PM मोदी ने ISS पर मौजूद ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से की सीधी बातचीत, पढ़ें क्‍या-क्‍या कहा?

Narendra Modi interacted With Shubhanshu Shukla: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर मौजूद भारतीय वायुसेना के अधिकारी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से सीधा संवाद किया। वीडियो कॉल के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने शुभांशु शुक्ला के साहस और योगदान की सराहना की।

अंतरिक्ष में भारतीय: 41 साल का इंतजार खत्म

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 25 जून 2025 को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल में सवार होकर आईएसएस के लिए रवाना हुए थे। यह मिशन एक्सिओम-4 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक्सिओम स्पेस, एक निजी अंतरिक्ष अवसंरचना कंपनी है, और यह मिशन अंतरिक्ष में वाणिज्यिक अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

40 वर्षों से अधिक समय के बाद, शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने हैं, जो भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस मिशन की सफलता के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने मिशन पायलट शुक्ला और अन्य क्रू सदस्यों को बधाई दी और उनकी सफलता की कामना की। उन्होंने यह भी कहा कि शुभांशु शुक्ला अपने साथ "1.4 बिलियन भारतीयों की इच्छाएं, उम्मीदें और आकांक्षाएं" लेकर गए हैं।

एक्सिओम-4 मिशन: नासा और इसरो का सफल सहयोग

एक्सिओम-4 मिशन के ड्रैगन अंतरिक्ष यान ने सफलतापूर्वक डॉकिंग पूरी कर ली है, जिसके साथ ही अंतरिक्ष स्टेशन पर क्रू सदस्यों का दो सप्ताह का प्रवास शुरू हो गया है। इस दौरान, मिशन दल सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण वातावरण में वैज्ञानिक प्रयोग, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेगा। शुभांशु शुक्ला मिशन दल द्वारा आईएसएस पर किए जाने वाले 60 प्रयोगों में से सात का नेतृत्व करेंगे।

यह मिशन नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच एक सफल सहयोग का प्रतीक है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतरिक्ष स्टेशन पर पहला भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजने की प्रतिबद्धता को पूरा करता है। इसरो भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है, जो अंतरिक्ष अनुसंधान और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए उत्तरदायी है।

अंतरिक्ष में भारत की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, और यह मिशन उस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। भारत सरकार अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, और इस तरह के मिशन भविष्य में और अधिक सहयोग और नवाचार के लिए मार्ग प्रशस्त करेंगे।

इसरो के आगामी गगनयान मिशन के साथ, भारत का लक्ष्य 2024 के अंत या 2025 की शुरुआत में मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेजना है, जो देश की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं को और मजबूत करेगा। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का आईएसएस पर जाना न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह भारत की युवा पीढ़ी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

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