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My Voice- भारत को किस नज़र से देखते हैं ओमान के लोग?

By Ajay Mohan
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My Voice कॉलम में आज ओमान के मसकट शहर में रह रहे रजनीकांत कुमार सिंह, जो मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं, वनइंडिया के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं। रजनीकांत ने भारत की उस तस्वीर को पेश करने की कोश‍िश की है, जिसे देश के बाहर लोग देखते हैं। चलिये रजनीकांत के शब्दों में देखते हैं कैसी है भारत की वो तस्वीर जो ओमान में लोग देखते हैं-

My voice

ओमान के लोग भारत को बहुत अच्छी नजर से देखते हैं। कहते हैं भारत के लोगों में रचनात्मकता कूट-कूट कर भरी हुई है। लेकिन सबसे ज्यादा दु:ख तब होता है, जब अपने ही देश के लोग, खास कर दक्ष‍िण भारतीय भारत के बारे में बात करते वक्त यूपी-बिहार को बुरा कहते हैं।

कभी-कभी ऐसा लगता है कि लोग यूपी-बिहार के लोगों को गिरी हुई नजर से देखते हैं।

पिछले कुछ वर्षों से भारत में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा तेजी से बढ़ी है। सबसे दु:खद तो यह है कि ऐसी हिंसाओं की चर्चा पूरी द‍ुनिया में होती है और यहां ओमान में जब हम लोग एक जगह चार भारतीय इकठ्ठा होते हैं तो सबसे ज्यादा चर्चा देश की डर्टी पॉलिटिक्स और कानून व्यवस्था की ही करते हैं। कई बार सिर शर्म से झुक जाता है।

दिल्ली में निर्भया कांड में एक लड़की की मौत हुई, अब तक हत्यारों को फांसी नहीं दी गई। कब तक देश की न्यायपालिका धीमी गति से चलती रहेगी।

जहां तक मैने महसूस किया है यहां ओमान में पारदर्श‍िता भारत की तुलना में ज्यादा है। मैं अपने देशवासियों से भी यही उम्मीद करता हूं कि काम जो भी करें, उसमें करप्शन नहीं होना चाहिये।

यहां पर बिजली व्यवस्था को देख, दिल कहता है काश मेरे भारत में भी बिजली की व्यवस्था ऐसी होती। अफसोस वश हमारे देश के तमाम शहर, कस्बे व गांव हैं, जहां बुनियादी स‍ुविधाओं का अभाव है। स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव और तमाम गांवों और कस्बों में गंदगी का ढेर, बहुत ही खराब तस्वीर प्रस्तुत करती है भारत की।

बात अगर पुलिस की करें तो रॉयल ओमान पुलिस की कार्य प्रणाली को देख मैं अचंभ‍ित रह जाता हूं। न जाने इन्हें क्या ख‍िलाया जाता है, कि ये दूध से पानी को अलग कर देते हैं। और उसी को कठघरे में लाकर खड़ा करते हैं, जिसने वाकई में अपराध किया हो।

अंत में मैं एक कविता कहना चाहूंगा-

बेजुबां पत्थर पे लदे हैं करोड़ों के गहने मंदिरो में,

उसी देहलीज पे एक रुपये को तरसते नन्हे हाथों को देखा है।

सजे थे छप्पन भोग और मेवे मूरत के आगे।

बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है।

लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार,

पर बहार एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।

वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हाल के लिए,

घर में उसको 500 रुपये के लिए काम वाली बाई बदलते देखा है।

सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को,

आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है।

जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन,

आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है।

जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी,

आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा।

दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था जिस बेटी को जबरन बाप ने,

आज पीटते उसी शौहर के हाथों सरे राह देखा है।

मारा गया वो पंडित बेमौत सड़क दुर्घटना में यारों,

जिसे खुदको काल सर्प, तारे और हाथ की लकीरो का माहिर लिखते देखा है।

जिस घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों,

आज उसी आँगन में खिंचती दीवार को देखा है।

Disclaimer: माई व्यॉयस में प्रकाशि‍त ये विचार वनइंडिया के नहीं, बल्क‍ि हमारे पाठक के हैं। यदि आप अपनी बात रखना चाहते हैं तो वनइंडिया को लिख भेजें hindi@oneindia.co.in पर। सब्जेक्ट लाइन में My Voice जरूर लिखें। यदि आपको हिंदी टाइपिंग नहीं आती है तो अपना मोबाईल नंबर ई-मेल करें, हम आपको कॉल करके आपके विचार लेकर प्रकाशित करेंगे।

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English summary
In column My Voice, Rajnikant Kumar Singh residing in Oman and a native from Bihar is giving his opinion on how people in Oman see India.
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