सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री ने की नाथूराम गोडसे की आरती, कही ये बात

नई दिल्ली। हिंदू महासभा की नेता और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री राजश्री चौधरी का एक वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, इस वीडियों मे राजश्री अपने समर्थकों के साथ महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की पूजा करते हुए नजर आ रही हैं। समचार एजेंसी एएनआई की ओर से जारी किए गए वीडियो में राजश्री चौधरी अपने समर्थकों के साथ नाथूराम गोडसे की आरती करते दिख रही हैं, वो भगवा टोपी लगाए हुए हैं, ये वीडियो एमपी के ग्वालियर का है।

कांग्रेस की सरकार ने गोडसे को बदनाम किया: राजश्री

कांग्रेस की सरकार ने गोडसे को बदनाम किया: राजश्री

इस बारे में बात करते हुए राजश्री ने कहा कि नाथूराम गोडसे की गलत छवि बना रखी है, कांग्रेस की सरकार ने उन्हें बदनाम किया है, आपको बता दें कि हिंदू महासभा के सदस्यों ने ग्वालियर में नाथूराम गोडसे का 70 बलिदान दिवस मनाया था, जिसके कारण महासभा के सदस्यों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी, राजश्री चौधरी ने एफआईआर को गलत करार दिया है और इसे वापस लेने की मांग की है।

जानिए कुछ जरूरी बातें

जानिए कुछ जरूरी बातें

आपको बता दें कि नाथूराम विनायक गोडसे का जन्म 19 मई 1990 को भारत के महाराष्ट्र राज्य में पुणे के निकट बारामती नमक स्थान पर चित्तपावन मराठी परिवार में हुआ था, इनके पिता विनायक वामनराव गोडसे और मां का नाम लक्ष्मी गोडसे था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा पुणे में हुई थी परन्तु हाईस्कूल के बीच में ही इन्होंने पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी और उसके बाद कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली।

जिन्ना की अलगाववादी विचार-धारा का विरोध किया था गोडसे ने

जिन्ना की अलगाववादी विचार-धारा का विरोध किया था गोडसे ने

अपने राजनैतिक जीवन के प्रारम्भिक दिनों में नाथूराम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हो गए थे, 1930 में इन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छोड़ दिया और अखिल भारतीय हिन्दू महासभा में चले गये, हालांकि इस बात पर आज तक विवाद है। उन्होंने अग्रणी तथा हिन्दू राष्ट्र नामक दो समाचार-पत्रों का सम्पादन भी किया था। वे मुहम्मद अली जिन्ना की अलगाववादी विचार-धारा का विरोध करते थे।

नफरत बनी फांसी की वजह

नफरत बनी फांसी की वजह

प्रारम्भ में तो उन्होंने गांधी के कार्यक्रमों का समर्थन किया परन्तु बाद में उन्होंने गांधी पर हिन्दुओं के साथ भेदभाव पूर्ण नीति अपनाए जाने का आरोप लगाया था, उनकी यही खिलाफत उन्हें फांसी के तख्ते पर ले गई। मालूम हो कि गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में गोली मारकर महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी।

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