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ममता की नजर सौ सीटों पर, कहा मोदी पीएम नहीं बनेंगे

Anna Hazare
नई दिल्‍ली। समाज सेवी अन्‍ना हजारे से मिले समर्थन के बाद लोकसभा चुनाव में लगभग सौ सीटें जीतने का सपना देख रही पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बात से इनकार किया है कि नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। ममता ने आईबीएन-7 में राजदीप सरदेसाई से खास बातचीत में कहा कि हम अन्‍ना हजारे का इस्‍तेमाल नहीं कर रहे हैं, ममता के अनुसार वह बुजुर्ग हैं इसके बावजूद समाज सेवा में व्‍यस्‍त हैं, इसलिए हम उनकी इज्‍जत करते हैं।

ममता ने इस बात से इनकार किया है कि वह चुनाव बाद भाजपा और कांग्रेस के साथ जा सकती हैं। उन्‍होने कहा कि हमने पहले अटल बिहारी बाजपेई की सरकार का एक साल तक समर्थन‍ किया लेकिन जब राम मंदिर का मुद्दा आया तो हम उनसे अलग हो गये। अपने समर्थकों में दीदी के नाम से मशहूर ममता ने इस बात को अस्‍वीकार कर दिया कि वह मुस्लिम वोट बैंक बचाने के लिए भाजपा का साथ नहीं देना चाहती हैं। उनका कहना है कि हमारे साथ माइनॉरिटी और मेजारिटी सभी का समर्थन है।

उन्‍होने वर्तमान ओपिनियन पोल को नकारते हुए कहा कि इनका कोई मतलब नहीं है। अगर तीन दिन बाद फिर सर्वे किये जाएं तो पता नहीं कि क्‍या होगा? मोदी पर ममता के कड़े रूख का कारण बताया जा रहा है कि वह चुनाव परिणाम आने तक मोदी का विरोध कर रही हैं जिससे कि बंगाल में टीएमसी की सीटें भाजपा को न मिलें, अगर वह चुनाव पूर्व ही मोदी का समर्थन करेंगी तो टीएमसी का वोटर भाजपा में शिफ्ट हो सकता है। केंद्र में एक बड़ी ताकत बनने के लिए जरूरी है कि वह पश्चिम बंगाल में अधिक सीटें जीतें।

अन्ना-केजरीवाल के बीच हो सकता है टकराव

ममता ने उम्‍मीद जताई की वह सौ सीटें जीतने की उम्‍मीद कर रही है। अन्‍ना से मिलने वाले समर्थन के बाद अब वह दिल्‍ली की सात लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्‍याशी उतारने जा रही हैं। जिसके बाद अन्‍ना हजारे और आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है, क्‍योंकि अन्‍ना ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि वह न तो केजरीवाल का समर्थन करेंगे और न ही विरोध करेंगे। टकराव को टालने के लिए आम आदमी पार्टी नेता अन्‍ना से मुलाकात कर सकते हैं।

'आप' नेता गोपाल राय ने अन्‍ना द्वारा ममता का साथ देने पर कहा कि यह खुशी की बात है कि अन्‍ना राजनीति में सफाई के मुद्दे पर आगे आ रहे हैं। उन्‍होने अन्‍ना के सत्रह शर्तों वाले पत्र पर पार्टी द्वारा जवाब न देने पर कहा कि हम इस पर पहले ही अन्‍ना से मिलकर बात कर चुके हैं, हमारी पार्टी का निर्माण ही उन्‍हीं शर्तों पर हुआ है, अत: अलग से पत्र लिखकर कुछ बताने की जरूरत नहीं है।

इसके अलावा दिल्‍ली के कुछ महिला संगठनों, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय और जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसरों ने अन्‍ना और ममता के साथ आने का विरोध किया है, उन्‍होने पत्र लिखकर कहा है कि जब से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार बनी है, तबसे महिलाओं की सुरक्षा मुश्किल में पड़ गयी है।

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