शहरों में 47 रू. तो गांवों में 32 रू. खर्च करने वाला अब गरीब नहीं

poverty line
नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में गरीबी की नई रेखा तैयार कर दी गई है। रंगराजन कमिटी ने सरकार से सिफारिश की है कि भारत में गरीबी की नई रेखा तैयार की जाए। रंगराजन कमिटी के मुताबिक देश के शहरों में 47 रुपये और गांवों में 32 रुपये से कम खर्च करने वालों को गरीब माना जाए।

देश में गरीबी के आकलन के लिए बनी रंगराजन समिति ने इससे पहले की तेंडुलकर समिति के आकलन को खारिज करते हुए नई गरीबी रेखा तैयार कर दी है।जिसमें कहा गया है कि देश में हर दस में से तीन व्यक्ति गरीब हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट योजना मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को सौंपी है। इसमें समिति ने सरकार को शहरों में रोज 47 रुपए और गांवों में 32 से रुपए से कम खर्च करने वाले व्यक्ति को गरीब की श्रेणी में रखने का सुझाव दिया है।

आपको बता दें कि इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश में वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान हर तीसरा आदमी गरीब था, जबकि 2009-10 में हर चौथा शख्स गरीबी की श्रेणी में आता था। रंगराजन की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक साल में 9.4 करोड़ गरीब बढ़ गए।

समीति ने ग्रामीण इलाकों में 32 रुपए रोजाना और शहरी इलाकों में 47 रुपये रोजाना खर्च करने वाले को गरीब मानने की सिफारिश की है। जबकि तेंडुलकर समिति ने ग्रामीण इलाकों में 27 रुपए और शहरी इलाकों में 33 रुपए रोजाना खर्च करने वालों को ही गरीबी की श्रेणी में रखा था। इस कमिटी ने मुताबिक शहरों में कोई व्यक्ति अगर एक महीने में 1,407 रुपये से कम खर्च करता है तो उसे गरीब समझा जाए, जबकि तेंडुलकर कमिटी ने यह रकम 1,000 रुपये महीना तय की थी। वहीं रंगराजन समिति ने ग्रामीण इलाकों में प्रति माह 972 रुपये से कम खर्च करने वालों को गरीबी की श्रेणी में रखा है। तेंडुलकर कमिटी ने यह राशि 816 रुपये महीना निर्धारित की थी।

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