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कौन होते हैं वो 5 लोग, जो मुजरिम को फांसी होते वक्त देखते हैं

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नई दिल्ली। सात साल पहले निर्भया से गैंगरेप करने के दोषी विनय शर्मा को तिहाड़ जेल में शिफ्ट करने के साथ ही लगभग ये तय माना जा रहा है कि चारों दोषियों को जल्‍द ही फांसी के फंदे पर लटका दिया जाएगा। सभी आरोपियों की दया याचिका राष्‍ट्रपति के पास है और जैसे ही वो इसे खारिज करेंगे, चारों के नाम डेथ वारंट इश्यू हो जाएगा। जानकारी के मुताबिक तिहाड़ में दोषियों को फांसी पर लटकाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। जेल प्रशासन ने तख्त तैयार करके डमी का ट्रायल भी किया है। वहीं, फांसी देने के दौरान कई बातों का ध्यान रखा जाता है। खास बात ये है कि फांसी के वक्त फांसी कोठरी में 5 लोग ही मौजूद रह सकते हैं।

5 लोग फांसी के वक्त मौजूद रहते हैं

5 लोग फांसी के वक्त मौजूद रहते हैं

जेल मैन्युअल के मुताबिक ही दोषियों को फांसी पर लटकाया जाता है। दोषी को फांसी पर लटकाए जाने के दौरान 5 लोग वहां मौजूद रहते हैं, यानी कहें तो यही पांच लोग फांसी होते देख सकते हैं। इन पांच लोगों में जेल अधीक्षक, डिप्टी जेल अधीक्षक, आरएमओ, मेडिकल अफसर और मजिस्ट्रेट या उनकी एडीएम उस वक्त मौजूद रहते हैं। इसके अलावा फांसी पर लटकाए जाने वाला दोषी चाहे तो उसके धर्म का कोई नुमाइंदा वहां मौजूद रह सकता है।

ये भी पढ़ें: निर्भया केस: फांसी देते वक्‍त मुजरिम के कान में क्‍या कहता है जल्‍लाद

सूर्योदय से पहले दी जाती है फांसी

सूर्योदय से पहले दी जाती है फांसी

जेल मैन्युअल के मुताबिक, वारंट जारी होने के 15 दिन बाद फांसी दी जाएगी। हालांकि, इस नियम में सरकार द्वारा बदलाव भी किया जा सकता है। दोषी को फांसी सुबह के वक्त (सूर्योदय से पहले) ही दी जाती है। फांसी देने से पहले जल्लाद अपराधी के कानों में कुछ बोलता है जिसके बाद वह चबूतरे से जुड़ा लीवर खींच देता हैं। अगर अपराधी हिंदू है तो जल्‍लाद उसके कान में राम-राम कहता है और अगर मुस्‍लिम है तो सलाम। उसके बाद वो कहता है मैं अपने फर्ज के आगे मजबूर हूं, मैं आपके सत्य की राह पर चलने की कामना करता हूं।

निर्भया के चारों दोषियों की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित

निर्भया के चारों दोषियों की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित

बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में एक प्राइवेट बस में अपने एक दोस्त के साथ चढ़ी 23 साल की पैरा मेडिकल छात्रा के साथ एक नाबालिग सहित छह लोगों ने गैंगरेप किया था और लोहे के रॉड से क्रूरतम आघात किया गया था। इसके बाद गंभीर रूप से घायल पीड़िता और उसके पुरुष साथी को चलती बस से नीचे फेंक दिया गया था। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, उसके बाद तत्कालीन शीला दीक्षित सरकार ने बेहतर इलाज के लिए उसे विशेष विमान से सिंगापुर भेजा था, जहां वारदात के 13वें दिन उसने दम तोड़ दिया था। छह आरोपियों में से एक नागालिग था जो अब छूट गया है। वहीं मुख्‍य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ में ही आत्महत्या कर ली थी।

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English summary
nirbhaya case: 5 men to be present at time of hanging convicts
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