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निर्भया केस: जानें चौथा डेथ वारंट जारी होने पर दरिंदों के वकील एपी सिंह ने क्या कहा ?

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बेंगलुरु। निर्भया गैंगरेप और हत्‍या केस में पटियाला हाउस ने गुरुवार को चौथा डेथ वारंट जारी किया हैं। इस डेथ वारंट के अनुसार निर्भया के साथ 16 दिसंबर 2012 को वहशियत करने वाले चारों दरिंदों को 20 मार्च को सुबह 5.30 पर फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। चौथे दोषी पवन गुप्ता की दया याचिका भी राष्ट्रपति के पास से खारिज हो जाने के बाद कोर्ट ने वारंट जारी किया हैं। चौथा वारंट जारी होने के बाद पिछले सात सालों से अपनी बिटिया को खो देने के गम के साथ कोर्ट के चक्कर काट रही निर्भया के मां ने कहा कि उम्मीद करती हूं कि ये आखिरी तारीख हो और 20 मार्च को इन्हें फांसी दी जाए। वहीं जानिए दोषियों को बार-बार फांसी से बचाने में कामयाब हो रहे वकील ने कोर्ट द्वारा चौथा डेथ वारंट जारी करने पर क्या ?

    Nirbhaya Case में चौथा Death Warrant जारी, गुस्से में दोषी के वकील AP Singh |वनइंडिया हिंदी
    वकील एपी सिंह ने दावा किया कि...

    वकील एपी सिंह ने दावा किया कि...

    बता दें पटियाला हाउस कोर्ट ने जब तिहाड़ जेल और निर्भया की मां द्वारा दोषियों के लिए चौथा डेथ वारंट जारी करने की अपील पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को डेथ वारंट जारी किया। इसीलिए कोर्ट ने चारों दोषियों को 20 मार्च सुबह 5:30 बजे फांसी का आदेश सुनाया है। क्योंकि दावा किया जा रहा हैं कि चारों दोषियों के सारे कानूनी विकल्प समाप्‍त हो चुके हैं। इसलिए ये भी माना जा रहा हैं कि ये चारों दरिंदों का आखिरी डेथ वारंट हैं। 20 मार्च ही इनकी फांसी की आखिरी तारीख होगी। लेकिन कोर्ट द्वारा डेथ वारंट जारी किए जाने के बाद दोषियों के वकील एपी सिंह ने दावा किया कि अभी भी उनके पास कानूनी विकल्प बचे हुए हैं।

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    मीडिया प्रेशर में संविधान के रहते हुए कितनी बार फांसी दोगे?

    मीडिया प्रेशर में संविधान के रहते हुए कितनी बार फांसी दोगे?

    ये दावा करते हुए एपी सिंह ने कहा कि दोषियों को बार-बार फांसी सुनाई जा रही है, यह न्यायिक हत्या है। इतना ही नहीं कोर्ट का फैसला सुनने के बाद कोर्ट के बाहर मीडिया से रुबरु वकील एपी सिंह अपना आपा ही खो बैठे। सिंह ने कहा 'आज चौथा वॉरंट जारी हुआ है। आप तीन बार पहले भी उन्हें फांसी दे चुके हैं और कितनी बार उनको फांसी दोगे? उन्‍होंने आरोप लगाया कि मीडिया प्रेशर में संविधान के रहते हुए कितनी बार फांसी दोगे? ये आतंकवादी नहीं हैं, यह पढ़े लिखे हैं। ये जेल में सुधर रहे हैं, अपना परिवर्तन कर रहे हैं। आपकी चीखें बता रही हैं कि कितना प्रेशर है।'

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    पवन की दया याचिका हैं अभी लंबित

    पवन की दया याचिका हैं अभी लंबित

    इसके साथ ही उन्‍होंने दावा किया कि अभी भी विकल्‍प बाकी हैं। दोषी अक्षय का कानूनी विकल्प बचा हुआ है। उसने राष्‍ट्रपति को दोबारा दया याचिका भेजी हैं और अक्षय की मर्सी पिटिशन जेल में रिसीव कराई।आज कोर्ट ने पूछा कि जेल में अक्षय की मर्सी पिटिशन है? जेल ने कहा हां हैं। बता दें नियमों के मुताबिक दया याचिका खारिज होने के 14 दिन बाद ही दोषी को फांसी दी जा सकती हैं।

    आप न्यायिक हत्या मत कीजिए

    आप न्यायिक हत्या मत कीजिए

    एपी सिंह ने कहा, 'यह चौथा डेथ वॉरंट जारी किया है। दया याचिका के आर्टिकल 72 के अधिकार को खत्म किया जा रहा है। उन्‍होंने फिर दोहराया कि अब कितनी बार मारोगे, आप उनकी न्यायिक हत्या कर रहे हो। सीआरपीसी कहती है कि आप एक बार से ज्यादा नहीं मार सकते हैं। आप न्यायिक हत्या मत कीजिए। स्टेट प्रायोजित हत्या मत कीजिए।' सिंह ने पत्रकारों से कहा कि निर्भया की फैमिली को और कितना फंड दिलाना चाहते हैं आप? किसी और को भी दिलवा दो। सिंह पहले भी कह चुके हैं कि उन्‍हें तो कोई फंडिंग नहीं करता। वो वकील हैं और अपना काम कर रहे हैं।

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    सिंह ने केन्‍द्र सरकार की याचिका का भी दिया हवाला

    सिंह ने केन्‍द्र सरकार की याचिका का भी दिया हवाला

    एपी सिंह ने कहा कि आज ही सुप्रीम कोर्ट एक और सुनवाई होनी है। केंद्र सरकार ने दोषियों को अलग-अलग फांसी के लिए याचिका दायर की थी। बता दें दोषियों द्वारा फांसी टलवाने के लिए बार-बार दांव पेंच चले जाने के कारण केन्‍द्र सरकार ने अलग-अलग फांसी देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने एक याचिका डाली है, जिसपर सुनवाई के लिए 23 मार्च की तारीख तय की गई है। ऐसे में आशंका बढ़ गई है कि कहीं 20 की तारीख भी तो नहीं टल जाएगी।

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    कोर्ट द्वारा मुझे डराया जा रहा है

    कोर्ट द्वारा मुझे डराया जा रहा है

    एपी सिंह ने कोर्ट पर भी गंभीर आरोप जड़ दिए। उन्होंने कहा, 'कोर्ट की ओर से मुझे कहा गया कि आप आग से खेल रहे हो। आपके लिए परिणाम गलत होंगे। इसका मतलब है कि मुझे डराया जा रहा है। मुझे धमकाया जा रहा है। मेरा शोषण किया जा रहा है। इसका मतलब हुआ कि कानूनी अधिकार इस्तेमाल करना गलता है।' गौरतलब है कि 2 मार्च को दोषियों की फांसी टालने का आदेश देने से पहले कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सिंह की यह कहते हुए खिंचाई की, 'आप आग से खेल रहे हैं, आपको सतर्क रहना चाहिए। किसी के द्वारा एक गलत कदम, और आपको परिणाम पता हैं।'

    निर्भया की मां ने कहा मैं उन्हें मरते हुआ देखना चाहूंगी

    निर्भया की मां ने कहा मैं उन्हें मरते हुआ देखना चाहूंगी

    निर्भया की मां ने कहा कि मुझे उम्मीद है उन्हें निर्धारित तारीख तक फांसी पर लटका दिया जाएगा। जब तक उन्हें फांसी नहीं होती, संघर्ष जारी रहेगा। निर्भया की मां ने कहा है कि निर्भया की मां ने कहा, 20 मार्च की सुबह हमारे जीवन का सवेरा होगा। मरते-मरते निर्भया ने कहा था कि यह सुनिश्चित करना कि उन्हें ऐसी सजा मिले कि फिर कभी ऐसा अपराध ना दोहराया जाए। अगर तनिक भी अवसर हो तो, मैं उन्हें मरते हुआ देखना चाहूंगी।

    तीन-तीन बार लग चुकी है डेथ वारंट पर रोक

    तीन-तीन बार लग चुकी है डेथ वारंट पर रोक

    दिल्ली के निर्भया गैंगरेप और हत्या का केस शायद भारतीय कानून का पहला ऐसा मामला होगा, जिसमें तीन-तीन बार डेथ वारंट की तामील रोकनी पड़ी होगी। लेकिन, निर्भया के चारों गुनहगार की जिंदगी की उलटी गिनती अब शुरू हो चुकी है। ठीक 15 दिनों बाद तारीख 20 मार्च, 2020 को उनके जीवन की आखिरी तारीख तय की गई है। उस दिन तड़के साढ़े 5 बजे तिहाड़ के जेल नंबर 3 की फांसी कोठी में उन चारों को फांसी के फंदे पर लटकाने का आदेश जारी कर दिया गया है। हालांकि इस बीच, सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई की एक तारीख आने के बाद यह सस्पेंस बन गया है कि कहीं ये तारीख भी तो नहीं टल जाएगी।

    16 दिसंबर 2012 की रात 6 दोषियों ने निर्भया से दरिंदगी की थी

    16 दिसंबर 2012 की रात 6 दोषियों ने निर्भया से दरिंदगी की थी

    दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से 16 दिसंबर, 2012 की रात 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी। गंभीर जख्मों के कारण 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी। घटना के 9 महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों... राम सिंह, पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी की सजा सुनाई थी। मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी। ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है।

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    English summary
    Know what AP Singh, the lawyer of the poor, said when the fourth death warrant was issued in the Nirbhaya case
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