मुर्शिदाबाद में आज से शुरू होगा बाबरी जैसी मस्जिद का निर्माण, हुमायूं कबीर के ऐलान के बाद मचा बवाल
Murshidabad mosque construction: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में 11 फरवरी को बाबरी मस्जिद जैसी संरचना के निर्माण की घोषणा ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के प्रमुख और पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर के इस ऐलान के बाद बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप तेज़ हो गए हैं।
हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि 11 फरवरी को दोपहर 12 बजे मस्जिद निर्माण का औपचारिक शुभारंभ होगा। इससे पहले सुबह 10 बजे से लगभग 1000 से 1200 मौलाना, मुफ़्ती और धर्मगुरु पवित्र क़ुरान की तिलावत करेंगे। कबीर का कहना है कि इस कार्यक्रम में किसी भी राजनीतिक वीआईपी को आमंत्रित नहीं किया गया है, बल्कि केवल क़ुरान के हाफ़िज़ और इस्लामी विद्वान ही शामिल होंगे।

दो साल में निर्माण का लक्ष्य, ₹300 करोड़ की लागत का अनुमान
कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 12:30 से 1 बजे के बीच निर्माण कार्य की विधिवत शुरुआत होगी। कबीर ने दावा किया है कि इस अवसर पर हज़ारों लोग जुटेंगे।
मस्जिद को दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर लगभग ₹300 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। हालांकि अब तक केवल ₹6 करोड़ का चंदा ही जुट पाया है, जिससे परियोजना की फंडिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कबीर बोले- तकनीकी देरी के बाद अब सभी औपचारिकताएं पूरी
पीटीआई के मुताबिक, हुमायूं कबीर ने बताया कि 6 दिसंबर 2025 को बोर्ड लगने के बावजूद तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण निर्माण कार्य में देरी हुई। अब सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और बुधवार से काम शुरू होगा।
पहले परियोजना को तीन साल में पूरा करने की योजना थी, लेकिन निर्माण कंपनी से हुए समझौते के बाद इसे दो साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। यह परियोजना नदिया के पलासी स्मारक से लेकर फरक्का और इटाहर तक लगभग 235 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करने का दावा करती है।
राजनीतिक साज़िश का लगाया आरोप
हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद मुद्दे को लेकर अपने खिलाफ राजनीतिक साज़िश रचे जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार उन पर दबाव बना रही है और उन्हें रोकने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया जा रहा है। कबीर का कहना है कि जो लोग उन्हें हटाने के लिए एकजुट हुए थे, वे अब अपने फैसले पर पछता रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 28 फरवरी को चुनाव घोषणा के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है।
सीएम योगी ने दी ये चेतावनी
इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 फरवरी को बाराबंकी में कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "जो लोग बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण का सपना देख रहे हैं, उनका यह सपना क़यामत तक भी पूरा नहीं होगा।" सीएम योगी ने अपने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा, "हमने कहा था कि रामलला हम आएंगे और मंदिर वहीं बनाएंगे, और मंदिर वहीं बन गया है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि कानून तोड़ने वालों को "जन्नत नहीं, बल्कि जहन्नुम का रास्ता मिलेगा।"
मौलाना के बयान से विवाद और गहराया
विवाद उस समय और बढ़ गया जब उत्तर प्रदेश के मौलाना जर्ज़िश अंसारी ने दावा किया कि अयोध्या में जिस स्थान पर राम मंदिर बना है, वहां "क़यामत तक बाबरी मस्जिद ही रहेगी" और वे उस स्थान पर मंदिर को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। इस बयान के बाद दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद शांत नहीं हुआ विवाद
गौरतलब है कि बाबरी मस्जिद विवाद एक सदी से अधिक पुराना रहा है। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ़ किया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि देने का आदेश भी दिया गया था।
इसके बावजूद यह मुद्दा पूरी तरह शांत नहीं हो पाया है।
हिंदुत्व संगठनों का विरोध, पुलिस अलर्ट पर
हुमायूं कबीर की घोषणा के बाद हिंदुत्व संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के कार्यकर्ताओं ने मुर्शिदाबाद तक मार्च का ऐलान करते हुए चेतावनी दी है कि वे किसी भी कीमत पर मस्जिद निर्माण नहीं होने देंगे।
लखनऊ में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोका और बाबरी ढांचे को फिर से गिराने की धमकी वाले पोस्टर भी हटाए गए।
बंगाल पुलिस सतर्क, कानून-व्यवस्था पर कड़ी निगरानी
मुर्शिदाबाद में संभावित तनाव को देखते हुए बंगाल पुलिस पूरी तरह सतर्क है। सूत्रों के अनुसार, किसी भी विरोध प्रदर्शन या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जिससे प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई हैं।
परिवार से जुड़ा विवाद और फंडिंग पर सवाल
इसी बीच हुमायूं कबीर के परिवार से जुड़ा एक नया विवाद भी सामने आया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने उनकी बेटी नजमा सुल्ताना के ससुर शरीफुल इस्लाम की लगभग ₹10 करोड़ की संपत्तियां ज़ब्त की हैं। पुलिस का आरोप है कि शरीफुल इस्लाम मादक द्रव्य तस्करी के मामले से जुड़े हो सकते हैं।
हालांकि कबीर और उनके परिवार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है, लेकिन विपक्ष लगातार मस्जिद निर्माण के लिए आने वाले फंड के स्रोत पर सवाल उठा रहा है।
राजनीतिक रणनीति या धार्मिक मुद्दा?
हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे 2007 से 2012 तक कांग्रेस में रहे, फिर टीएमसी में शामिल होकर मंत्री बने और अब जनता उन्नयन पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बाबरी मस्जिद जैसी संरचना के निर्माण की घोषणा मुस्लिम वोट बैंक को साधने की रणनीति हो सकती है।
मुर्शिदाबाद में मस्जिद निर्माण की शुरुआत के साथ ही यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील स्थिति को कैसे संभालता है। वहीं, राजनीतिक दलों के बीच बयानबाज़ी के और तेज़ होने की संभावना है, जिससे राज्य और देश की राजनीति में आने वाले दिनों में और गर्माहट बनी रह सकती है।












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