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मोदी के एक साल: 'वादे' तमाम लेकिन 'वादों' का काम तमाम

By Ankur
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सुरक्षा में बड़ी चूक: मुंबई एयरपोर्ट के ऊपर दिखे संदिग्ध पैराशूट

Narendra Modi's govts one year: Promises galore, but ACCHE DIN yet to come

रैली में अपने भाषण में मोदी ने कई बार कहा कि बुरे दिन चले गये...बुरे दिन चले गये लेकिन उन्होंने ये नहीं कहा कि अच्छे दिन आ गये। शायद इसकी वजह ये रही होगी कि जो वादे उन्होंने किए थे वो पूरा नहीं कर पाए। वादा देश की हर महिला को सुरक्षा देने का, वादा सरहद पार दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने का, वादा बेहतर कानून व्यवस्था का और वादा देश के सबसे बड़े दुश्मन दाऊद इब्राहिम को भारत वापस लाने का। एक साल पूरा होने पर सरकार में बैठक लोग अपना बही-खाता जनता के सामने ला रहे हैं।

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रैली नहीं रैलियां की जा रही है। सरकार इस एक साल को दस साल पर भारी बता रही है। तो आईए हम सिर्फ अपराध, आतंकवाद और कानून के मुद्दों पर चर्चा करते हैं कि क्या इस दिशा में सच में अच्छे दिन आ गये हैं? मोदी सरकार के एक साल में जुर्म की सूरत कितनी बदली है? इस एक साल में देश की महिलाएं कितनी महफूज हैं? और एक साल में सीमा पर घुसपैठ की वारदातों में कमी आई की नहीं?

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इन सबका लेखा-जोखा आपके सामने रखेंगे लेकिन सबसे पहले बात करते हैं हिंदुस्तान के कानून के सबसे बड़े अपराधी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की। दाऊद इब्राहिम को पकड़ कर भारत वापस लाना 2014 के लोकसभा चुनाव में महिला सुरक्षा के बाद सबसे बड़ा मुद्दा था। तो क्या हुआ दाऊद का? कहां है दाऊद? मोदी सरकार ने एक साल में उसे लाने के लिए क्या किया? और क्या कभी दाऊद को हिंदुस्तानी कानून के चौखट पा लाया जा सकेगा।

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22 साल गुजर गये, कई उदास रातें गुजर गईं, उम्मीदों में आसमान की तरफ देखते-देखते कई दिन गुजर गये लेकिन दाऊद नहीं मिला जो हिंदुस्तान का सबसे बड़ा गुनहगार है। आज भी उसी लगन से हिंदुस्तान उसे तलाश रहा है ताकि इस गुनहगार को उसके गुनाह की सजा मिल सके। मगर अफसोस कि मोदी सरकार का पहला साल भी दाऊद को लेकर सिर्फ बातों में गुजर गया।

हद तो तब हो गई जब सरकार के ही एक मंत्री ने यह बयान दे दिया कि भारत सरकार को दाऊद इब्राहिम के ठिकाने के बारे में नहीं पता है। इस मसले पर सरकार की खूब छीछालेदर हुई जिसके बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बयान दिया कि दाऊद पाकिस्तान में ही है और हम उसे हर हालत में वापस लाने पर प्रतिबद्ध हैं।

महिला सुरक्षा

16 दिसंबर (दिल्ली की निर्भया गैंगरेप केस) के बाद महिला सुरक्षा को लेकर जिस तरह का माहौल था उसे देखते हुए देश की हर पार्टी ने इसे अपना चुनावी मुद्दा बना लिया। मोदी सरकार ने भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई वादे किए। तो आईए आपको बताते हैं कि साल भर बाद कहां हैं वो वादे। हिंदुस्तान की सत्ता संभालते वक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ना मालूम कितने ऐसे वायदे किए और कितने भरोसे दिलाए।

महिला सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री या फिर यू कहें कि एनडीए सरकार के वादों का क्या हुआ उसका अक्स इन दो मामलों में साफ दिखता है। आप क‍हेंगे कि पूरे हिंदुस्तान की तस्वीर सिर्फ दो मामलों को लेकर नहीं दिखायी जा सकती लेकिन जब आंकड़े इन मामलों की तश्दीक करते हों तो यकीन करना पड़ता है।

निजाम बदल गये लेकिन पठानकोट की सीमा (बदला हुआ नाम) की किस्मत नहीं बदली। दो साल पहले शोहदों की श्िाकार बनी सीमा आज भी घर से बाहर नहीं निकलती। आईए आंकड़ों के आईन में हकीकत देख लेते हैं। साल 2010 में जहां 22172 बलात्कार के मामले हुए वहीं 2011 में 24206, 2012 में 25337, 2013 में 26201 और 2014 में 268867 बलात्कार के मामले दर्ज किए गये।

इन आंकड़ों के हिसाब से पिछले 5 सालों में हिंदुस्तान में सवा लाख से ज्यादा बलात्कार के मामले सामने आए हैं। यानी हर 20 मिनट में एक बलात्कार। निभर्या फंड की बात करें तो साल 2013 में 2016 तक के लिए सरकार ने 3 हजार करोड़ रुपये एलॉट किया था लेकिन अभी तक इसमें से आधे से भी कम पैसा महिलाओं की सुरक्षा के लिए खर्च किया गया है। हालांकि इन तमाम मामलों में सिर्फ मोदी सरकार को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता लेकिन आंकड़ें तो इस बात की गवाही देते ही हैं की मई 2014 में नई सरकार आने के बावजूद हालात कुछ नहीं बदले हैं।

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English summary
Narendra Modi's govts one year: Promises galore, but ACCHE DIN yet to come.
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