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2019 में 1.39 लाख से अधिक लोगों ने की आत्महत्या, 23% दिहाड़ी मजदूर, जानिए हर साल क्यों बढ़ रहा है आंकड़ा

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस काल में लॉकडाउन के चलते मजदूर वर्ग के लोग काफी प्रभावित हुए हैं। इस दौरान कई लोगों की नौकरी चली गई तो कई लोगों को वापस अपने मूलराज्य लौटना पड़ा। लेकिन यहां भी उनके लिए रोजगार के साधन न होने की वजह से वह अब भूखे पेट रात गुजारने को मजबूर हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने साल 2019 में हुई आत्महत्याओं का आंकड़ा जारी किया है जो काफी चिंताजनक है।

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    2019 में 1, 39,123 लोगों ने आत्महत्या की

    2019 में 1, 39,123 लोगों ने आत्महत्या की

    रिपोर्ट के मुताबिक छह साल पहले की तुलना में 2019 में आत्महत्या से मरने वालों में दिहाड़ी मजदूरों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। एनसीआरबी की इस रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल, 2019 में 1, 39,123 लोगों ने आत्महत्या की, हैरानी की बात यह कि साल 2018 की तुलना में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं, कुल आत्महत्याओं में से दैनिक वेतन भोगियों की संख्या 23.4 प्रतिशत था।

    दिहड़ी मजदूर कर रहे आत्महत्या

    दिहड़ी मजदूर कर रहे आत्महत्या

    बता दें कि दैनिक वेतन भोगियों के लिए डेटा कृषि श्रमिकों को बाहर करता है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार आंकड़ों में आत्महत्या करने वालों को उनके पेशे के हिसाब से 9 श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पिछले वर्ष कुल 97,613 पुरुषों ने आत्महत्या की है। इनमें से सबसे अधिक दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की थी, जिनकी कुल संख्या 29,092 है। वहीं, आत्महत्या करने वालों में 14,319 लोग अपना काम करते थे और 11,599 लोग बेरोजगार थे।

    आत्महत्या के मामले में महिलाएं भी कम नहीं

    आत्महत्या के मामले में महिलाएं भी कम नहीं

    तमिलनाडु में दैनिक वेतन भोगी (5,186), महाराष्ट्र (4,128), मध्य प्रदेश (3,964), तेलंगाना (2,858) और केरल (2,809) द्वारा आत्महत्या करने वालों की संख्या सबसे अधिक है। वहीं महिलाओं की बात करें तो साल 2019 में 41,493 महिलाओं ने आत्महत्या की। जिसमें से सबसे अधिक (21,359) गृहणियां थीं, वहीं दूसरे नंबर में आत्महत्या के मामले में छात्राएं रहीं। 4,772 छात्राओं ने आत्महत्या की, जबकि तीसरे नंबर पर दैनिक वेतनभोगी महिलाएं (3,467) थी।

    साल 2014 से लगातार बढ़ रहा है आंकड़ा

    साल 2014 से लगातार बढ़ रहा है आंकड़ा

    आपको बता दे कि NRCB ने साल 2014 में केवल 'एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सूइसाइड्स' डेटा में दैनिक-यात्रियों को वर्गीकृत करना शुरू किया था। उस वर्ष उन्होंने आत्महत्या से होने वाली मौतों में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन अब यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। 2015 में 17.8 प्रतिशत, 19.2 प्रतिशत 2016 में प्रतिशत, 2017 में 22.1 प्रतिशत, 2018 में 22.4 प्रतिशत और पिछले वर्ष 23.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान दैनिक वेतन भोगी वालों की आत्महत्या की संख्या 2014 में 15,735 से बढ़कर 2019 में 32,563 हो गई।

    बेरोजगारों में बढ़ा आत्महत्या का मामला

    बेरोजगारों में बढ़ा आत्महत्या का मामला

    एनसीआरबी की रिपोर्ट में आत्महत्याओं को नौ श्रेणियों में विभाजित किया गया है, इसमें दिहाड़ी मजदूर, गृहिणियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों के अलावा, पेशेवरों या वेतनभोगी, छात्र, बिजनेस मैन, सेवानिवृत्त व्यक्तियों, बेरोजगारों और अन्य व्यक्ति शामिल हैं। इस डेटा में केवल उन व्यक्तियों के पेशे को दर्शाया गया है जिन्होंने आत्महत्या की लेकिन इतना बड़ा फैसला लेने के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। 2019 में आत्महत्या करने वाले बेरोजगारों का अनुपात 10.1 प्रतिशत था, जो पिछले 25 वर्षों में पहली बार डबल डिजिट संख्या में दर्ज किया गया है। बता दें कि एनसीआरबी 1995 के बाद से डेटा रख रहा है। पिछले साल 14,019 बेरोजगारों ने आत्महत्या की। यहा 2018 के 12,936 के आंकड़े से 8.37 प्रतिशत अधिक है।

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    English summary
    NCRB released the figure of suicide suicides in 2019 quarter of daily wage laborers
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