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Monsoon 2022: दोहरा रंग दिखा सकता है मानसून, La Nina और IOD को लेकर बड़ी भविष्यवाणी

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नई दिल्ली, 13 मई: देश में इस साल मानसून दोहरा खेल, खेल सकता है। यानी मानसून के एक हिस्से में तो सामन्य से अच्छी बारिश होने का अनुमान है, लेकिन दूसरे हिस्से में झटका मिलने की आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों का खासकर उन राज्यों के किसानों के लिए संदेश है जिनकी खेती बारिश पर निर्भर है कि वे पूर्वानुमानों के मुताबिक ही अपनी फसलों का चुनाव करें। क्योंकि, हो सकता है कि बाद में पानी की कमी के चलते उनकी फसलों को नुकसान हो जाए। यह पूर्वानुमान प्रशांत महासागर से लेकर हिंद महासागर तक की मौसमी संभावनाओं के आकलन के बाद लगाया गया है। ये बात ऐसे समय में सामने आई है, जब गुरुवार को ही मौसम विभाग ने इस साल 15 मई को ही मानसून के दस्तक देने की भविष्यवाणी कर दी है।

इस साल दोहरा रंग दिखा सकता है मानसून-रिपोर्ट

इस साल दोहरा रंग दिखा सकता है मानसून-रिपोर्ट

देश में इस साल मानसून दोहरा रंग दिखा सकता है। मतलब पहले दो महीनों में तो सामान्य से लेकर अच्छी बारिश होने की संभावना है। लेकिन, अगस्त के बाद यह खासकर भारतीय कृषि और किसानों के साथ धोखा भी कर सकता है। जानकारों का अनुमान है कि विपरीत परिस्थतियों में भी कुछ राज्य तो खुद को संभाल ले सकते हैं, लेकिन कुछ को बड़ा धक्का लग सकता है। दरअसल, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के वातावरण में विपरीत परिस्थितियां बन रही हैं, इसका अर्थ है कि मानसून के पहले दो महीनों में सामान्य बारिश होगी और खरीफ फसलों की बुवाई के लिए यह अनुकूल रहेगा। लेकिन, मानसून के बाद के हिस्से के लिए परिस्थितियां इतनी अच्छी नहीं लग रही हैं।

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    अगस्त से मानसून दे सकता है धोखा-एक्सपर्ट

    अगस्त से मानसून दे सकता है धोखा-एक्सपर्ट

    एक निजी वेदर फोरकास्टिंग एजेंसी स्काईमेट के मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन के अध्यक्ष जीपी शर्मा ने मीडिया को बताया है 'ला नीना और आईओडी (हिंद महासागर द्विध्रुव) के बीच संघर्ष की स्थिति बन सकती है, इसके कारण पहले दो महीनों में तो सामान्य मानसून रहेगा, लेकिन दूसरी हिस्से में मानसून की बारिश रुक सकती है या फिर अस्थिर हो सकती है।' नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग के डायरेक्टर एके मित्रा के मुताबिक, 'भारतीय मानसून के लिए ला नीना की स्थिति 60% से ज्यादा बार अनुकूल होती है। लेकिन, हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) और उनका संयोग थोड़ी अनिश्चिचतता पैदा कर देता है। इसलिए उनको मेल करके ही देखना होगा।'

    ला नीना और आईओडी को लेकर भविष्यवाणी क्या है ?

    ला नीना और आईओडी को लेकर भविष्यवाणी क्या है ?

    ऑस्ट्रेलिया की नेशनल वेदर, क्लाइमेट चेंज एंड वाटर एजेंसी, ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी के ताजा अपडेट के मुताबिक प्रशांत महासागर में होने वाली समुद्री और वायुमंडलीय घटना ला नीना, उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सक्रिय है, जो कि अच्छे मानसून का एक संकेतक है। लेकिन, इस ब्यूरो के मुताबिक आईओडी अभी उदासीन है और अगस्त तक नकारात्मक हो सकता है। आईओडी समुद्र की सतह के तापमान का अनियमित उतार-चढ़ाव है, जिसमें पश्चिमी हिंद महासागर, पूर्वी हिस्से की तुलना में बारी-बारी से गर्म और ठंडा होता है। भारत में मानसून की भविष्यवाणी करने के दौरान ऑस्ट्रेलियाई मौसम की भविष्यवाणी एक महत्वपूर्ण फैक्टर है, जिसे भी ध्यान में रखा जाता है।

    60% कृषि भूमि मानसूनी बारिश के भरोसे

    60% कृषि भूमि मानसूनी बारिश के भरोसे

    पिछले महीने भारतीय मौसम विभाग ने कहा था कि इस साल मानसून सामान्य रहेगा और पूरे देश में यह अच्छी तरह से विभाजित होगा। कृषि प्रधान देश होने के नाते भारत का आर्थिक विकास मानसून और उसकी वजह से होने वाले पैदावार पर निर्भर है; और अभी भी देश की 60% कृषि भूमि मानसूनी बारिश के भरोसे है। इसी के चलते सदियों से भारतीय खेती को मानसून के साथ जुआ कहने की भी परंपरा रही है।

    इन राज्यों के किसान सोच-समझकर लगाएं फसल

    इन राज्यों के किसान सोच-समझकर लगाएं फसल

    यानी इस साल मानसून की शुरुआती हिस्से में अच्छी बारिश की वजह से खरीफ फसलों की बुवाई और बीजारोपण के लिए शुभ संकेत हैं तो एक्सपर्ट बाद के लिए आशंकाएं पैदा कर रहे हैं। खासकर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से, छत्तीसगढ़, बिहार और ओडिशा के किसानों को यह संकट झेलनी पड़ सकती है। स्काईमेट के जीपी शर्मा का कहना है कि 'उत्तर भारत के भोजन का कटोरा, जो कि पंजाब और हरियाणा है, उनके पास भरपूर संसाधन मौजूद हैं और वे मैनेज कर सकते हैं। लेकिन, जिन इलाकों में बरसात पर निर्भरता ज्यादा है, वहां के किसानों को अपनी फसलों को पूर्वानुमानों के अनुसार अस्थिर बारिश को ध्यान में रखकर चुनना होगा।'

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    अर्थव्यस्था के विकास के लिए अच्छी बारिश जरूरी

    अर्थव्यस्था के विकास के लिए अच्छी बारिश जरूरी

    भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सालाना बरसात में 74.9% तक का योगदान रहता है। बारिश अच्छी होती है तो ग्रामीण इलाकों से मांग में इजाफा होता है, जो कि सीधे अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। नतीजे के तौर पर उपभोक्ता वस्तुओं, सोना, कार, बाइक, ट्रैक्टर, खेती के उपकरणों और कीटनाशकों, उर्वरकों और बीजों की मांग बढ़ती है। इंद्र देवता ने थोड़ी भी बेरुखी दिखाई तो यह पूरा चेन ही बिखर जाता है।

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    English summary
    Monsoon difference is being predicted in the country this year. There may be good rain in the first part and less rain later
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