कैंसर से जूझ रहे दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता डी रामानायडू नहीं रहे
हैदराबाद। दादासाहेब फाल्के व पद्मभूषण पुरस्कार विजेता विख्यात तेलुगू फिल्म निर्माता डी रामानायडू ने यहां बुधवार को अंतिम सांस ली। वह 79 साल के थे। रामानायडू को अधिकांश भारतीय भाषाओं में फिल्में बनाने का श्रेय जाता है।
रामानायडू के प्रचारक ने बताया, "प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करा रहे रामानायडू का एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को लोगों के अंतिम दर्शन के लिए उनके स्टूडियो में स्थानांतरित किया जा रहा है।"
छह जून, 1936 को जन्मे रामानायडू ने 1963 में तेलुगू फिल्म 'अनुरागम' से बतौर सह-निर्माता अपना करियर शुरू किया। उसके अगले साल उन्होंने तेलुगू फिल्म 'रामुडू भीमुडू' से फिल्म निर्माता के रूप में अपनी पारी शुरू की। उन्होंने रामानायडू कलर लैब और सिने विलेज के बाद 1989 में रामानायडू स्टूडियो लांच किया।
अपने पांच दशकों से लंबे करियर में उन्होंने 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में 130 से ज्यादा फिल्में बनाईं। हिंदी में उन्होंने 'प्रेम नगर', 'दिलदार', 'मकसद', 'इंसाफ', 'तोहफा', 'अनाड़ी' और 'हम आपके दिल में रहते हैं' सरीखी फिल्में बनाईं। रामानायडू ने तमिल, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, पंजाबी व इंग्लिश भाषा में भी फिल्में बनाईं।
रामानायडू को नंदी व फिल्मफेयर पुरस्कारों के अलावा 2009 और 2012 में क्रमश: दादासाहेब फाल्के व पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1999 और 2004 के बीच वह तेलुगू देशम पार्टी से जुड़े। रामानायडू के परिवार में बेटे सुरेश बाबू व वेंकटेश डग्गूबाती और पोते राणा व नागा चैतन्य हैं।












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