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जानिए 'फांसी' की सजा सुनाने के बाद जज क्यों तोड़ देते हैं पेन की Nib, क्या है नियम?

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नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप के दोषियों को फांसी देने की तैयारी शुरू हो चुकी है, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि 16 दिसंबर को सभी को फांसी दी जा सकती है, जिस जगह पर फांसी देनी है, वहां साफ़-सफाई का काम भी शुरू हो गया है,टाइम्स की खबर के मुताबिक जेल ने डमी फांसी का ट्रायल किया है, आपको बता दें कि हर फांसी के पहले ट्रायल होता है।

    फांसी देने से पहले कैदी के कान में क्या कहता है जल्लाद ?, जानकर चौंक जाएंगे | वनइंडिया हिंदी

    दरअसल फांसी देने के कुछ नियम होते हैं, चलिए जानते हैं उन नियमों को विस्तार से

    पेन की निब तोड़ देता है जज

    पेन की निब तोड़ देता है जज

    • जब जज किसी भी व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाता है तो वो फैसला सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ देता है, जिसका मतलब ये होता है कि अब उस व्यक्ति का जीवन समाप्त हो गया है।
    • फांसी के लिए हमेशा सुबह (भोर) यानी कि सूर्योदय से पहले का वक्त तय किया जाता है, जिससे कि फांसी की वजह से अन्य कैदियों के काम पर कोई फर्क ना पड़े।
    • इसके पीछे वजह ये भी होती है कि सुबह (भोर) में जेल के कैदी को फांसी देने के बाद परिवार वालों को शव सौंप दिया जाए जिससे कि अंतिम संस्कार निर्धारित वक्त पर हो पाए।

    यह पढ़ें: Nirbhaya Gang Rape Case: दोषियों को सजा देने की तैयारी, तिहाड़ जेल में हुआ फांसी का ट्रायल

    कैदी की अंतिम इच्छा पूछते हैं...

    कैदी की अंतिम इच्छा पूछते हैं...

    • फांसी देने से पहले कैदी को नहलाया जाता है और नए कपड़े पहनाए जाते हैं, जिसके बाद उसे फांसी के फंदे तक लाया जाता है।
    • फांसी देने वाले स्थान पर जेल अधीक्षक, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, जल्लाद और डॉक्टर मौजूद रहते हैं, इनके बिना फांसी नहीं दी जाती है।
    • फांसी देने से पहले कैदी की अंतिम इच्छा पूछी जाती है।
    • फांसी देने से पहले जल्लाद कैदी के कान में जाकर कहता है कि हिंदूओं को राम राम और मुस्लिमों को सलाम, मैं अपने फर्ज के आगे मजबूर हूं।
    • इसके बाद कैदी का मुंह काले कपड़े से ढंक दिया जाता है और जल्लाद चबूतरे से जुड़ा लीवर खींच देता हैं।
    • कैदी को 10 मिनट के लिए फांसी के तख्ते पर लटकाया जाता है और उसके बाद डॉक्टर चेक करके बताता है कि कैदी जिंदा है या मृत।
    फांसी को लेकर सु्प्रीम कोर्ट के भी कुछ नियम हैं...

    फांसी को लेकर सु्प्रीम कोर्ट के भी कुछ नियम हैं...

    • जिस कैदी को फांसी की सजा दी गई है, कोर्ट के मुताबिक उसके घरवालों को करीब 15 दिन पहले व्यक्ति की फांसी के बारे में सूचना भेजनी जरूरी है, जिससे कि वो कैदी से आकर मिल सकें।
    • फांसी के फंदे की मोटाई और लंबाई भी तय की गई है,ये डेढ़ ईंच से ज्यादा मोटी होनी चाहिए।
    • फांसी-घर किसी भी सेंट्रल जेल के अंदर एक अलग कोने में ही बनाया जाता है, ताकि वो रोजमर्रा की जिंदगी में आम कैदियों की नजर में न आए।
    • फांसी घर में एक सीमेंटेड कुंआ होता है, कुएं में उतरने के लिए तीन से चार सीढ़ियां होती हैं, गोलाई में बने कुएं के अंदर एक से डेढ़ मीटर ही जगह होती है।
    • कुएं के ऊपर गोलाकार रुप में काठ (लकड़ी) का तख्ता ढका होता है।

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    English summary
    Judge passes a death sentence, he breaks the nib of his pen,to express his compulsions for passing death sentence, under the compelling circumstances and to ensure that nobody ever commits such heinous offense which invites such social stigma to the offender.
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