MP उपचुनाव: अशोकनगर से जुड़ा ये अजीब मिथक, जो भी CM यहां आया चली गई कुर्सी, बच रहे शिवराज और कमलनाथ

भोपाल। मध्य प्रदेश के उपचुनाव में अशोकनगर (Ashok Nagar) जिला राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यहां की दो सीटों मुंगावली और अशोकनगर पर उपचुनाव हो रहा है लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अभी तक अशोकनगर नहीं पहुंचे। इसकी वजह यहां से एक ऐसे मिथक का जुड़ा होना है जिसके मुताबिक जो भी सीएम यहां आता है उसकी कुर्सी चली जाती है। इस मिथक में अशोकनगर का रोल कितना है ये तो नहीं पता लेकिन उदाहरण बताते हैं कि जो भी यहां आया उसकी कुर्सी चली गई। ये सिर्फ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के लिए ही नहीं था। बल्कि दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री यहां पहुंचे तो उनके साथ भी यही हुआ।

बचकर निकल रहे शिवराज-कमलनाथ

बचकर निकल रहे शिवराज-कमलनाथ

यही वजह है कि शनिवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) जिले में तो पहुंचे लेकिन जिला मुख्यालय पर नहीं गए। बल्कि मुख्यमंत्री ने अपना हेलॉकॉप्टर सहोदर में उतरवाया और प्रचार करके वापस चले गए। शिवराज अब दोबारा इस मिथक के चक्कर में नहीं फंसना चाहते। सिर्फ शिवराज ही नहीं कमलनाथ भी यहां आने से अब तक बचे हुए हैं।

जिले की दो सीटों पर उपचुनाव के चलते शिवराज और कमलनाथ यहां आ तो रहे हैं लेकिन मुख्यालय की जगह आस-पास की जगहों पर पहुंच रहे हैं। यही वजह हैं कि शिवराज का हेलीकॉप्टर जहां सहोदरी उतरा वहीं कमलनाथ राजपुर पहुंच रहे हैं।

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    शिवराज ही नहीं ये मुख्यमंत्री भी हटे कुर्सी से

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    पिछले 13 साल के कार्यकाल में शिवराज कभी भी अशोकनगर के दौरे पर नहीं गए और जब आए तो अशोकनगर का मिथक उनके साथ भी सच हो गया और पिछले चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ गई। शिवराज के बाद कमलनाथ ने राज्य की कमान संभाली और 15 महीने मुख्यंमत्री रहे। लेकिन शिवराज और पुराने मुख्यमंत्रियों का हाल देखकर कमलनाथ भी अपने 15 महीने के कार्यकाल में अशोकनगर का रुख नहीं किया।

    अशोकनगर के इस मिथ के घेरे में सिर्फ यही दो मुख्यमंत्री नहीं आए हैं बल्कि इसकी लिस्ट लंबी है। सुंदरलाल पटवा अपने मुख्यमंत्रित्व काल में यहां उद्घाटन करने पहुंचे थे। 15 दिन बात ही कुर्सी से हाथ धोना पड़ गया। इनमें एक और नाम दिग्विजय सिंह का दर्ज है। दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री रहते अशोकनगर को जिला घोषित करने यहां आए थे और अशोकनगर के शिकार बन गए। यहां से वापस लौटे तो कुछ दिनों बाद ही कुर्सी चली गई। मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने के साथ 10 साल का राजनीतिक वनवास में झेलना पड़ा।

    जब लालू भी हुए अशोकनगर के शिकार

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    अशोकनगर का सबसे दिलचस्प किस्सा लालू यादव यादव के नाम से जुड़ा है। लालू यादव जब बिहार के मुख्यमंत्री थे उस दौरान एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने यहां पहुंचे थे। यहां से लौटे तो कुछ समय बाद ही उन्हें कुर्सी राबड़ी देवी को सौंपनी पड़ी। यही वजह है कि अशोकनगर जिले की दो सीटों मुंगावली और अशोकनगर को जीतना तो भाजपा और कांग्रेस दोनों चाहती हैं लेकिन शिवराज और कमलनाथ यहां से बचकर निकल रहे हैं। वैसे तो है ये मिथक ही लेकिन जब बात मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आ जाए तो कोई भी इसे चुनौती नहीं देना चाहता।

    अशोकनगर और मुंगवाली सीट पर 3 नवम्बर को उपचुनाव होना है। 2018 के विधानसभा चुनाव में दोनों सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। अशोकनगर में कांग्रेस के जजपाल सिंह जज्जी ने भाजपा के लड्डूराम को हराया था। वहीं मुंगवाली से कांग्रेस के महेंद्र सिंह कालूखेड़ा ने भाजपा के राव देशराज सिंह को शिकस्त दी थी।

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