बाबरी मस्जिद-राम-मंदिर विवाद पर मुस्लिम लॉ बोर्ड का बड़ा बयान
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का और भाजपा ने स्वागत किया है, तो वहीं इस मामले के एक पक्षकार बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी इससे सहमत नहीं है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के राम-मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने के विवाद पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि बोर्ड कोर्ट से बाहर समझौते के लिए तैयार है। बोर्ड के मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने ये बात कही है। इससे पहले मुस्लिम पक्ष समझौते की बात के मानने से इंकार कर रहे थे।उन्होंने कहा कि देश के संविधान और कानून के दायरे में अयोध्या में मंदिर बने या मस्जिद, उन्हें मंजूर होगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा कहा है सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन्हें कुबूल होगा, चाहे वो किसी भी पक्ष में रहे।

सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का और भाजपा ने स्वागत किया है, वहीं इस मामले के एक पक्षकार बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी इससे सहमत नहीं है। अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर मंगलवार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि ये मुद्दा बेहद संवेदनशील है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे का हल आपसी सहमति से हो। अगर जरुरत पड़ी तो कोर्ट मध्यस्थता के लिए तैयार है।
योगी और स्वामी ने कहा कोर्ट का सुझाव स्वागत-योग्य
राम मंदिर मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोनों ही पक्षों को बैठकर बातचीत से इसका हल निकालना चाहिए। यूपी सरकार इस मामले में सभी जरूरी सहयोग करने के लिए तैयार है। भाजपा के दूसरे नेता भी मामले को समझौते से हल करने की बात कह रहे हैं। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने मुस्लिम पक्ष के समझौते के लिए तैैयार ना होने पर ससंद से कानून बना कर राम मंदिर बना लेने की बात कही है।
आपको बता दें कि सितंबर 2010 मेंइलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच ने अपने फैसले में कि अयोध्या के विवादित जगह को तीन भागों में बांट देने का फैसला दिया था, जिसके खिलाफ तीनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट आ गए थे। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है।












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