इसबार चुनाव से तय होगा कांग्रेस का अगला अध्यक्ष, राहुल के इस्तीफे के बाद नहीं बचा कोई विकल्प?
नई दिल्ली- राहुल गांधी को इस्तीफे का ऐलान किए लगभग दो महीने पूरे होने को हैं, लेकिन नए अध्यक्ष पर कोई सहमति नहीं बन पाने की वजह से आम कांग्रेसियों की सब्र का बांध टूटने की कगार पर है। कम से कम चार राज्यों में पार्टी बड़ी पॉलिटिकल क्राइसिस झेल रही है, लेकिन पार्टी में अनिर्णय की स्थिति के कारण कोई ठोस उपाय नहीं सूझ रहा है। ऐसे में पार्टी के आला सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि अगर राहुल गांधी के उत्तराधिकारी के नाम पर जल्द कोई सहमति नहीं बनी, तो पार्टी चुनाव के विकल्प पर भी विचार कर सकती है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि अगर पार्टी चुनाव कराने पर ही सहमत होती है तो इसमें कितना वक्त लग सकता है और संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट में किन-किन नेताओं को शामिल किया जा सकता है।

चुनाव से ही निकलेगा कांग्रेस के संकट का हल?
कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में जिस तरह से देरी हो रही है, उससे साफ है कि पार्टी में अध्यक्ष पद का मसला किस कदर फंसा हुआ है। संकेत ये भी रहे हैं कि पार्टी इस मीटिंग के लिए संसद के बजट सत्र के खत्म होने का इंतजार करना चाहती है। अगर उससे पहले बैठक बुलाने का फैसला हुआ भी तो वह 22 जुलाई से पहले इसके होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। लेकिन जब भी सीडब्ल्यूसी की बैठक होगी, उसमें अध्यक्ष पद को लेकर निर्णायक फैसला होने की संभावना है, जिसमें एक विकल्प चुनाव का भी हो सकता है। पार्टी के अंदरखाने चुनाव की बात इसलिए उठ रही है, क्योंकि कांग्रेस में अध्यक्ष पद के दावेदारों की कमी भी नहीं है और लोगों में इस पद पर बैठने को लेकर एक आशंका की स्थिति भी बनी हुई है। ऐसे में ये बात सामने आ रही है कि अगर चुनाव के माध्यम से ही इस ऊहापोह के निराकरण का फैसला हुआ तो इसमें पार्टी को कुछ महीने का वक्त लग सकता है। इस दौरान पार्टी को चलाने का जिम्मा किसी अधिकार प्राप्त समिति को दिया जा सकता है।

इतने चेहरे हैं रेस में
जब से कांग्रेस में अध्यक्ष बदलने का मामला उठा है, इसके लिए कई सारे नाम सामने आ चुके हैं। पार्टी में कई लॉबियां सक्रिय हैं, जो अपने-अपने हिसाब से नामों को सामने लाने की कोशिश करते रहे हैं। इनमें से कभी कोई युवा नेता के लिए बैटिंग कर रहा है, तो कोई जातिगत समीकरणों पर जोर दे रहा है। कुल मिलाकर अबतक नौ चेहरे हैं, जिनके नाम किसी न किसी रूप में मुख्य दावेदारों के तौर पर सामने लाए जा चुके हैं। इनमें दलित समाज से आने वाले चार वरिष्ठ नेताओं के नाम भी शामिल हैं। ये चेहरे हैं- मल्लिकार्जुन खड़गे, सुशील कुमार शिंदे, मीरा कुमार और मुकुल वासनिक। यह सभी नेता पार्टी और सरकार में बड़ी से बड़ी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। इनके अलावा कुछ युवा चेहरे भी हैं, जो राहुल के भी पसंद बताए जाते हैं और संगठन से लेकर सरकार तक में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। इनमें सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुरली देवड़ा के नाम लिए जा सकते हैं। देवड़ा तो केंद्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने की इच्छा तक जता चुके हैं। इन सब में एक और नाम है राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का। मजे की बात है कि खुद राहुल ने लोकसभा चुनाव में इनपर सिर्फ अपने बेटे को जितवाने के चक्कर में लगे रहने का आरोप लगाया था, लेकिन फिर भी उन्हें राहुल का उत्तराधिकारी बनाने पर विचार हो रहा है। कहानी यहीं खत्म नहीं होती। एक और नाम है मोतीलाल वोरा का, जो अति-वरिष्ठ कांग्रेसी हैं, लेकिन अध्यक्ष पद के लिए उनका नाम भी लिया जा चुका है। अगर चुनाव करवाए जाते हैं, तो इनमें से किसी एक नाम को तय करना ज्यादा आसान हो सकता है।

हर दावेदार की अपनी दुविधा
कांग्रेस अध्यक्ष का पद अभी ऐसा हो चुका है जिसके दावेदार तो कई हैं, लेकिन हर कोई उस पद पर बैठने को लेकर आशंकित भी है। राजस्थान के एक युवा नेता तो इसको लेकर अपने दिल की बात जाहिर भी कर चुके हैं। अमरिंदर सिंह जैसे नेता तक किसी युवा को अध्यक्ष बनाने की वकालत कर चुके हैं। लेकिन, कहा जा रहा है कि कोई युवा नेता संगठन में तीन-तीन गांधी के राजनीति में सक्रिय रहते इस पद पर बैठने की जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं। उम्र के अंतिम पड़ाव में गुजर रहे किसी नेता को इस पद पर बैठने के लिए राजी पर कर भी लिया जाय, तो पार्टी के शुभचिंतकों की चिंता ये है कि क्या उसके भरोसे पार्टी उस संकट से उबरने की सोच सकती है, जिसके लिए राहुल को पद छोड़ना पड़ा है। ऐसे में हो सकता है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के सामने कुछ चुनिंदा विकल्प रख दिए जाएं और उनमें से जिन्हें वे चुनें उसे ही संगठन चलाने को कह दिया जाए।
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