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'मोदी सरकार खुद जजों की नियुक्ति करना चाहती, ऐसा हुआ तो यह 'आपदा' होगी', कपिल सिब्बल का केंद्र पर हमला

समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बिल ने कहा कि "यह स्वतंत्रता का अंतिम गढ़ है जिसे उन्होंने अभी तक कब्जा नहीं किया है। उन्होंने अन्य सभी संस्थानों पर कब्जा कर लिया है।

कपिल सिब्बल

Kapil Sibal on Collegium: पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि सरकार न्यायपालिका को अपने हाथ में लेने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि अदालतें इसके खिलाफ मजबूती से खड़ी रहेंगी। न्यायाधीशों की नियुक्ति पर विवाद और न्यायिक नियुक्तियों पर रद्द किए गए कानून को वापस लाने पर यह बात कही है। कपिल सिब्बल ने स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली में अपनी कमियां हैं, लेकिन सरकार को इसमें पूर्ण स्वतंत्रता देना उपयुक्त तरीका नहीं है।

'सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय चाहती है'

वहीं, दूसरी तरफ कानून मंत्री किरेन रिजिजू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई नेताओं ने न्यायपालिका पर आलोचनात्मक टिप्पणियों की झड़ी लगा दी है। जिससे यह मुद्दा काफी बढ़ गया। एनडीटीवी के मुताबिक, कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति पर "अंतिम निर्णय" चाहती है। अगर ऐसा हुआ तो यह "आपदा" होगी। कानून मंत्री किरेन रिजिजू की टिप्पणी, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि सरकार "हमेशा के लिए चुप नहीं बैठेगी," पर कपिल सिब्बल ने जवाब दिया कि वे किसी अन्य मुद्दे पर चुप नहीं रहे हैं, वे इस पर चुप क्यों रहेंगे?"

'सरकार का सभी एजेंसियों पर कब्जा'

समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बिल ने कहा कि "यह स्वतंत्रता का अंतिम गढ़ है जिसे उन्होंने अभी तक कब्जा नहीं किया है। उन्होंने अन्य सभी संस्थानों पर कब्जा कर लिया है। चुनाव आयोग से लेकर राज्यपालों के पद तक, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से लेकर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और सीबीआई ( केंद्रीय जांच ब्यूरो), एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) और मीडिया पर भी उन्होंने कब्जा कर लिया है।

'कानून मंत्री अधिवक्ता नहीं'

उन्होंने कानून मंत्री की इस टिप्पणी को 'पूरी तरह से अनुचित' करार दिया कि अदालतें 'बहुत अधिक छुट्टियां' लेती हैं। सुप्रीम कोर्ट में नियमित रूप से पेश होने वाले कपिल सिब्बल ने कहा कि कानून मंत्री "अधिवक्ता नहीं हैं"। उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश दिन में 10 से 12 घंटे बैठते हैं, याचिकाओं की सुनवाई करते हैं, अगले दिन की सुनवाई की पृष्ठभूमि पढ़ते हैं और फैसला लिखते हैं।

अदालत साल में 260 दिन काम करती है

कपिल सिब्बल ने कहा कि अदालतें, सांसदों की तुलना में अधिक कठिन काम करती हैं। पिछले एक साल में जनवरी से दिसंबर तक संसद ने 57 दिन काम किया है। अदालत साल में 260 दिन काम करती है। क्या अदालतों ने पूछा है कि आप क्यों काम नहीं कर रहे हो?

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