18 जुलाई को NDA ने दिल्ली में बुलाई है अहम बैठक, जानें कौन-कौन से दल हो सकते हैं शामिल
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर देश के तमाम राजनीतिक दल तैयारी शुरू कर चुके हैं। भाजपा के खिलाफ जहां लगभग 15 राजनीतिक दल एकजुट हो चुके हैं वहीं एनडीए ने 18 जुलाई को दिल्ली में अहम बैठक बुलाई है।

याद रहे पटना के बाद भाजपा के खिलाफ लामबंद हुई राजीति पार्टियां अपनी दूसरी बैठक बेंगलुरू में करने जा रही हैं, जिसकी मेजबानी कांग्रेस पार्टी कर रही है, वहीं अब भाजपा ने अपनी ताकत दिखाने के लिए दिल्ली में विपक्षी पार्टियों की मीटिंग के ठीक एक दिन दिल्ली में ये अहम बैठक बुलाई है।
जिसमें घटक दलों के अलावा कुछ अन्य राजनीतिक पार्टियों के शामिल होने की संभावना हैं। आइए जानते हैं कि एनडीए के द्वारा की जा रही इस बैठक में कौन-कौन से दिग्गज नेता शामिल हो सकते हैं?
जानें कौन से नेता हो सकते हैं एनडीए की बैठक में शामिल
इस बैठक के जरिए भाजपा एकजुटता की कवायद शुरू कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में अकाली दल के सुखबीर बादल और टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू भी शामिल होंगे। इनके अलावा चिराग पासवान के भी इस बैठक में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।याद रहे विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ लामबंद हो चुके हैं।
पटना के बाद विपक्षी दल बेंगलुरू में कर रहे हैं बैठक
23 जून को बिहार की राजधानी पटना में उन्होंने साथ मिलकर बैठक की थी जिसमें देश भर के 15 से अधिक राजनीतिक दल के नेता एकत्र हुए थे। इन सभी ने लोकसभा चुनाव 2024 मे भाजपा को हराने की एक साथ हुंकार भरी थी। इसके बाद अब 16 और 17 जून को विपक्षी पार्टियां बेंगलुरू में आयोजित होने वाले बैठक में जुटने जा रहे हैं।
18 जुलाई को एनडीए करेगी शक्ति प्रदर्शन
विपक्षी दलों की एकजुटता को चैलेंज करने के लिए एनडीए भी अब 18 जुलाई को दिल्ली में अहम बैठक करने जा रही है। एनडीए ने अपनी बढ़ती ताकता का प्रदर्शन करने के लिए ये बैठक आहूत की है।
एनडीए अपनी मौजूदा स्थिति को भी क्लियर करेगी
इस बैठक के जरिए एनडीए अपनी स्थिति क्लियर करेगा कि उसके एनडीए गठबंधन में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल और जनता दल (यूनाइटेड) के जाने के बाद वो उनके साझेदार नहीं हैं।
भाजपा कर रही ये प्रयास
बता दें आगामी लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्रीमंडल में कुछ फेरबदल करके भाजपा का प्रयास है कि वो उन सभी पार्टियों को शामिल कर लें जो बीते कुछ समय में भाजपा की सहयोगी बनी हैं। भाजपा बिहार में राजद-जद (यू) खेमे के छोटे दलों को जोड़ने की जुगत कर रही है ताकि वो बिहार में अपनी स्थिति को चुनाव से पहले मजबूत कर सके।












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