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निर्भया केस: अगर फांसी से 60 घंटे पहले भेज दी दया याचिका तो फिर टल जाएगी दरिंदों की फांसी

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बेंगलुरु। दिल्ली के निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड में चार दोषियों को तिहाड़ जेल में फांसी दिए जाने की पूरी तैयारी हो चुकी हैं। फांसी की सजा पाए 4 दोषियों के पुतलों को फांसी देने की औपचारिकता भी पूरी कर ली गयी है। लेकिन निर्भया के हत्‍यारों के पास अभी भी एक मजबूत कानूनी दांव बचा हुआ हैं जिसके कारण माना जा रहा है कि एक बार फिर फांसी की तारीख को टालना पड़ सकता है।

    Nirbhaya Case: दोषी Akshay Singh ने Supreme Court में दायर की Curative Petition | Oneindia Hindi

    nirbhya

    बता दें दिल्ली पटियाला हाउस कोर्ट ने पिछले दिनों दूसरा डेथ वारंट जारी किया था। जिसके अनुसार निर्भया के दरिंदों को आगामी 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा। लेकिन जानकारों के अनुसार मुकेश की दया याचिका राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पहले ही खारिज की जा चुकी है लेकिन बाकी तीनों दया याचिका भेजकर एक बार फिर पेच फंसा सकते हैं जिसके कारण फांसी की तारीख टल सकती हैं।

    31 जनवरी को दोपहर 12 बजे से पहले तक भेज सकते हैं दया याचिका

    31 जनवरी को दोपहर 12 बजे से पहले तक भेज सकते हैं दया याचिका

    निर्भया के चार दोषियों में मुकेश के अलावा अन्य तीन दोषी पवन, अक्षय और विनय में से किसी ने भी अगर फांसी देने की एक तारीख के ठीक एक दिन पहले यानी की 31 जनवरी को दोपहर 12 बजे तक राष्ट्रपति के नाम दया याचिका दे देते हैं तो नियमों के कारण फांसी एक बार फिर रुक सकती है। परंतु इन्‍होंने 31 जनवरी की समय सीमा को क्रास कर दिया तो इनका दया याचिका देने का कोई फायदा नहीं होगा। तो हर हाल में 1 फरवरी को तिहाड़ जेल में चारों को एक साथ फांसी के फंदे लटका दिया जाएगा। जिसकी संभावना बहुत ही कम नजर आ रही है।

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    60 घंटे पहले भेजी गयी दया याचिका होगी वैध

    60 घंटे पहले भेजी गयी दया याचिका होगी वैध

    मालूम हो कि फांसी के 60 घंटे पहले तक ही दया याचिका भेजने पर ही वह वैध होगी। राष्‍ट्रपति को दया याचिका भेजकर दोषी अपनी फांसी की सजा को माफ कर उम्रकैद में तब्दील करने की अपील करता है। कानून के जानकारों के अनुसार 28-29 जनवरी की रात 12 बजे से 1 फरवरी की सुबह 6 बजे तक के समय को लगाएं तो इन्हें फांसी पर लटकाने के लिए अब 78 घंटे बचे हैं लेकिन दया याचिका दायर करने के लिए इनके पास 60 घंटे हैं। इसलिए तीन दोषियों के पास अभी भी दया याचिका दाखिल करने का विकल्प मौजूद हैं। जिसके आधार पर फांसी को एक बार भी टालने का पैतरा चल सकते हैं।

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    दया याचिका के क्या है नियम

    दया याचिका के क्या है नियम

    सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई वाले मामले की सभी स्टेटस रिपोर्ट विगत सोमवार को तिहाड़ जेल प्रशासन की ओर से निचली अदालत को सौंप दी गई ताकि अगर निचली अदालत को फांसी पर होल्ड करना चाहे या फिर नई डेट के लिए ब्लैक वॉरंट जारी करना हो तो वह तिहाड़ प्रशासन को नया आदेश दे सके। हालांकि, जेल प्रशासन के अनुसार निर्भया के दोषियों को अगर अभी तक की तय डेट के हिसाब से 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाया जाना है तो ऐसा नहीं है कि वह जब चाहे क्यूरेटिव या दया याचिका लगा सकते हैं।

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    मुकेश की इस याचिका पर आज होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

    मुकेश की इस याचिका पर आज होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

    गौरतलब है कि 6 दिसंबर, 2016 को दिल्ली में हुए सामूहिक दुष्कर्म कांड के दोषी मुकेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को दोपहर 12.30 पर सुनवाई करेगा। मुकेश ने राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती दी है। साथ ही एक फरवरी के डेथ वारंट पर भी रोक लगाने की मांग की है। यह और बात है कि दया याचिका पर राष्ट्रपति का फैसला अंतिम माना जाता है, बावजूद इसके मुकेश ने फांसी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट से रहम की गुहार लगाते हुए याचिका दायर की है।

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    मुकेश के केस में अगर सुनवाई पूरी नहीं होती तब भी टल सकती है फांसी

    मुकेश के केस में अगर सुनवाई पूरी नहीं होती तब भी टल सकती है फांसी

    मुकेश ने अपनी याचिका में लिखा है कि राष्ट्रपति ने दया याचिका पर ठीक से विचार नहीं किया और जल्दबाजी में उसे खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने गत 14 जनवरी को मुकेश की क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही विनय की क्यूरेटिव याचिका भी खारिज कर दी गई थी। क्यूरेटिव याचिका खारिज होने के बाद मुकेश ने दया याचिका भेजी थी। इसलिए तिहाड़ जेल प्रशासन समेत निर्भया के माता पिता की निगाह सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई पर टिक गई है। सूत्रों के अनुसार अगर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को एक फरवरी से आगे के लिए टाल दिया तो इस सूरत में भी फांसी टालनी पड़ेगी। हालांकि कोर्ट इस पर तुरंत सुनवाई के लिए तैयार हुआ है इसलिए माना जा रहा है कि सुनवाई करते हुए फैसला लेने में देरी नहीं करेगी।

    जनें निर्भया केस

    जनें निर्भया केस

    16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में पैरामेडिक की छात्रा और उसका एक दोस्त एक बस में सवार हुए थे। उस बस में छात्रा से छह लोगों ने दुष्कर्म को अंजाम दिया था। दोषियों ने पीड़िता और उसके दोस्त को चलती बस से नीचे फेंक दिया था। इसके बाद छात्रा की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में अदालत ने चार लोगों अक्षय, विनय, पवन और मुकेश को दोषी ठहराया था, जबकि मामले में एक अन्य आरोपी ने दोषी साबित होने से पहले ही खुदकुशी कर ली थी। छठा आरोपी नाबालिग था, जिसे बाल सुधार गृह में सजा पूरी करने पर छोड़ दिया गया।

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    English summary
    Nirbhaya case: If Mercy Petition Sent 60 Hours Before Hanging, Then Hanging Will Be Postponed,
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