मुंबई एयरपोर्ट घोटाला: CBI के बाद अब जीवीके ग्रुप पर ईडी का शिकंजा, दर्ज हुआ मनी लॉन्ड्रिंग का केस

मुंबई। मुंबई हवाई अड्डे के विकास में 800 करोड़ रुपए से अधिक की अनियमितताओं के मामले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जीवीके ग्रुप पर शिकंजा कस दिया है। मंगलवार को ईडी ने जीवीके ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. जीवीके रेड्डी और उनके बेटे जीवी संजय रेड्डी सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। मिली जानकारी के मुताबिक पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की रोकथाम) के तहत ईडी की जांच 27 जून को दर्ज सीबीआई की एफआईआर पर आधारित है।

Mumbai Airport scam ED filed money laundering cases on GVK group

बता दें कि सीबीआई की एफआईआर में जीवीके रेड्डी, जीवी संजय रेड्डी समेत 13 लोगों के नाम के साथ एमआईएएल (मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड) समेत और कई कंपनियों के नाम शामिल किए गए हैं। इन सभी को एयरपोर्ट पर ठेका दिया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय की एंटी मनी लॉन्ड्रिंग जांच एजेंसी ठेके से जुड़ी कंपनियों के खाते की जांच करेगी और लॉन्ड्रिंग का पता लगाने के लिए फंड ट्रांसफर भी किया जा सकता है। ऐसी भी खबरें हैं कि जांच के दौरान आरोपियों की संपत्ति भी अटैच की जा सकती है।

पिछले हफ्ते जारी एक बयान में एमआईएएल प्रवक्ता ने कहा, ' मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए केस से कंपनी हैरान है। उन्होंने आगे कहा, सीबीआई की जांच में एमआईएएल पूरी तरह सहयोग करेगी क्योंकि हम एक पारदर्शी और जिम्मेदार कॉर्पोरेट इकाई हैं। प्रवक्ता ने कहा, मामले की सच्चाई की जांच करने के लिए अपनी जांच में एजेंसी के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि ईडी की कार्रवाई के बाद मंगलवार को जीवीके के एक प्रवक्ता ने कहा,हमें प्रवर्तन निदेशालय से कोई सूचना नहीं मिली है।

बता दें कि CBI द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में कहा गया है कि मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिडेट कंपनी( MIAL) का गठन जीवीके एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड और एयरपोर्ट अथॉरिटी इंडिया ने कुछ विदेशी संस्थाओं के साथ मिलकर किया , जिसमें 50.5 फीसदी की हिस्सेदारी जीवीके के पास है, वहीं एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास 26 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। कंपनी के निदेशक जीवीके रेड्डी है और जीवी संजय रेड्डी इस कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं। कंपनी पर आरोप लगा है कि आरोपियों ने मिलकर 9 और निजी कंपनियों के साथ कॉनट्रैक्ट किया और 310 करोड़ रुपए का गबन किया। इसके साथ ही CBI ने साल 2017-18 के बीच मुंबई हवाई अड्डे के चारों ओर 200 एकड़ की अविकसित जमीन पर अचल संपत्ति के विकास को लेकर भी सवाल किए हैं।

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