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निर्भया केस: पहले किस केस में नाबालिग बताने वाले दुष्‍कर्मी को कैसे सालों बाद हुई थी सजा, जानें उसकी दरिंदगी

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बेंगलुरु। निर्भया गैंगरेप केस में दोषी मुकेश की दया याचिका को राष्‍ट्रपति द्वारा खारिज कर दी। जिसके बाद दिल्ली की अदालत ने सभी चारों दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी किया है। इस नए डेथ वारेंट के जारी होने के बाद निर्भया के चारों हत्‍यारों को अब 22 जनवरी के बजाय एक फरवरी को फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। लेकिन इस केस में अब एक नया मोड़ आ गया है। निर्भया के दोषी पवन गुप्ता ने खुद को नाबालिग बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन दायर कर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। दरअसल हाई कोर्ट ने उसके नाबालिग होने की दलील को खारिज कर दिया था। पवन गुप्ता का दावा है कि जब घटना घटी थी तब वह नाबालिग था। पवन का आरोप है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इस तथ्य को ध्यान से नहीं सुना है।

nirbhya

फांसी का डेथ वारंट जारी होने के बाद अब पवन ने फांसी में देरी हो तो यह नया पेंच फंसाया है कि वह घटना के समय नाबालिग था। जबकि दोषी पवन कुमार गुप्ता ने हाई कोर्ट के 19 दिसंबर के जिस आदेश को चुनौती दी है, उसमें अदालत ने फर्जी दस्तावेज जमा करने और अदालत में हाजिर नहीं होने के लिए उनके वकील की निंदा भी की थी। दरअसल इस याचिका में कोई दम नहीं हैं इसलिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह भी खारिज कर दी जाएगी।

निर्भया का ये दरिंदा नाबालिग होने के कारण हो चुका है रिहा

निर्भया का ये दरिंदा नाबालिग होने के कारण हो चुका है रिहा

बता दें इस केस में एक दोषी जिसने निर्भया के साथ सबसे अधिक दंरिंदगी की थी वह कुछ साल पहले महज तीन साल की जेल में सजा काट कर रिहा कर दिया गया था क्‍योंकि वह उस समय नाबालिग था। देश को दहला देने वाले निर्भया गैंगरेप में छह आरोपियों में से वह एक घटना के दिन नाबालिग था। हालांकि वह कुछ ही महीनों बाद 18 साल का होने वाला था लेकिन कोर्ट ने मौजूदा कानून के आधार पर उसे नाबालिग मानते हुए सजा देने की बजाए सुधार गृह में भेजने का फैसला सुनाया। निर्भया के दोषियों में से यही एक चेहरा है जिसे आज तक देश ने नहीं देखा है। आपको बता दें वर्षों पहले लखनऊ के बेहद चर्चित आशियाना सामूहिक गैंगरेप केस में भी गौरव शुक्ला नामक दोषी को घटना के दस साल बाद कोर्ट में बालिग साबित कर पाए, जिसके बाद उसे महज दस वर्षो के लिए उसे जेल की सजा हुई। गैंगरेप के लगभग 11 साल बाद तक गौरव शुक्ला पर बलात्कार का केस नहीं चल पाया क्योंकि ये साबित नहीं हो पाया कि बलात्कार के वक़्त वह बालिग था या नाबालिग।जानिए कहां है निर्भया का छठां हत्‍यारा, जिसने सबसे ज्यादा ढाया था निर्भया पर जुल्‍म

जानिए कहां है निर्भया का छठां हत्‍यारा जिसने सबसे ज्यादा ढाया था जुर्म

इस केस में 11 सालों बाद नाबालिग बताने वाले को हुई थी दुष्‍कर्मी को हुई थी सजा

इस केस में 11 सालों बाद नाबालिग बताने वाले को हुई थी दुष्‍कर्मी को हुई थी सजा

आपको बता दें वर्षों पहले लखनऊ के बेहद चर्चित आशियाना सामूहिक गैंगरेप केस भी ऐसा ही केस था जिसका मुख्‍य आरोपी अपने को नाबालिग बता कर पूरे 11 वर्षों तक मौज करता रहा। सामूहिक बालात्कार करने वाले गौरव शुक्ला नामक दोषी को घटना के दस साल बाद कोर्ट उसे बालिग साबित कर पाया। इतना ही इतने बड़े अपराध के लिए उसे महज दस वर्षो के लिए उसे जेल की सजा हुई थी। गैंगरेप के लगभग 11 साल बाद तक गौरव शुक्ला पर बलात्कार का केस नहीं चल पाया क्योंकि ये साबित नहीं हो पाया कि बलात्कार के वक़्त वह बालिग था या नाबालिग।

आशियाना केस में बालात्कारियों ने नाबालिग के साथ की थी ये दरिंदगी

आशियाना केस में बालात्कारियों ने नाबालिग के साथ की थी ये दरिंदगी

यह घटना 2 मई 2005 की हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना कालोनी में 13 साल की नाबालिग लड़की घरों में झाडू-पोछा लगाकर भाई के साथ घर लौट रही थी। तभी रईसजादें गौरव शुक्ला और उसके पांच साथियों ने उस नाबालिग को सड़क से कार में खींच कर अगवा कर लिया। लड़की का भाई चिल्लाता रहा, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। गौरव शुक्ला और उसके पांच साथियों ने चलती कार में करीब पांच घंटे तक उसके नाबालिग के साथ चलती गाड़ी में गैंगरेप किया। वारदात को अंजाम देने के बाद दोषी उसे एक सुनसान जगह पर ले गए और फिर वहां भी बारी-बारी से रेप किया। इतना ही नहीं आरोपियों ने दरिंदगी की सभी हदें पार कर दी थी। कुल छह लड़कों ने दुष्कर्म किया और सिगरेट बड से मासूम लड़की के प्राइवेट पार्ट को दागा इसके अलावा पीड़िता को ऐसी यातनाएं दी थी, जिसको सुनकर हर किसी का दिल दहल गया था।

काफी दबाव के बाद पुलिस ने की थी गिरफ्तारी

इसके बाद सभी आरोपी उसे डालीगंज पुल के पास फेंककर फरार हो गए थे। इस केस में मामला पुलिस में दर्ज हुआ और सामाजिक संगठनों व प्रेस का दबाव बढ़ा तो पुलिस ने कुछ निर्दोष लड़कों को पकड़ कर आरोपी बना दिया। भारी प्रदर्शन के बाद गिरफ्तारी हुई। प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा घेरा, पुलिस पर चौतरफा दबाव पड़ा तो असली आरोपी धरे गए। इनमें गौरव शुक्ला मुख्य आरोपी, भारतेंद्र मिश्रा, अमन बख्शी व मोहम्मद फैजान और दो नाबालिग शामिल थे।

11 साल तक दरिंदगी करने वाला आरोपी करता रहा मौज

11 साल तक दरिंदगी करने वाला आरोपी करता रहा मौज

इस केस के नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया, जहां से लौटने के बाद एक दोषी की सड़क हादसे में मौत हो गई। वहीं भारतेंदु व अमन को 2007 में 10-10 साल की सजा सुनाई। फैजान को 2013 में उम्र कैद की सजा दी। दुष्कर्मी ने शादी की, परिवार बनाया मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला ने खुद को नाबालिग बताया। किशोर न्याय बोर्ड और निचली अदालत में करीब 10 वर्ष बाद उसे बालिग करार दिया गया। इस दौरान उसकी शादी हुई और परिवार भी बना। बाद में 2016 में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 10 साल की सजा दी। सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी गौरव शुक्ला के नाबालिग होने को लेकर भी काफी बहस हुई। करीब 11 वर्ष तक चली इस बहस के बाद आखिरकार कोर्ट ने गौरव को बालिग और दोषी माना। गौरतलब है कि माफिया अरुण शंकर शुक्ला का गौरव शुक्ला भतीजा हैं।

 निर्भया केस के बाद कानून में हुआ ये बदलाव

निर्भया केस के बाद कानून में हुआ ये बदलाव

निर्भया मामले के बाद देश में बलात्कार की परिभाषा में काफी बदलाव हुए. इससे पहले सेक्सुएल पेनिट्रेशन को रेप माना जाता था, लेकिन इस घटना के बाद छेड़छाड़ और दूसरे तरीकों से यौन शोषण को भी बलात्कार में शामिल किया गया। पार्लियामेंट में नया जुवेनाइल जस्टिस बिल पास हुआ, जिसमें बलात्कार, हत्या और एसिड अटैक जैसे क्रूरतम अपराधों में 16 से 18 साल के नाबालिग आरोपियों पर भी वयस्क कानून के तहत आम अदालतों में केस चलता है। नए कानून के तहत 16 से 18 साल के नाबालिग को इन अपराधों के लिए बाल संरक्षण गृह में रखा जाने की बजाए सजा हो सकती है, हालांकि ये सजा अधिकतम 10 साल की ही हो सकती है और फांसी या उम्रकैद नहीं दिया जा सकेगा।

निर्भया की मां बोली मुजरिम जो चाहते हैं वही हो रहा है

निर्भया की मां बोली मुजरिम जो चाहते हैं वही हो रहा है

बता दें दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने सात जनवरी को मृत्यु वारंट जारी करते हुए कहा था कि चारों दोषियों - मुकेश सिंह(32), विनय शर्मा (26), अक्षय कुमार सिंह (31) और पवन गुप्ता (25) को 22 जनवरी की सुबह सात बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। लेकिन दोषी मुकेश द्वारा राष्‍ट्रपति के यहां दया याचिका डाली जिसके खारिज होने के साथ ही शुक्रवार को नया डेथ वारंट जारी किया गया है। इस नए डेथ वारंट के अनुसार अब 22 जनवरी की जगह सभी दोषियों को एक फरवरी सुबह छह बजे फांसी की सजा दी जाएगी। नया डेथ वारंट जारी होने के बाद निर्भया की मां ने कहा कि जो मुजरिम चाहते हैं वही हो रहा है। तारीख पे तारीख...तारीख पे तारीख...हमारा सिस्टम ऐसा है कि यहां दोषी की सुनी जाती है।

इंदिरा जयसिंह के इस अनुरोध पर विफरी निर्भया की मां

इंदिरा जयसिंह के इस अनुरोध पर विफरी निर्भया की मां

निर्भया केस में कोर्ट द्वारा नया डेथ वारंट जारी किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की मां से अनुरोध किया था कि जैसे सोनिया गांधी ने नलिनी को माफ कर दिया, वैसे ही वे दोषियों को माफ कर दें। इंदिरा जयसिंह के इस अनुरोध पर आशा देवी ने नाराजगी जताई है।इंदिरा जयसिंह के अनुरोध पर भड़कीं आशा देवी आशा देवी ने इंदिरा जयसिंह के बयान पर कहा, 'मुझे ऐसा सुझाव देने वाली इंदिरा जयसिंह कौन होती हैं? पूरा देश चाहता है कि दोषियों को फांसी दी जाए। केवल उनके जैसे लोगों की वजह से ही बलात्कार पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता है।' निर्भया की मां ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, 'विश्वास नहीं हो रहा है कि इंदिरा जयसिंह ने इस तरह का सुझाव देने की हिम्मत भी कैसे की।'

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English summary
Nirbhaya Case: Know In Which Case, The Accused Who Was a Minor Was Punished After Years,
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