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ओडिशा के माउंटेन मैन: 30 साल में जंगल के रास्ते शख्स ने खुद बना दी सड़क, तब सरकार ने खड़े कर दिए थे हाथ

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भुवनेश्वर, 5 अगस्त: ओडिशा में 57 साल के एक शख्स ने अपने दम पर ही अपने गांव के लोगों के लिए हर मौसम में काम आने लायक सड़क बना दी है। हरिहर बेहरा को इस काम में पूरे 30 साल लग गए। उन्हें इस भगीरथ प्रयास में अपने बड़े भाई का साथ मिला, लेकिन वे भी बीच में ही छोड़कर चल बसे। आज उनका काम ओडिशा के दूसरे दूर-दराज के गांवों के लिए भी मिसाल बन गया है और प्रशासन भी अपनी भूल सुधारने की सोच रहा है। गौरतलब है कि कभी बिहार के माउंटेन मैन दशरथ मांझी ने भी पहाड़ काटकर सड़क बनाई थी, जिनपर फिल्म भी बन चुकी है।

एमएलए ने कहा था कि कभी नहीं बन सकती सड़क- स्थानीय

एमएलए ने कहा था कि कभी नहीं बन सकती सड़क- स्थानीय

'वहां कोई सड़क नहीं थी। जब हमने सड़क की मांग की थी तो स्थानीय एमएलए ने हमसे कहा था कि वहां तो सड़क कभी बन ही नहीं सकती। उस दिन से बेहरा ने खुद ही सड़क बनाने की ठान ली।' ओडिशा में नयागढ़ जिले के टुलुबी गांव के निवासी हरिहर बेहरा के बारे में ये बातें एक स्थानीय निवासी ने कही हैं। प्रशासन भी अब मान रहा है कि बेहरा ने जो किया है, वह बहुत ही प्रेरणादायक है। हरिहर ने जब जंगल की जमीन पर सड़क निर्माण का काम शुरू किया था, तब वे सिर्फ 27 साल के थे।

सिर्फ एक कुदाल और हथौड़े से बना डाली सड़क

सिर्फ एक कुदाल और हथौड़े से बना डाली सड़क

हरिहर सिर्फ ये चाहते थे कि मुख्य सड़क से उनके गांव तक की तीन किलोमीटर लंबी ऐसी सड़क बन जाए जो हर मौसम में इस्तेमाल करने लायक रहे। रास्ता जंगली भी था और पहाड़ी भी। प्रशासन से गुहार लगाते चप्पल घिस गए, लेकिन कोई इनकी परेशानी सुनने के लिए भी तैयार नहीं था। बस हरिहर और उनके भाई कृष्णा ने तय किया कि अगर रोड चाहिए तो खुद ही कुछ करना होगा, सरकार से उम्मीद बेकार है। उनके पास सड़क निर्माण के नाम पर सिर्फ एक कुदाल और हथौड़े जैसे उपकरण ही थे।

हमारे रिश्तेदारों का आना मुश्किल था- हरिहर बेहरा

हमारे रिश्तेदारों का आना मुश्किल था- हरिहर बेहरा

जब हरिहर बेहरा से हमने पूछा कि आखिर उन्होंने इतनी हिम्मत कैसे जुटाई, जबकि उन्हें पता था कि यह किसी के लिए भी नामुमकिन सा लगता है ? इसपर उन्होंने कहा, 'कीचड़ वाले रास्ते के चलते हमारे रिश्तेदारों का यहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। वे रास्ता भटक जाते थे। सड़क के बिना बहुत ही मुश्किल होता जा रहा था, इसके बाद मेरे भाई और मैंने खुद से सड़क बनाना शुरू कर दिया। अब सड़क हकीकत बन चुकी है।' हरिहर और उनके बड़े भाई रोजाना खेती का काम निपटाकर सड़क बनाने निकल पड़ते थे। उनके मुताबिक बाद में गांव वालों ने भी उनकी मदद की।

भाई के निधन के बाद हरिहर अकेले ही मिशन में जुटे रहे

भाई के निधन के बाद हरिहर अकेले ही मिशन में जुटे रहे

दोनों भाइयों ने सड़क निर्माण करने से पहले रास्ते से जंगल की सफाई शुरू की और शुरुआत में बड़े पत्थरों को छोटे विस्फोटकों की मदद से तोड़ने की कोशिश की। लेकिन, लगा कि यह पर्यावरण के लिए सही नहीं है तो वापस हथौड़े को ही सहारा बना लिया। हरिहर के इस मिशन और उनके जीवन में तब सबसे बड़ी अड़चन आई, जब उनके भाई कृष्णा बेहरा किडनी की बीमारी के चलते चल बसे। इसके बाद हरिहर ने अकेले ही मिशन को आगे जारी रखा।

अब प्रशासन भी कर रहा है तारीफ

अब प्रशासन भी कर रहा है तारीफ

आज जब सड़क बनकर तैयार है तो प्रशासन भी उनकी तारीफों के पुल बांध रहा है। स्थानीय एडीएम बीसी रे ने कहा है, 'लगभग 30 साल पहले, बेहरा और उनके भाई ने जंगल की जमीन के रास्ते अपने दुर्गम गांव तक सड़क बनाना शुरू किया। उनका यह कार्य प्रेरणादायक है। इसके बाद वन अधिकारियों की अनुमति के बाद, सड़क का निर्माण किया गया है, गांव तक पहुंच अब पूरी तरह से सुलभ है।'

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जब दशरथ मांझी ने पहाड़ काटकर बनाया रास्ता

जब दशरथ मांझी ने पहाड़ काटकर बनाया रास्ता

गौरतलब है कि माउंटेन मैन के नाम से मशहूर दशरथ मांझी ने 22 साल में अकेले पहाड़ को काटकर 110 मीटर का रास्ता बना दिया था। उन्होंने अपने दम पर बिहार के गया जिले के अतरी और वजीरगंज ब्लॉक की दूरी को 75 किलोमीटर से घटाकर सिर्फ 1 किलोमीटर कर दिया था। इसी तरह ओडिशा के ही क्योंझर जिले के दैतारी नायक ने एक पहाड़ के रास्ते 3 किलोमीटर लंबा रास्ता बना दिया और ओडिशा के ही जालंधर नायक ने कंधमाल जिले में अपने गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए 15 किलोमीटर की सड़क बना डाली।

English summary
In Odisha, a man single-handedly built an all-weather road for his village in 30 years after the administration refused
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