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क्या जानबूझकर कर निर्भया के दोषियों ने फांसी में देरी के लिए अपनाए ये 'हथकंडे'?

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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में 16, दिसंबर 2012 को 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा के साथ जो हैवानियत हुई थी, उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। 9 महीने के बाद 2013 में फास्ट ट्रैक ने इस मामले में चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। गैंगरेप-मर्डर के इस केस में एक नाबालिग आरोपी को तीन साल के लिए सुधार गृह भेज दिया था, जहां से उसे बाद में रिहा कर दिया गया। वहीं, राम सिंह ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद दोषियों ने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी।

तीन दोषियों ने ही दायर की थी पुनर्विचार याचिका

तीन दोषियों ने ही दायर की थी पुनर्विचार याचिका

इसके छह माह के बाद यानी तीन मार्च 2014 को दिल्‍ली हाई कोर्ट ने फास्‍ट ट्रैक कोर्ट के फांसी के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपियों की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद ये केस सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और अप्रैल 2016 से इस केस में फास्‍ट ट्रैक मोड में सुनवाई शुरू हुई। मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने भी चारों आरोपियों की मौत की सजा को बरकरार रखा और इनकी याचिका खारिज कर दी थी। इस मामले में जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने रिव्‍यू पीटीशन को भी खारिज कर दिया। लेकिन तब चारों में तीन दोषियों ने ही रिव्‍यू पीटीशन दाखिल किया था।

ये भी पढ़ें: कोर्ट में सुनवाई टलने पर निर्भया की मां बोलीं- दोषियों के लिए 18 दिसंबर को जारी होगा डेथ वारंट

पटियाला हाउस कोर्ट में मामला अभी भी लंबित

पटियाला हाउस कोर्ट में मामला अभी भी लंबित

जुलाई, 2018 के बाद से अब तक पीड़िता के परिवार को दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने का इंतजार है। फांसी में देरी पर निर्भया की मां ने पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि दोषियों ने सारे कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर लिया है, ऐसे में उनको तत्काल फांसी पर लटकाने का आदेश दिया जाए। वहीं, इस मामले में आज पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई। पटियाला हाउस कोर्ट में शुक्रवार को चारों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि इस केस से जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसलिए जब तक इस मामले का निपटारा नहीं हो जाता तब तक वह सुनवाई नहीं करेंगे। पटियाला कोर्ट ने सुनवाई 18 दिसंबर तक टाल दी है।

चारों में से एक दोषी ने बाद में दायर की पुनर्विचार याचिका

चारों में से एक दोषी ने बाद में दायर की पुनर्विचार याचिका

पटियाला हाउस कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में दायर जिस याचिका का हवाला दिया, वो दोषी अक्षय की तरफ से दायर की गई है। इस पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 17 दिसंबर को सुनवाई करेगा। तीन जजों की बेंच अक्षय की इस याचिका पर सुनवाई करेगी। निर्भया केस में दोषी विनय कुमार, पवन, अक्षय और मुकेश को फांसी की सजा हुई है। सुप्रीम कोर्ट विनय कुमार, पवन और मुकेश की पुनर्विचार याचिकाओं को पहले ही खारिज कर चुका है। लेकिन तब अक्षय ने पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी। अक्षय ने अब जाकर मौत की सजा के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। इस पर निर्भया की मां का कहना है कि दोषी ऐसा जानबूझकर कर रहे हैं ताकि उनकी फांसी में देरी हो। उन्होंने कहा कि दोषी की याचिका स्वीकार होना इस सिस्टम पर तमाचा है।

एक दोषी ने ही दी दया याचिका

एक दोषी ने ही दी दया याचिका

दरअसल, पूरे मामले में एक और चीज सामने आई है, वो ये कि कभी दोषियों में से एक ने पुनर्विचार याचिका अकेले दायर की, तो कभी एक दोषी ने दया याचिका अकेले दी। पिछले दिनों दोषी विनय ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई थी कि जो दया याचिका होम मिनिस्ट्री से उनके पास आई है, उसपर उसके हस्ताक्षर नहीं हैं। इसका हवाला देते हुए उसने ये दया याचिका वापस लेने की गुहार लगाई थी। इसके कुछ दिनों बाद ही सुप्रीम कोर्ट में दोषी अक्षय ने याचिका दायर की। ऐसे में जब तक कानूनी विकल्प समाप्त नहीं हो जाते, दोषियों को फांसी पर नहीं लटकाया जा सकता है।

निर्भया के माता-पिता को न्याय का इंतजार

निर्भया के माता-पिता को न्याय का इंतजार

इस पूरी प्रक्रिया पर निर्भया के वकील और निर्भया के माता-पिता सवाल उठाते रहे हैं। निर्भया की मां का कहना है कि ये याचिका पहले ही खारिज हो जानी चाहिए थी। उनका कहना है कि सात साल से वह न्याय का इंतजार कर रही हैं। वहीं, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं अगर सुप्रीम कोर्ट 17 दिसंबर को याचिका खारिज कर देता है तो पटियाला हाउस कोर्ट दोषियों का डेथ वारंट जारी कर सकता है।

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English summary
Nirbhaya case: all four convicts trying to shield themselves with petitions
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