नरेंद्र मोदी का वो दांव जिसकी देशभर में किसी को भनक तक नहीं लगी

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    PM Modi ने आख़िर क्यों अमित शाह से Demonitaization की बात छुपाई थी | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। पिछले साल 8 नवंबर को शाम करीब 7 बजे अचानक नोटबंदी का ऐलान कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश और दुनिया को चौंका दिया था। पीएम नरेंद्र मोदी के इस फैसले में वो दृढ़ता दिखी, जिसे यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान हुए पॉलिसी पैरालिसिस से उबरने के तौर पर खा गया। नोटबंदी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैसला अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि लंबे समय तक सोच-समझकर लिया गया एक रणनीतिक फैसला था। इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी सरकार में शामिल ज्यादातर लोगों को नहीं थी और ना ही आरबीआई जैसे संस्थान को। सूत्रों के मुताबिक इसकी जानकारी सरकार के केवल चुनिंदा व्यक्तियों को ही थी। 8 नवंबर को इस ऐतिहासिक फैसले को पूरा एक साल हो जाएगा।

    इसे क्यों राज रखा गया?

    इसे क्यों राज रखा गया?

    नोटबंदी के फैसले को ऐन वक्त तक इसलिए राज रखा गया क्योंकि अगर ये प्लान लीक हो जाता तो इसका मकसद ही फेल हो जाता है। इसके जरिये जिन लोगों को निशाने पर लिया जाना था वो अपना कैश और गहने खुर्द-बुर्द कर सकते थे। अवैध तरीके से कमाए गए काले धन को दूसरे खातों में ठिकाने लगाया जा सकता था। इस फैसले को प्रभावी बनाने के लिए ऐन वक्त तक इसकी गोपनीयता बनाए रखी गई। 8 नवंबर को लिए गए नोटबंदी फैसले ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पूर्ववर्ती सरकारों के मुकाबले कड़े फैसले लेने में किस तरह सक्षम हैं।

    मोदी की वो खास टीम

    मोदी की वो खास टीम

    माना जाता है कि मोदी ने बड़े नोटों की नोटबंदी का मन अप्रैल 2016 में ही बना लिया था। लंबी मंत्रणा और विचार विमर्श के बाद 8 नवंबर को ये फैसला लागू कर दिया गया। इतने लंबे समय तक इस खास प्लान को सीक्रेट रखना मोदी की प्रशासनिक क्षमता का नमूना ही कहा जाएगा। इसके लिए प्रधानमंत्री के 7 रेसकोर्स रोड स्थित आवास पर एक विशेष टीम को बैठाया गया था। इस टीम में कुछ नौजवान रिसर्चर भी थे जो सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को जमीनी धरातल पर उतरने का अध्ययन कर रहे थे। इस टीम में पीएम मोदी का सोशल मीडिया अकाउंट संभालने वाली टीम के वो लोग भी थे जो डैटा एनालिसिस के माहिर खिलाड़ी थे। पीएम मोदी का इन लोगों के प्रति विश्वास और पीएम आवास पर सीधे प्रधानमंत्री के अंडर में काम करने की वजह से ये प्लान पूरी तरह से सीक्रेट रह पाया।

    चर्चा भी की तो पता भी नहीं चला

    चर्चा भी की तो पता भी नहीं चला

    बाद की कुछ रिपोर्टों में पता चला कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस संबंध में कुछ विषय विशेषज्ञों और कई क्षेत्रों के लोगों के बीच चर्चा की, यह भनक लगे बिना कि ऐसा कुछ होने जा रहा है। इस चर्चा में आरबीआई के अधिकारी भी शामिल थे। मोदी की टीम ने विषय विशेषज्ञों से चर्चा के दौरान सावधानी ये बरती कि पूरे प्लान पर किसी खास व्यक्ति से चर्चा करने के बजाय अलग -अलग टुकड़ों में डिस्कस किया। इस तरह किसी को पूरे प्लान की भनक तक नहीं लगी और जब 8 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका ऐलान किया तो पूरा देश दंग रह गया।

    जब 2 हजार का नोट बंद होने अफवाह उड़ी

    जब 2 हजार का नोट बंद होने अफवाह उड़ी

    8 नवंबर को पीएम मोदी के ऐलान से पहले सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें आईं कि 2 हजार रुपए का नोट बंद होने जा रहा है। कहीं पूरा प्लान लीक ना हो जाए इसके मद्देनजर सरकार ने नोटबंदी का ऐलान वक्त से पहले कर दिया और 8 नवंबर के तौर पर ये तारीख इतिहास में दर्ज हो गई।

    घोषणा से कुछ देर पहले क्या हुआ

    घोषणा से कुछ देर पहले क्या हुआ

    नोटबंदी की घोषणा इतने खुफिया तरीके से प्लान की गई थी कि सरकार के बड़े ब्यूरोक्रेट्स और बड़े मंत्रियों तक को भी इसकी भनक नहीं लग पाई। कहा जाता है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तक को ये जानकारी प्रधानमंत्री मोदी के टेलीविजन से किए गए ऐलान से मिली और यहां तक कि वित्त मंत्री अरुण जेटली को भी पीएम मोदी ने कैबिनेट बैठक से कुछ देर पहले ही ब्रीफ किया। अपने टेलीविजन संदेश से पहले पीएम मोदी ने कैबिनेट मीटिंग बुलाई और उसमें इसकी जानकारी अपने कैबिनेट के साथियों को दी। पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों को साफ निर्देश दिए थे कि कोई भी बैठक में अपने मोबाइल फोन लेकर ना आए। यहां तक कि कैबिनेट के साथियों को कैबिनेट के एजेंडा के बारे में भी कुछ खास पता नहीं था। कैबिनेट ब्रीफिंग के बाद पीएम मोदी सीधे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने गए और उन्हें सरकार के फैसले की जानकारी थी। शाम पौने सात बजे से नौ बजे तक कैबिनेट के साथी वहीं बैठे रहे, जब तक कि पीएम ने टेलीविजन पर नोटबंदी का ऐलान नहीं कर दिया।

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