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बच्चियों से रेप के 20 हजार केसों के लिए हैं इतने जज, कैसे होगा 10 महीने में निपटारा?

By Mohit Singh
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    नई दिल्ली: हाल ही में कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ गैंगरेप और हत्या के बाद देशभर में गुस्से का माहौल दिखा, इसके बाद सख्त कानून की मांग उठी। कानून बनाया भी गया, लेकिन क्या कानून बनाने से दरिदों को सजा मिलेगी। क्योंकि आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। साल 2016 की नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो(एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार देश की अलग-अलग अदालतों में 36,657 मामले लंबित हैं।

    रोजाना 55 बच्चियों से होता है दुष्कर्म- NCRB

    रोजाना 55 बच्चियों से होता है दुष्कर्म- NCRB

    एक रिसर्च के मुताबिक, देश मे रोजाना 55 बच्चियों से दुष्कर्म होता है। देश में हर साल 20 हजार से ज्यादा बच्चियां दुष्कर्म की शिकार होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 94% केसों में बच्चों के परिचित शामिल होते हैं। भले ही सरकार ने सख्त कानून बना दिया, लेकिन यहां भी पेंच हैं।

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    10 महीने में कैसे होगा 20 हजार केसों का निपटारा

    10 महीने में कैसे होगा 20 हजार केसों का निपटारा

    बच्चियों से रेप के मामलों में अगर एक जज रोजाना 50 केसों की भी सुनवाई करता है तो कितने केसों की सुनवाई होगी? अगर देशभर के 400 जजों को रोजाना 50 केसों का लक्ष्य भी दे दिया जाए तो जजों के लिए 10 महीने में 20 हजार केसों की सुनवाई करना आसान नहीं है। मतलब कानून तो बना दिया गया, लेकिन केसों के निपटारे के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। कानून के जानकारों का कहना है कि ये संभव ही नहीं है कि 20 हजार केसों का निपटारा 10 महीने में किया जा सके।

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    देश की जिला अदालतों में 5984 जजों के पद खाली हैं

    देश की जिला अदालतों में 5984 जजों के पद खाली हैं

    देश की विभिन्न अदालतों में महिलाओं से अपराध के 26 लाख केस पेंडिंग हैं। देश के कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने संसद में एक रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि देशभर में महिलाओं के साथ हुए अपराध के 26,820,16 केस पेंडिंग हैं और ये संख्या लगातर बढ़ रही है। देश की जिला अदालतों में 5984 जजों के पद खाली पड़े हैं। वहीं हाईकोर्ट में 395 और सुप्रीम कोर्ट में छह पद खाली हैं। दुष्कर्म के मामले मेंएनसीआरबी की रिपोर्ट कहते है कि 30% मामलों में पीड़िता को न्याय मिलता है।

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    English summary
    national crime record bearue child rape 20000 cases 400 judge

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