MP Election 2023: बीजेपी के बुजुर्ग नेताओं के लिए खुशखबरी, बदल गई पार्टी की पॉलिसी?
मध्य प्रदेश में सत्ता में कायम रहने के लिए बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंकी हुई है। पार्टी ने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों पर तो दांव लगाया ही है, बुजुर्गो में फिर से विश्वास जताना शुरू कर दिया है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी से इसलिए मुंह फेर लिया था कि पार्टी ने उनकी जगह युवाओं को तरजीह दी थी। भाजपा को इसका बड़ा खामियाजा भी भुगतना पड़ा।
लेकिन, लगता है कि मध्य प्रदेश में बीजेपी ने अपने इस नियम में नरमी दिखाई है। पार्टी ने 14 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जो 70 से ज्यादा बसंत देख चुके हैं। सबसे उम्रदराज उम्मीदवार तो 80 पार हो चुके हैं। 70 से ज्यादा आयु के लोगों को टिकट देने में मध्य प्रदेश में इस बार बीजेपी ने तो कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया है, जिसके हाथ 9 को ही टिकट देकर रुक गए हैं।

कर्नाटक में भी काटा था बुजुर्ग नेताओं का टिकट
राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि हो सकता है कि यह कर्नाटक में पार्टी को लगे झटके का नतीजा हो। क्योंकि, वहां इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 67 वर्षीय पूर्व सीएम जदगदीश शेट्टार और 74 साल के पूर्व उपमुख्यमंत्री केएस ईश्वरप्पा का टिकट इसी वजह से काट दिया था कि वे पार्टी की उम्र सीमा को पार कर गए थे या करने वाले थे।
आडवाणी-जोशी भी उम्र की वजह से लग चुके हैं किनारे
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय जनता पार्टी में ऐसा देखने में आया है कि 75 साल सक्रिय राजनीति से रिटायरमेंट की एक नीति की तरह है। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज इसी नियम की वजह से ऐक्टिव पॉलिटिक्स से दूर हुए हैं। यशवंत सिन्हा जैसे नेता तो यही आरोप लगाते हुए पार्टी के सबसे बड़े आलोचकों में शामिल हो चुके हैं।
मध्य प्रदेश में भाजपा के उम्मीदवार, उम्र के 80 बसंत से भी पार
लेकिन, मध्य प्रदेश चुनाव में देखें तो पार्टी सतना जिले की नागौद विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री नागेंद्र सिंह नागौद को चुनाव लड़ा रही है, जो इस साल मार्च में ही 80 वर्ष के हो चुके हैं। इसी तरह रीवा की गुढ़ सीट से पार्टी उम्मीदवार नागेंद्र सिंह 79 वर्ष के हैं। दोनों ही पार्टी के मौजूदा विधायक हैं। एक राजनीतिक विश्लेषक जयराम शुक्ला के मुताबिक कुछ महीने तक ये दोनों ही नेता चुनाव लड़ने को लेकर अनिच्छा जता रहे थे।
2018 में कई दिग्गजों की कट गया था टिकट
पार्टी की फेहरिस्त में ऐसे और 12 नाम हैं जो 70 साल से ज्यादा के हैं। जानकारी के मुताबिक 2016 में शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट से तब 76 साल के हो जाने की वजह से ही सरताज सिंह को हटना पड़ गया था। 2018 में उन्हें इसीलिए टिकट नहीं मिला कि वह 78 के हो चुके थे। वह बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे, हालांकि होशंगाबाद सीट पर वह चुनाव नहीं जीत सके थे। इसी तरह पिछली बार तत्कालीन मंत्री कुसुम महदेले का भी टिकट कट गया था, क्योंकि, वह 75 की हो चुकी थीं।
भाजपा के बुजुर्ग नेताओं में जगी नई उम्मीद
इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार भाजपा की तुलना में ज्यादा युवा हैं, जिसने 70 से ज्यादा उम्र के सिर्फ 9 लोगों को ही टिकट दिया है और उसमें सबसे बुजु्र्ग 77 साल के हैं। भाजपा की यह बदली हुई रणनीति बहुतों को चौंका रही है, लेकिन पार्टी के जिन नेताओं पर रिटायरमेंट की तलवार लटकी हुई है उनके लिए उम्मीद की एक नई किरण जग गई है।
कई लोग इस बात को याद दिला रहे हैं कि 2019 के अप्रैल में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि पार्टी ने 75 साल अधिक के नेताओं को टिकट नहीं देने का फैसला किया है। इसी चक्कर में आडवाणी और जोशी जैसे दिग्गज भी नप गए थे। वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीक्षित के मुताबिक भाजपा सुविधा की राजनीति कर रही है और सरकार में बने रहने के लिए आजमाए और परखे हुए दिग्गजों पर दांव लगा रही है।
2018 में भाजपा को लगा था झटका
हालांकि, जयराम शुक्ला की मानें तो बीजेपी ने मध्य चुनाव में जो रणनीति बदली है, उसके पीछे पिछले विधानसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन है। उन्होंने बताया कि तब 81 साल के रामकृष्ण कुसमरिया को टिकट नहीं दिया गया था। वह दमोह और पथरिया सीट से चुनाव लड़े थे। पहली सीट पर उन्हें 1,133 और दूसरी पर 13,000 वोट मिले थे। दमोह में बीजेपी कांग्रेस से 798 वोटों और पथरिया में बसपा से 2,205 सीटों से चुनाव हार गई थी। बाद में वे फिर से भाजपा में लौट आए थे।
बदल गई बीजेपी की पॉलिसी?
शुक्ला का कहना है कि इस बार पार्टी ने उन्हें एमपी प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया है, ताकि इस बार भी बुंदेलखंड में उसकी लुटिया न डूब जाए। उनका यह भी कहना है कि फरवरी 2020 मे पार्टी ने 50 वर्षीय वीडी शर्मा को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बना दिया। उन्होंने जिलों में भी युवा चेहरों को महत्त्व देना शुरू कर दिया। लेकिन, यह बात दिग्गजों को खटकने लगी और वे पार्टी की बैठकों में आने से बचने लगे।
एक और राजनीतिक विश्लेषक गिरजा शंकर के मुताबिक बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा नहीं की है कि 75 से ज्यादा उम्र वालों को टिकट नहीं देंगे। इसके लिए चुनाव में जीत सबसे पहले है और इसी को देखकर टिकट देती है। (इनपुट- पीटीआई)












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