जानिये 15 साल पुराना वो मामला, जिसमें मुख्तार अंसारी को सुनाई गई 10 साल की सजा
Mukhtar Ansari Afzal Ansari: मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी के गैंगस्टर मामले में आज कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को 10 साल और अफजाल को 4 साल की सजा सुनाई है।

Mukhtar Ansari case verdict: माफिया डॉन मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी के लिए आज का दिन बहुत ही अहम है। कोर्ट ने आज 15 साल पुराने गैंगस्टर मामले पर फैसला सुनाया।
बताते चलें कि गाजीपुर एमपी एमएलए कोर्ट ने जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को गैंगस्टर मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल कैद और 5 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में BSP सांसद अफजाल अंसारी भी दोषी करार करते हुए कोर्ट ने 4 साल की सजा और 1 लाख का जुर्माना तय किया है।
आज आया कोर्ट का फैसला
आज यानी 29 अप्रैल को गैंगस्टर एक्टर में गाजीपुर के MP-MLA कोर्ट में मुख्तार और अफजाल दोनों ही भाईयों को लेकर फैसला सुनाया जाएगा। आज के फैसले को लेकर अफजाल की सांसदी पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। बताते चलें कि अगर आज सांसद अफजाल को दो साल से ज्यादा की सजा होती है, तो उनकी संसद सदस्यता भी जा सकती है।
2007 में दर्ज हुआ मुकदमा
साल 2007 में 22 नवंबर के दिन मुहम्दाबाद पुलिस ने भांवरकोल और वाराणसी के मामले को गैंग चार्ट में सांसद अफजाल अंसारी और मुख्तार अंसारी को शामल करते हुए गिरोह बंद अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करवाया था। आइये जानते हैं क्या था 15 साल पुराना वो मामला, जिसके फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
विधायक पर चली थीं ताबड़तोड़ गोलियां
बात है 29 नवंबर साल 2005 की, जब भाजपा के विधायक कृष्णानंद राय समेत 7 लोगों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था। मुख्तार और अफजाल अंसारी के गुर्गों ने कृष्णानंद राय पर 400 राउंड ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। इसमें विधायक समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला था कि विधायक के शरीर पर 21 गोलियां लगीं।
थर्रा उठा था गाजीपुर
इस खौफनाक घटना से पूरा गाजीपुर थर्रा उठा था। बताते चलें कि चुनाव में शिकस्त सहन ना हो सकने के बाद मुख्तार अंसारी ने विधायक को मौत के घाट उतारकर अपना बदला लिया। सियासत की इस खौफनाक लड़ाई की दास्तां आज तक लोगों की जुबां पर चढ़ी हुई है।
एक और भयानक हत्याकांड
एक और घटना 1997 को घटी थी, जिसमें कोयला व्यापारी और VHP कोषाध्यक्ष नंदकिशोर रूंगटा को उनके ही घर से किडनैप कर लिया गया था। रूंगटा के परिवार से उस वक्त 5 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की गई थी। परिवार ने 1.5 करोड़ रुपये की राशि दे दी। लेकिन बावजूद इसके व्यापारी की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड का पूरा आरोप मुख्तार अंसारी पर लगा था।












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