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विनोद खन्ना को मरणोपरांत दादा साहेब फाल्के, कभी अमिताभ से ज्यादा थी लोकप्रियता

By Rizwan
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    National Awards 2018: Vinod Khanna wins Dadasaheb Phalke Award | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार कमेटी के चेयरमैन शेखर कपूर ने शुक्रवार को 65वें नेशनल अवॉर्ड्स 2018 की घोषणा कर दी है। विनोद खन्ना को उनकी लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए दादा साहेब फाल्के अवार्ड के लिए चुना गया है। विनोद खन्ना को मरणोपरांत इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। विनोद खन्ना का पिछले साल अप्रैल में लंबी बीमारी के बाद 70 साल की उम्र में निधन हो गया था। विनोद खन्ना ने ना सिर्फ फिल्मों में अपने झंड़े गाड़े थे, बल्कि राजनीति के क्षेत्र में भी नाम हासिल किया था।

    बंटवारे के वक्त पेशावर से आया था खन्ना का परिवार

    बंटवारे के वक्त पेशावर से आया था खन्ना का परिवार

    विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर, 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था। बंटवारे के बाद उनका परिवार मुंबई में बस गया। पिता टेक्सटाइल बिजनेस में थे, लेकिन विनोद साइंस के स्टूडेंट रहे और पढाई के बाद इंजीनियर बनने का सपना देखा करते थे। स्कूलिंग के बाद पिता ने उनका एडमिशन एक कॉमर्स कॉलेज में भी करा दिया था, लेकिन विनोद का पढ़ाई में मन नहीं लगा। वो मुंबई आए और फिल्मों में अपनी पहचान बनाई।

    फिल्मों में बनाया खास मुकाम

    फिल्मों में बनाया खास मुकाम

    विनोद खन्ना ने साल 1968 में 'मन का मीत' फिल्म से करियर की शुरुआत की। 70 के दशक में उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। विनोद ने अमर 'अकबर एंथोनी', 'अचानक', 'मेरा गांव मेरा देश', 'हेरा फेरी', 'मेरे अपने', और मुकद्दर का सिंकदर जैसी तमाम फिल्मों में काम किया। उन्होंने अपने दौर के हेंडसम हंक का कहा जाता था, जो लड़कियों के बीच काफी मशहूर थे। उनके अमिताभा का कड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता था लेकिन उन्होंने फिल्मों से ब्रेक ले लिया। एक वकफे के बाद उन्होंने फिल्मों में वापसी की और फिर से अपनी पहचान बनाई।

     पर्सनल लाइफ और ओशो की शरण में जाना

    पर्सनल लाइफ और ओशो की शरण में जाना

    विनोद खन्ना की पहली शादी उनकी दोस्त गीतांजलि से 1971 में हुई थी। इस शादी से उनके दो बेटे हैं। राहुल खन्ना और अक्षय खन्ना लेकिन अपने परिवार को छोड़कर जब विनोद ने अमेरिका के ओशो कम्यून रजनीशपुरम में बसने का फैसला किया तो ये शादी खतरे में आ गई। अचानक करियर छोड़ ओशो की शरण में जाने के उनके फैसले ने सबको हैरत में डाल दिया था। उन्होंने साल 1990 ने कविता से दूसरी शादी की। उनके दो बच्चे हैं। बेटा, साक्षी और बेटी श्रद्धा। बाद में उन्होंने राजनीति का रुख किया और भारतीय जनता पार्टी से सांसद रहे। अपनी मौत के वक्त भी वो पंजाब के गुरुदासपुर से सांसद थे।

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    English summary
    National film awards dada saheb phalke award vinod khanna
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