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मोदी सरकार के श्रम कानून में बहुत कुछ है प्रवासी मजदूरों के लिए, जानिए विस्तार से

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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र( Parliament Monsoon Session) के दौरान मोदी सरकार ने श्रम सुधारों (Labour Reforms) से जुड़े तीन विधेयक लोकसभा में पेश किए। केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लोकसभा में तीों कोड्स से जुड़े विधेयक पेश किए, जिनमें ऑक्‍यूपेशनल सेफ्टी, हेल्‍थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020 (Occupational Safety, Health and Working Condition Code 2020), इंडस्‍ट्रीयल रिलेशंस कोड 2020के साथ-साथ सोशल सिक्‍योरिटी कोड 2020 (Social Security Code 2020) को पेश किया गया।

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    इन कानूनों के जरिए सरकार किसी कंपनी में काम की सुरक्षा के साथ-साथ कामगारों के स्वास्थ्य व काम के महौल को विनियमित करने के प्रवाधानों को जोड़ा है। इस विधेयक को पेश करने से पहले केंद्रीय श्रम मंत्री ने 2019 में लाए गए श्रम सुधार से जुड़े विधेयक वापस ले लिया।इस लेबर कानून में NDA सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए केवरेज के दायरे में विस्तार किया है। सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान सबसे बुरकी तरह से प्रभावित हुए प्रवासी मजदूरों के सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स को जारी रखते हुए लेबर लॉ के दायरे में विस्तार किया है।

    लोकसभा में श्रम मंत्री द्वारा पेश किए गए ऑक्‍यूपेशनल सेफ्टी, हेल्‍थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020 (Occupational Safety, Health and Working Condition Code 2020) विधेयक के तहत 18000 रुपए प्रति माह तक कमाई करने वाले वाले प्रवासी मजदूर इस कानून के तहत कवर होंगे। वर्तमान में मौजूद कानून के तहत प्रवासी मजदूर लेबर लॉ के तहत तभी कवर हो पाते हैं जब वो किसी कॉटैक्टर के जरिए हायर किए गए हो। ऐसे में जिन प्रवासी मजदूरों को अपने काम से एक जगह से दूसरे जगह जाना पड़ता है वो इस कानून के दायरे में नहीं आ पाते हैं।

    केंद्र ने प्रवासी मजदूरों को रोजगार की सुरक्षा समेत नए श्रम कानून के दायरे का विस्तार किया है। सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए विस्थापन भत्ता का प्रावधान रखा है। ये भत्ता मजदूरों को ठेकेदारों से मिलेगा। इतना ही नहीं प्रवासी मजदूरों के नियोक्ताएओं को उन्हें यात्रा भत्ते का सालाना तौर पर भुगतान करना होगा। ये भत्ता उनका ही होगा, जितना किराया मजदूरों को अपने पैतृक स्थान से वहां आने तक में लगेगा। इतना ही नहीं सरकार ने पहली बार ऐसा प्रवधान बनाया है, जिसके तहत प्रवासी मजदूरों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ अपने पैतृक स्थान के साथ-साथ अपने गंतव्य राज्य में भी उठा सकता है। इसके अलावा प्रवासी मजदूर उपकरण निधि का लाभ वहीं उटा सकते हैं, जहां वो कार्यरत हैं। सरकार द्वारा प्रस्तावित बिल के मुताबिक यह प्रस्तावित कानून कम से कम 10 श्रमिकों को काम पर रखने वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होगा।

    इस प्रस्ताव में कहा गया है कि नियोक्ताओं का यह दायित्व होगा कि वो प्रवासी मजदूरों के लाभ का विस्तार करें। ये नियाक्ताओं का दायित्व होगा कि वो प्रवासी मजदूरों को EPFO और कर्मचारी राज्य बीमा स्कीम से जोड़े और उसका लाभ उनतक पहुंचाए। प्रवासी मजदूरों का डेटासेट केंद्र और राज्य सरकारों को मेनटेंन रखना होगा।

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    English summary
    Modi Government proposes wider coverage for migrant workers under labour laws, Here is the deatil
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