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ये वही मुकेश सिंह है, जिसने कहा था बलात्कार के लिए पुरुषों से ज्यादा जिम्मेदार महिलाएं होती हैं?

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बेंगलुरू। निर्भया गैंगरेप केस में फांसी की तख्त पर लटकाए जाने की तिथि में अब महज 12 दिन शेष हैं, लेकिन निर्भया के साथ गैंगरेप और मर्डर को अंजाम देने वाले चारो दोषी फांसी को लटकाने के लिए अब भी हाथ-पांव मारने के बाज नहीं आ रहे हैं। फिलहाल, सभी चार दोषियों के कानूनी विकल्प फिलहाल समाप्त हो चुके है।

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लेकिन निर्भया की हत्यारे और महिलाओं के बारे में छोटी सोच रखने वाले शातिर दोषी मुकेश सिंह ने फांसी को टालने का एक और तिकड़म निकालते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दिया। याचिका में उसने अपने उन कानूनी उपाय बहाल करने का अनुरोध किया है, जिसके जरिए वह जुलाई, 2021 तक फांसी टालने में सफल हो सकता है।

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दोषी मुकेश सिंह का आरोप है कि उसके वकील मनोहर लाल शर्मा ने उसे गुमराह किया था। वकील के माध्यम से दायर याचिका में मुकेश सिंह ने आरोप लगाया है कि केन्द्र , दिल्ली सरकार और न्याय मित्र की भूमिका निभाने वाली अधिवक्ता वृन्दा ग्रोवर ने उसके साथ 'आपराधिक साजिश' रची और 'छल' किया है, जिसकी सीबीआई से जांच करायी जानी चाहिए।

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दोषी मुकेश सिंह की नई याचिका में दावा किया गया है कि पुनर्विचार याचिका खारिज होने की तारीख से तीन साल के भीतर सुधारात्मक याचिका दायर की जा सकती है और इसलिए उसे उपलब्ध कानूनी उपाय बहाल किये जायें तथा जुलाई, 2021 तक उसे सुधारात्मक याचिका और दया याचिका दायर करने की अनुमति दी जाए।

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गौरतलब है पिछले 7 वर्षों से इंसाफ की बाट जोह रही निर्भया गैंगरेप पीड़िता के मां-बाप बेटी के इंसाफ के लिए चारो दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने का इंतजार कर रही हैं, लेकिन फांसी की सजा के आदेश के ढाई साल भी अभी चारो अपराधी कानूनी प्रक्रिया की आड़ में लगातार फांस को टालते आ रहे हैं।

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मददगार दिल्ली सरकार के संशोधित जेल मैनुअल और प्रदत्त कानूनी प्रक्रिया के जरिए लगातार तीन डेथ वारेंट को कैंसिल कराने में सफल रहे चारो दोषियों के अब फांसी से बचने के लिए सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो गए हैं। यही कारण है कि शातिर दोषी मुकेश सिंह ने यह नया तिकड़म इस्तेमाल किया है।

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चारों को फांसी पर लटकाने के लिए जारी हुआ पिछला यानी तीसरा डेथ वारेंट दोषी पवन गुप्ता की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबति होने की वजह से कैंसिल हो गया था, लेकिन जब राष्ट्रपति ने पवन गुप्ता की भी दया याचिका का खारिज कर दिया तो लगा था कि अब चारो दोषियों के लिए जारी किया चौथा डेथ वारेंट, जो कि 20 मार्च के लिए जारी हुआ है, उसको चुनौती नहीं दी जा सकेगी।

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लेकिन दोषी मुकेश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर कर फांसी को लटकाने के लिए एक नया शिगूफा छेड़ दिया है और इस बार वह फांसी को जुलाई, 2021 तक खींचना चाहता है। वहीं, निर्भया गैंगरेप एंड मर्डर के चारो दोषियों का केस लड़ रहे वकील एपी सिंह की मानें तो उनके पास फांसी को टलवाने के अभी भी कई विकल्प मौजूद हैं।

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इससे पहले भी गत 17 फरवरी को जब निर्भया के चारों दोषियों के डेथ वारंट जारी हुआ था तब एपी सिंह ने कहा था 'लिख लीजिए 3 मार्च को फांसी नहीं होगी' और फिर ऐसा ही हुआ। गत 2 मार्च को सुनवाई के दौरान चारो दोषियों की फांसी एक बार टल गई और फिर गत गुरूवार को चौथी बार पटियाला हाउस कोर्ट ने 20 मार्च, सुबह 5: 30 बजे चारों को फांसी पर चढ़ाने के लिए डेथ वारंट जारी किया है।

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एक के बाद एक लगातार कई महीने से फांसी की तारीख टलवाते आ रहे वकील एपी सिंह का कहना था कि उनके पास जो भी विकल्प बचे हैं उन कानूनी विकल्पों का वह समय आने पर इस्तेमाल करेंगे। माना जा रहा है कि दोषी मुकेश सिंह द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई नई याचिका उन विकल्पों में से एक हो सकती है।

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उल्लेखनीय है दक्षिण दिल्ली में गत 16-17 दिसंबर, 2012 की रात चलती बस में कुल 6 अपराधियों ने दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार किया था और उसके बाद बुरी तरह जख्मी हालत में उसे सड़क के किनारे फेंक दिया था। निर्भया की बाद में 29 दिसंबर, 2019 को सिंगापुर के अस्पताल में मृत्यु हो गई थी।

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इस मामले केवल चार दोषियों पर ही मुकदमा चला, जिनके नाम क्रमशः मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा। चूंकि मुकदमे के ट्रायल के दौरान ही एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी जबकि नाबालिग छठे आरोपी को तीन साल सुधार गृह में रखने के बाद वर्ष 2015 में रिहा कर दिया गया।

2021 तक फांसी टालना चाहता है निर्भया का हत्यारा मुकेश सिंह, दायर की नई याचिका!

मुकेश ने कहा कि तिहाड़ जेल में उसका यौन उत्पीड़न हुआ?

मुकेश ने कहा कि तिहाड़ जेल में उसका यौन उत्पीड़न हुआ?

शातिर अपराधी और निर्भया गैंगरेप और मर्डर का दोषी मुकेश से फांसी की सजा को लटकाने के लिए दावा किया था कि तिहाड़ जेल में उसका यौन उत्पीड़न किया गया और मामले के दूसरे दोषी अक्षय के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसे मजबूर किया गया। मुकेश ने अपने अजीबो-गरीब दावे में कहा है कि तिहाड़ जेल कैंपस में उसका यौन उत्पीड़न हुआ। मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति भवन से खारिज हो चुकी है।

मेरे भाई राम सिंह ने सुसाइड नहीं किया, उसकी हत्या हुई?

मेरे भाई राम सिंह ने सुसाइड नहीं किया, उसकी हत्या हुई?

दोषी मुकेश सिंह ने निर्भया केस के पांचवे आरोपी और भाई राम सिंह की सुसाइड को मर्डर का दावा करके सबको चौंका दिया था। सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दया याचिका के खिलाफ सुनवाई में हाजिर हुईं दोषी मुकेश सिंह की वकील अंजना प्रकाश ने दावा किया कि मामले में एक आरोपी की जेल में हत्या कर दी गई थी। कोर्ट में मुकेश की याचिका पढ़ते हुए उन्होंने बताया, 'मुकेश की दलील है कि आरोपियों में से एक की आत्महत्या वास्तव में एक हत्या थी लेकिन 'वर्षों तक यह बात छिपी रही।

बलात्कार के लिए पुरुषों से ज्यादा जिम्मेदार महिलाएं होती हैं?

बलात्कार के लिए पुरुषों से ज्यादा जिम्मेदार महिलाएं होती हैं?

एक बयान में मुकेश सिंह ने महिलाओं के बारे में अपनी छोटी और सतही सोच का परिचय देते हुए कहा था,‘शालीन महिलाओं को रात में नौ बजे के बाद घर से बाहर नहीं घूमना चाहिए। दुष्कर्म के लिए लड़की हमेशा लड़के से ज्यादा जिम्मेदार होती है, लड़का और लड़की बराबर नहीं हैं। लड़की को घर का काम करना चाहिए, न कि रात को डिस्को या बार में जाकर गलत काम करने और खराब कपड़े पहनने चाहिए'

दुष्कर्म के वक्त निर्भया को विरोध नहीं करना चाहिए था?

दुष्कर्म के वक्त निर्भया को विरोध नहीं करना चाहिए था?

‘निर्भया' के साथ गैंगरेप और मर्डर का दोषी मुकेश ने उसी इंटरव्यू मे कहा था कि दुष्कर्म के वक्त उसे (निर्भया को) विरोध नहीं करना चाहिए था बल्कि उसे चुपचाप दुष्कर्म होने देना चाहिए था। अगर ऐसा होता तो हम उसे बिना कोई नुकसान पहुंचाए छोड़ देते, और सिर्फ उसके दोस्त की पिटाई की जाती। मुकेश सिंह की सतही सोच और महिलाओं के प्रति उसकी रूढ़िवादिता का परिणाम ही कहेंगे कि गत 16 दिसंबर, 2012 की रात मुकेश सिंह वह दरिंदा था, जिसने गैंगरेप की वारदात के बाद निर्भया को अधमरा किया था, जिससे पीड़िता 13 दिन इलाज के बाद बचाई नहीं जा सकी।

23 मार्च को है अलग अलग फांसी देने पर सुनवाई?

23 मार्च को है अलग अलग फांसी देने पर सुनवाई?

निर्भया के दोषियों को अलग अलग फांसी देने की केंद्र की मांग पर सुप्रीम कोर्ट 23 मार्च को अगली सुनवाई करेगा। गृह मंत्रालय ने तिहाड़ जेल की गाइडलाइन में बदलाव को लेकर याचिका दायर की है। विडम्बना यह है कि 20 मार्च को जारी चौथे डेथ वारेंट के हिसाब से चारों को फांसी पर लटकाया जाना है, फिर सुनवाई का क्या औचित्य बचेगा। इसलिए यह सवाल गहरा गया है कि क्या 20 मार्च को भी चारो को हो पाएगी फांसी।

निर्भया के चारो दोषियों को मिली है अभी 14 दिनों की मोहलत!

निर्भया के चारो दोषियों को मिली है अभी 14 दिनों की मोहलत!

निर्भया के गुनहगार पवन ने अपने आखिरी कानूनी विकल्प को अपनाते हुए दया याचिका दाखिल की थी। इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दया याचिका खारिज कर दी थी। इस दया याचिका खारिज होने के बाद कोर्ट ने चौथा डेथ वॉरंट जारी कर दिया। नियमों के अनुसार, दया याचिका खारिज होने के बाद भी दोषी को फांसी पर लटकाने से पहले 14 दिन का वक्त मिलता है. इस वजह से फांसी की तारीख 20 मार्च तय की गई है।

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English summary
Mukesh Singh, the killer of Nirbhaya who has small and superficial thinking about women, has filed a petition in the Supreme Court on Friday, taking out another trick to avoid hanging. In the petition, he has requested to restore his legal remedies, through which he can succeed in postponing the execution till July 2021.
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