कश्मीर में 26/11 दोहराने की साजिश नाकाम, कहीं आतंकी कसाब का बदला तो नहीं?
जम्मू-कश्मीर में मुंबई 26/11 की घटना दोहराने से पहले ही पुलिस ने साजिश को फेल कर दी। जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकी फारूक अहमद वानी बारामुला को गिरफ्तार किया है।

J&K Terror Attack: आतंकी संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में मुंबई 26/11 की घटना दोहराने से पहले ही पुलिस ने साजिश को नाकाम कर दिया है। जम्मू कश्मीर पुलिस ने खुफिया एजेंसी की मदद से जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकी फारूक अहमद वानी बारामुला को गिरफ्तार किया है।
पूछताछ में आतंकी ने बताया कि श्रीनगर में आयोजित हो रहे जी-20 सम्मेलन को असफल बनाने के लिए आतंकी संगठनों ने अपनी खुराफात शुरु कर दी है। उसने यह भी बताया कि जी-20 सम्मेलन को फेल करने के लिए कई आतंकी जगह-जगह विस्फोट करने की योजना है। इसी कड़ी में बारामूला के करहामा कुंजर इलाके में सुरक्षाबलों ने एक आतंकवादी मार गिराया। मारे गए आतंकवादी की पहचान यारहोल बाबापोरा कुलगाम निवासी आबिद वानी के रूप में हुई। यह आतंकवादी संगठन लश्कर से जुड़ा हुआ है।
खास बात यह है कि आतंकी संगठनों ने भारत के इतिहास के उस काले पन्नें को दोबारा दोहराने की साजिश रची, जिसमें 12 साल पहले यानी 2008 में मुंबई लगभग 60 घंटों तक गोलियों की तड़तड़ाहट और बम विस्फोटों से पट गई थी। करीब 164 लोगों का खून बहा और 300 से ज्यादा जख्मी हुए। हालांकि, एक-एक कर 10 आतंकियों में से 9 को भारतीय जवानों ने ढेर किया था। लेकिन, इनमें से एक आतंकी अजमल कसाब को आज के ही दिन यानी 6 मई 2010 को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
क्या था वो काला दिन?
बात साल 2011 की 26 नवंबर की है। कराची के रास्ते नाव से घुसे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने हमला किया था। मुंबई की अलग-अलग जगहों को हमलावरों ने टारगेट किया। शुरुआत लियोपोल्ड कैफे और शिवाजी छत्रपति टर्मिनस से हुई थी। लेकिन, आतंकियों ने ताज होटल, होटल ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर भी धावा बोल दिया। आंतकियों ने मुंबई शहर पर कब्जा कर मौत का तांडव शुरु कर दिया। जगह-जगह गोलियां और बम विस्फोट। करीब 164 से ज्यादा लोग मारे गए, जबकि 300 से भी ज्यादा घायल हुए। आंतकियों से लोहा मनवाते हुए 10 से ज्यादा जवान शहीद हुए।
हालांकि, 9 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया। इनमें से एक अजमल कसाब(पाकिस्तान निवासी) को गिरफ्तार किया गया। जिसे आज ही के दिन 2010 में फांसी की सजा सुनाई गई। 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवडा जेल में सुबह कसाब को फांसी दी गई। आशंका है कि कहीं यह कसाब का बदला तो नहीं है?
जी-20 सम्मेलन में कई हस्तियों थी निशाने पर
आतंकियों का मकसद था, जी-20 सम्मेलन में शामिल होने वाली हस्तियों को टारगेट करना है। ठीक, उसी तरह जिस तरह 26 नवंबर, 2011 को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने मुंबई में किया था। पुलिस ने आतंकी संगठनों के मंसूबे नाकाम कर दिए हैं। फारूक अहमद की गिरफ्तारी से आतंकी संगठनों का राजफाश भी हो चुका है। ऐसा लगता है, कसाब का बदला तो नहीं है।
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