• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

उन्नाव में बच्चियों की मौत का रहस्य बरक़रार, घरवाले पुलिस से परेशान - ग्राउंड रिपोर्ट

By समीरात्मज मिश्र

उन्नाव में बच्चियों की मौत का रहस्य बरक़रार, घरवाले पुलिस से परेशान - ग्राउंड रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के बबुरहा गाँव में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गईं दोनों लड़कियों का अंतिम संस्कार गाँव में ही कर दिया गया, जबकि तीसरी लड़की अब भी कानपुर के रिजेंसी अस्पताल में जीवन और मौत से संघर्ष कर रही है. इस बीच, पिछले तीन दिन से बबुरहा गाँव जैसे पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है.

उन्नाव ज़िला मुख्यालय से क़रीब 50 किमी दूर असोहा थाना है. थाने से क़रीब तीन किमी की दूरी पर है बबुरहा गाँव. इसी गाँव में उन तीन लड़कियों के घर हैं, जो बुधवार शाम एक खेत में बेहोश पाई गई थीं. इनमें से दो लड़कियों की मौत हो गई. घटनास्थल की दूरी लड़कियों के घर से क़रीब डेढ़ किमी है.

गुरुवार को उन्नाव के ज़िला अस्पताल में दोनों लड़कियों का पोस्टमॉर्टम हुआ, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आ सकी है. उन्नाव के उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर तन्मय कक्कड़ ने गुरुवार को बताया कि अभी रिपोर्ट उन्होंने देखी नहीं है.

लेकिन गुरुवार शाम को यूपी के पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी ने एक वीडियो बयान में रिपोर्ट के बारे में जानकारी दी और बताया, "दोनों लड़कियों के शरीर पर बाहरी या भीतरी, किसी भी तरह के चोट के निशान नहीं पाए गए हैं. मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है, इसलिए विसरा को जाँच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है."

उन्नाव के डिप्टी सीएमओ डॉक्टर तन्मय कक्कड़ ने बीबीसी को बताया कि बिना रासायनिक जाँच के यह कहना मुश्किल है कि लड़कियों की मौत ज़हर खाने की वजह से हुई है. इस बारे में उन्नाव के पुलिस अधीक्षक सुरेश कुलकर्णी ने घटना के बाद कहा था कि घटनास्थल पर झाग मिले थे, जिससे यह आशंका थी कि शायद ज़हर खाने से लड़कियों की मौत हुई हो.

उन्नाव में बच्चियों की मौत का रहस्य बरक़रार, घरवाले पुलिस से परेशान - ग्राउंड रिपोर्ट

घटना के अगले दिन मृत लड़कियों में से एक के पिता ने असोहा थाने में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई. एफ़आईआर में भी यह बात दर्ज की गई है कि मृत लड़कियों के गले में दुपट्टा लिपटा था और दोनों के मुंह से झाग निकल रहा था. तीसरी लड़की भी इसी हालत में मिली थी, जिसका कानपुर के रिजेंसी अस्पताल में इलाज चल रहा है.

पोस्टमॉर्टम के बाद गुरुवार को देर शाम लड़कियों के शव परिजनों को सौंप दिए गए, जिनका शुक्रवार सुबह अंतिम संस्कार कर दिया गया. गुरुवार को दिन में मृत लड़कियों को दफ़नाने के लिए प्रशासन ने जेसीबी मशीन भी बुला ली थी, लेकिन गाँव के कुछ लोग और कुछ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के ज़बरदस्त विरोध के कारण जेसीबी मशीनें वापस भेज दी गईं.

एक ही परिवार की लड़कियाँ

गुरुवार को दिन भर पूरा बबुरहा गाँव छावनी बना रहा. गाँव के रास्ते में तीन जगह बैरियर लगाए गए थे, जहाँ हर जाने वाले की तलाशी ली जा रही थी. मीडिया वालों को भी बिना परिचय पत्र देखे बैरियर के पार जाने की अनुमति नहीं थी. उन्नाव के डीएम रवींद्र कुमार और आनंद कुलकर्णी के अलावा लखनऊ परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक लक्ष्मी सिंह भी दिन भर वहाँ मौजूद रहीं.

शाम को लक्ष्मी सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "अंतिम संस्कार के लिए कोई दबाव नहीं बनाया गया है. हमने उन्हें पूरी सुरक्षा दे रखी है. यह परिवार पर निर्भर करता है कि वो कब अंतिम संस्कार करना चाहते हैं."

उन्नाव में बच्चियों की मौत का रहस्य बरक़रार, घरवाले पुलिस से परेशान - ग्राउंड रिपोर्ट

ये तीनों लड़कियाँ एक ही परिवार से हैं. इनमें दो चचेरी बहनें हैं, जिनकी उम्र 13 साल और 16 साल है. जबकि तीसरी लड़की रिश्ते में इन दोनों की बुआ लगती थी. इनमें 16 वर्षीय लड़की जीवित है, जिसका गंभीर स्थिति में कानपुर में इलाज चल रहा है.

आईजी लक्ष्मी सिंह ने बताया कि लड़की की हालत में सुधार है. लेकिन परिजन दिन भर उसे कानपुर से दिल्ली के किसी अच्छे अस्पताल में शिफ़्ट करने की माँग करते रहे. उन्नाव के ज़िलाधिकारी ने अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखकर सूचित किया है कि लड़की के इलाज का पूरा ख़र्च राज्य सरकार देगी.

मृत लड़कियों में से एक की रिश्तेदार महिला ने बेहद ग़ुस्से में कहा, "हमको पता भी नहीं चल रहा है कि वह ज़िंदा है या वो भी मर गई. उसकी हालत यहीं से ख़राब थी. हम लोग कहते रह गए कि उसे कहीं और भर्ती करा दिया जाए लेकिन पुलिस वालों ने हमारी नहीं सुनी. उसी को घटना के बारे में जानकारी है. अगर वह नहीं बची, तो हमें कुछ पता ही नहीं चलेगा कि हमारी लड़कियों के साथ क्या हुआ और ये सब किसने किया."

पुलिस का जमावड़ा

फ़िलहाल पुलिस ने जाँच के लिए छह टीमें बनाई हैं और पूरे गाँव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. गुरुवार को दिन भर राजनीतिक दलों के नेताओं का भी जमावड़ा लगा रहा.

इस घटना को लेकर गाँव में ग़ुस्सा भी है और आश्चर्य भी है. गाँव में दलितों के मुश्किल से छह-सात घर ही हैं, जिनमें पीड़ित परिजनों के घर भी शामिल हैं.

उन्नाव में बच्चियों की मौत का रहस्य बरक़रार, घरवाले पुलिस से परेशान - ग्राउंड रिपोर्ट

गाँव के ही एक बुज़ुर्ग दयाराम का कहना था, "लड़कियाँ चारा काटने के लिए अक़्सर ही खेत में जाती थीं. गाँव की दूसरी लड़कियाँ भी जाती थीं. लेकिन कभी कुछ ऐसा नहीं हुआ. गाँव में इन लोगों के यहाँ से किसी का कोई विवाद भी नहीं था."

एक मृतका के भाई ने बताया कि तीनों पहले स्कूल जाती थीं, लेकिन लॉकडाउन के बाद जब से स्कूल बंद हुए, तो सभी घर पर ही रह रही थीं.

भाई का कहना था, "मेरी बहन 10वीं में पढ़ती थी, जबकि दूसरी मृत लड़की मेरी भतीजी थी. उसकी माँ बचपन में ही मर गई थी. मैं और मेरा भाई दोनों मज़दूरी करते हैं. समझ में नहीं आ रहा है कि यह सब कैसे हो गया और किसने किया है."

मौत के कारणों को लेकर परिजनों के अलावा पुलिस भी हैरान है. लेकिन मृतकों के परिजनों और गाँव वालों ने आरोप लगाया है कि पुलिस परिजनों को लगातार परेशान कर रही है और हत्या की ज़िम्मेदार उन्हें ही साबित करना चाहती है.

घटना में मृत सबसे छोटी लड़की के झोंपड़ीनुमा घर के बाहर सबसे ज़्यादा पुलिस का जमावड़ा था. उन्नाव ज़िले के कई अधिकारी भी वहाँ खड़े थे.

क्या कह रहे हैं घर के लोग

हमने घर के भीतर चारपाई पर बैठी रो रही मृत लड़की की माँ से जैसे ही बात करने की शुरुआत की, वर्दी पर बिना नेमप्लेट लगाए एक महिला पुलिसकर्मी उनका हाथ पकड़कर कुछ भी न बोलने के निर्देश देने लगीं.

हमारे साथ मौजूद कैमरामैन को पीछे से बिना नेमप्लेट लगाए एक पुलिस अधिकारी बातचीत रिकॉर्ड करने से लगातार मना करते रहे. हालाँकि हमने मृत लड़की की माँ और उनकी भाभी से भी बात की.

उन्नाव में बच्चियों की मौत का रहस्य बरक़रार, घरवाले पुलिस से परेशान - ग्राउंड रिपोर्ट

मृत लड़की की माँ ने बीबीसी को बताया, "तीनों एक साथ हमेशा जाती थीं. हम क्या बताएँ कि क्या हो गया. हमारी लड़कियों के साथ ग़लत काम भी हुआ है. मेरे घर के आदमी, बच्चे सभी को पुलिस वाले उठा ले गए हैं. हमारे घर की पूरी तलाशी ली गई. हर चीज़, काग़ज़-पत्री सब उठा ले गए. घर के लोग कहाँ हैं, हमें कुछ पता नहीं."

मृत लड़की की माँ को सहारा दे रही एक अन्य महिला ने बताया, "सभी आदमी थाने में हैं. घर से सारा सामान पुलिस वाले उठा ले गए हैं. बच्चों की दवाई तक उठा ले गए हैं. पुलिस वालों को लगता है कि बच्चियों ने ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली है, लेकिन वो ऐसा क्यों करेंगी? और आत्महत्या करेंगी, तो उनका दुपट्टों से हाथ कैसे बँधा होता."

बातचीत के दौरान महिला पुलिस अधिकारी लगातार उनसे वहाँ से हटने की और अंदर चलने की अपील करती रहीं.

इस बीच परिवार वालों ने उन्नाव के ज़िलाधिकारी पत्र लिखकर माँग की है कि मामले की जाँच एसआईटी को सौंपी जाए, परिजनों को मुआवज़ा दिया जाए और जिस लड़की का इलाज कानपुर में हो रहा है, उसे दिल्ली के एम्स में शिफ़्ट किया जाए.

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Mystery of the death of the girl child in Unnao, the family is upset to police - Ground report
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X