताइवान में मृत्युदंड पाए दोषियों के मृत्युदंड दिये जाने के बाद उनके अंग प्रत्यारोपण के लिए दिये जाने की इजाजत है। यह नीति एक तरह से अपराधी को उसके किए पर पश्चाताप करने का मौका देती है। भारत सहित दुनिया के 69 देशों में मृत्युदंड है। जिन देशों में मृत्यु के बाद जरूरी अंगदान की नीति है वहां अंग के लिए कमी नहीं रहती। याचिका में कहा गया है कि हमारे देश में अंगदान की ऐसी नीति न होने के कारण हमेशा प्रत्यारोपण के लिए अंगों की कमी रहती है।

कुछ राज्यों में ये हैं प्रवाधान

कुछ राज्यों में ये हैं प्रवाधान

सुप्रीम कोर्ट में डाली गयी इस पीआईएल इस बात का भी जिक्र है कि भारत के कुछ राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, केरल, तमिलनाडु, आदि में लावारिश शवों के अंग मेडिकल रिसर्च और प्रत्यारोपण के लिए देने का कानूनी प्रावधान है। कहा गया है कि नीति बनाई जाए जिसमें मृत्युदंड पाए दोषी और कैदियों के मरने पर उनके अंग दान किये जाएं। इसके लिए उचित सुरक्षात्मक उपाय भी अपनाए जाएं। एक पैनल होना चाहिए जो कि अंग दान की प्रमाणिकता पर निर्णय ले।

अब तक दो बार टल चुकी है फांसी

अब तक दो बार टल चुकी है फांसी

बता दें निर्भया के दोषियों की फांसी लगातार कानूनी-दांवपेच की वजह से टल जा रही है। अगर निर्भया के दोषियों को होने वाली फांसी टलती नहीं है तो दोषी अपने परिवार से आखिरी बात मुलाकात करेंगे। निर्भया के चारों दोषियों को 3 मार्च सुबह छह बजे फांसी दी जाएगी. पटियाला हाइस कोर्ट ने 17 फरवरी को नया डेथ वारंट जारी किए जाने की मांग वाली याचिका पर यह फैसला दिया था। यह तीसरा डेथ वारंट हैं इससे पहले दो बार इन चारें दरिंदों की फांसी की तारीख मुकर्रर की गयी थी लेकिन कानूनी दांव चल कर वो फांसी की तारीख को टलवाने में कामयाब हो गए थे।

फिर टल सकती है फांसी

फिर टल सकती है फांसी

मालूम हो कि निर्भया गैंगरेप केस के 4 दोषियों मुकेश मुकेश कुमार सिंह, विनय कुमार शर्मा, अक्षय और पवन गुप्ता को फांसी होनी है। चार में तीन दोषी मुकेश, विनय और अक्षय फांसी के बचने के लिए राष्ट्रपति के सामने दया याचिका भी लगा चुके हैं, लेकिन वो खारिज हो गई हैं। ऐसे में इन तीनों की फांसी का रास्ता बिल्कुल साफ हो गया है, इनके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है जबकि चौथे दोषी पवन गुप्ता ने अभी तक न तो सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेविट पिटीशन लगाई है और न राष्ट्रपति से दया की गुहार की है। तीन तारीख के पहले अगर दोषी पवन अपने किसी भी कानूनी अधिकार का प्रयोग करते हुए याचिका दाखिल कर देता है तो निश्चित तौर पर एक बार फिर फांसी टल सकती है।

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English summary
In the Nirbhaya case, the PIL was filed demanding that the accused be given the option to donate their body and organs.
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