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'मेरे भाई जुनूनी थे इसलिए मारे गए'

By Bbc Hindi
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उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हिंसक भीड़ के हाथों मारे गए पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार दादरी में हुए अख़लाक़ हत्याकांड में भी पहले जांच अधिकारी थे. यूपी पुलिस ने उनकी मौत की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है जो दो दिन में अपनी रिपोर्ट देगी.

2015 में हुए इस हत्याकांड के समय सुबोध कुमार जारछा थाने के एसएचओ थे. अख़लाक़ अहमद का गांव इसी थानाक्षेत्र में आता है.

अख़लाक़ के भाई जान मोहम्मद ने बीबीसी को बताया, "सुबोध कुमार ही सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे थे. उन्होंने ही अख़लाक़ और उनके बेटे दानिश ख़ान को अस्पताल पहुंचाया था."

यूपी पुलिस के एडीजी क़ानून व्यवस्था आनंद कुमार के मुताबिक सुबोध कुमार सिंह 28 सितंबर 2019 से 09 नवंबर 2015 तक अखलाक़ लिंचिंग केस के जांच अधिकारी थे, लेकिन इस मामले में चार्जशीट उन्होंने दाख़िल नहीं की थी.

जान मोहम्मद के मुताबिक इस मामले में पहली गिरफ़्तारियां सुबोध कुमार और उनकी टीम ने ही की थी.

आनंद कुमार के मुताबिक बाद में सुबोध कुमार तबादला कर दिया गया था और एक दूसरे अधिकारी ने मामले में चार्जशीट दाख़िल की थी. हालांकि आनंद कुमार ने उनके तबादले की वजह नहीं बतायी.

वहीं सुबोध कुमार के भाई अतुल कुमार ने बीबीसी से कहा, "दादरी हत्याकांड की जांच भी सुबोध ने ही की थी. वो घटना इससे जुड़ी है या नहीं ये जांच का विषय हो सकता है."

सुबोध कुमार के शव को उनके पैतृक ज़िले एटा ले जाया गया है जहां उनका अंतिम संस्कार होगा. इससे पहले मंगलवार सुबह यूपी पुलिस ने उन्हें सलामी दी.

अपने भाई को याद करते हुए अतुल कुमार ने बीबीसी से कहा, "वो बहुत जुनूनी पुलिस अधिकारी थे. हम अक्सर उन्हें समझाया करते थे कि जैसे सब नौकरी करते हैं वैसे ही तुम भी करो लेकिन वो मौके पर पहुंच जाता था. इसी ने उसकी जान ले ली."

उन्होंने कहा, "वो अपने साथी पुलिसवालों से भी बहुत प्रेम करता था. त्यौहार के समय बाक़ी साथियों को छुट्टी पर भेजकर कह देता था कि मैं ड्यूटी संभाल लूंगा. हमें इस बात का अफ़सोस है कि उसे अकेले छोड़ दिया गया."

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुबोध कुमार की मौत की वजह सर में गोली लगना बताया गया है.

https://youtu.be/G4TmHng3ARc

अतुल कुमार का आरोप है कि जब वो मौके पर स्थिति से जूझ रहे थे तब उनकी मदद के लिए पुलिस बल नहीं भेजा गया. वो कहते हैं, "ये एक बड़ी साज़िश थी. कौन साज़िश कर रहा है ये जांच का विषय हो सकता है लेकिन हमारा तो भाई चला गया."

"मेरे भाई ने वहां दंगा रोकने की कोशिश की. क्योंकि वहां मुसलमानों का भी एक बहुत बड़ा कार्यक्रम चल रहा था और हिंदू-मुस्लिम दंगा तक हो सकता था. लेकिन उसने ये कोशिश अकेले ही कर दी और इसी की क़ीमत उसे जान देकर चुकानी पड़ी."

सुबोध कुमार के परिवार का ये भी आरोप है कि उन्हें मौके पर अकेला छोड़ दिया गया था और ज़रूरी बैक-अप फ़ोर्स नहीं भेजी गई. सुबोध कुमार के परिवार का आरोप है कि उन्हें मौके पर अकेला छोड़ दिया गया था.

यूपी पुलिस के डीजी क़ानून व्यवस्था आनंद कुमार ने इन आरोपों पर बीबीसी से कहा, "पूरी घटना की एसआईटी जांच करायी जा रही है, यदि किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी की लापरवाही सामने आई तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी."

सुबोध कुमार के परिवार का ये भी आरोप है कि उन्हें पूरे सम्मान के साथ अंतिम सलामी नहीं दी गई और सरकार की ओर से भी किसी ने परिवार के प्रति सांत्वना व्यक्त नहीं की.

इस आरोप पर आनंद कुमार कहते हैं, "हमने अपने दिवंगत सहकर्मी को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी है और जो भी प्रोटोकॉल है उसका पालन किया गया है."

अतुल कुमार ने कहा, "जिस सरकार की इज़्ज़त बचाने के लिए मेरे भाई ने अपनी जान दे दी उस सरकार के किसी प्रतिनिधि ने हमारे प्रति सांत्वना तक व्यक्त नहीं की है. सबसे अफ़सोस की बात ये है कि एक बीजेपी विधायक ने बयान देकर ये तक कह दिया कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई. ये विडंबना है. "

https://www.facebook.com/BBCnewsHindi/videos/357178275029891/

यूपी पुलिस ने सुबोध कुमार को श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा है, "क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुबोध कुमार ने अपनी जान दे दी. हमने अपना एक क़ाबिल अधिकारी खो दिया जो हमेशा हमारे दिलों में ज़िंदा रहेगा. उनके परिवार के प्रति हमारी संवेदनाएं."

अपने भाई को याद करते हुए अतुल कहते हैं, "वो बहादुर था और उसे भरोसा था कि वो भीड़ को समझा लेगा. इसलिए ही मौके पर डटा रहा. अब सिंहम कहो, शूटर कहो या स्पेशलिस्ट कहो, सब करता तो देश और सरकार के लिए ही था."

सुबोध कुमार 1998 में पुलिस में शामिल हुए थे और मूलरूप से एटा के तरगाना गांव के रहने वाले थे. अपने करियर में अधिकतर समय वो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ज़िलों में ही तैनात रहे थे.

सुबोध कुमार के दो बेटे हैं जिनमें से एक ने इंजीनियरिंग की पढ़ायी की है जबकि दूसरा इस साल बारहवीं का इम्तेहान देगा.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुबोध कुमार की पत्नी को चालीस लाख रुपए की मदद और मां-बाप को दस लाख रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है.

BBC Hindi
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English summary
My brothers were obsessive therefore they were killed
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