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ताइवान पर मोदी सरकार के इस फैसले से चीन को लगी मिर्ची, भारत से कहा-इस मसले से दूर रहो

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नई दिल्‍ली। पिछले दिनों केंद्र की सत्‍तारूढ़ बीजेपी सरकार के दो सांसदों ने ताइवान की राष्‍ट्रपति साइ इंग वेन के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्‍सा लिया था। अब बीजेपी सरकार के इस फैसले से चीन को मिर्ची लग गई है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत से कहा है कि वह ताइवान का समर्थन करना बंद करें। साथ ही भारत को उसके आतंरिक मामलों में हस्‍तक्षेप न करने के लिए भी कहा गया है। बीजेपी सांसद मिनाक्षी लेखी और राहुल कासवान ने ताइवान की राष्‍ट्रपति वेन के शपथ ग्रहण में न सिर्फ शामिल हुए बल्कि उन्‍होंने वेन को बधाई भी दी थी।

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    भारत के फैसले को बताया गलत

    भारत में चीनी दूतावास की काउंसलर लिउ बिंग ने लिखित ऐतराज जताते हुए भारत से अपने 'आंतरिक' मामलों में दखल से बचने को कहा है। चीनी राजनयिक ने कहा है कि साइ को बधाई संदेश देना 'बिल्कुल गलत' है। लिउ बिंग ने कहा, 'एक चीन सिद्धांत यूएन चार्टर और उसके कई प्रस्तावों में मान्य है और यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आम तौर पर एक मानक है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस पर मोटे तौर पर सर्वसम्मति है।' बुधवार 20 मई को साइ इंग वेन ने ताइवान के राष्‍ट्रपति के तौर पर दूसरी बार शपथ ली है। मिनाक्षी लेखी और राहुल कासवान 41 देशों के उन 92 मेहमानों में शामिल थे जिन्‍होंने इंटरनेट के जरिए शपथ ग्रहण कार्यक्रम में विदेशी शख्सियतों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। कोरोना वायरस की वजह से विदेश यात्रा कई देशों में फिलहाल बैन है। इस शपथ ग्रहण में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपेयो ने भी शिरकत की थी। साल 2016 में वेन पहली बार देश की राष्‍ट्रपति बनी थीं। उस समय बीजेपी सरकार ने फैसला किया था कि किसी भी सांसद को शपथ ग्रहण कार्यक्रम में नहीं भेजा जाएगा।

    चीन की वन चाइना पॉलिसी किनारे!

    लेखी और कासवान दोनों ने ही इस बात पर जोर दिया कि ताइवान और भारत साझा लोकतांत्रिक मूल्‍यों में यकीन रखते हैं। इसके अलावा लेखी ने साइ इंग वेन को अलग से बधाई संदेश भी भेजा जिसे कार्यक्रम में प्‍ले भी किया गया।भारत के दो सांसदों का शपथ ग्रहण में हिस्सा लेने से साफ है कि भारत कहीं न कहीं चीन की 'वन चाइना पॉलिसी' को नजरअंदाज करने लगा है। भारत और ताइवान के बीच साल 2019 में द्विपक्षीय व्‍यापार 7.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। जबकि 20 साल पहले यानी साल 2000 में एक बिलियन डॉलर पर था। ताइवान ने भी साल 2016 से 2018 के बीच निवेश में 12 गुना तक इजाफा किया और साल 2018 में यह 360 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया। वहीं 2300 भारतीय छात्रों ने ताइवान के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में एडमिशन लिया है।

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    English summary
    Modi govt decision irked China as it asks India to refrain from supporting Taiwan.
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