एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के रिजल्ट से सामने आया मोदी फैक्टर का सच
नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए बुरी लेकर आए हैं। 2019 लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे इन चुनावों में भाजपा की हार के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? यह स्थानीय क्षत्रपों की हार है या मोदी फैक्टर अब राज्यों में बेअसर हो गया है। 2014 लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखंड जैसे राज्यों में मुख्यमंत्री का चेहरा न उतारकर नरेंद्र मोदी के फेस पर चुनाव लड़ा गया। इन सभी राज्यों में भाजपा को बडी जीत मिली भी, लेकिन हिंदू हार्टलैंड- मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मोदी फैक्टर बेअसर दिखा। अब इसे क्या समझा जाए? क्या यह मान लिया जाए कि ब्रैंड मोदी में अब पहले जैसा जादू नहीं रहा या मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पार्टी की चुनावी विफलता के पीछे कुछ और फैक्टर भी हैं?

एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान की हार किसकी, मोदी फैक्टर या स्थानीय क्षत्रों की?
मध्य प्रदेश में 15 साल से भाजपा काा शासन था। छत्तीसगढ़ में भी रमन सिंह ने लगातार तीन बार जीतकर भाजपा सरकार बनाई। राजस्थान में पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज की थी। इन तीनों राज्यों में रमन सिंह, वसुंधरा राजे सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान जैसे कद्दावर स्थानीय क्षत्रप कमान संभाल रहे थे। नरेंद्र मोदी ने भी इन राज्यों में रैलियां कीं, लेकिन यह बात स्पष्ट है कि अकेले मोदी फैक्टर के दम पर इन राज्यों में जीत दर्ज करना आसान काम नहीं था। इन राज्यों में पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। वसुंधरा राजे और रमन सिंह की लोकप्रियता का ग्राफ काफी समय से गिर रहा था। एमपी में मामा शिवराज सिंह चौहान ने जरूर दम दिखाया और यहां भाजपा ने कड़ी जंग लड़ी, लेकिन 15 साल की सत्ता विरोधी लहर को वह भी नहीं रोक सके। अब सवाल बचा मोदी फैक्टर का, क्या अब इसे फेल माना जाए या ऐसा समझा जाए कि यह हार स्थानीय नेताओं की है?

पहले भी फेल हो चुका है मोदी फैक्टर
यह बात सोलह आने सच है कि 2014 के बाद भारत की चुनावी बिसात पर नरेंद्र मोदी सबसे बड़े खिलाड़ी के तौर पर उभरे। पार्टी ने उनके दम पर 2014 लोकसभा चुनाव में पहली बार बहुमत हासिल किया। इसके बाद एक के बाद एक राज्यों में भी चुनाव जीते, लेकिन जहां तक राज्यों में मोदी फैक्टर की बात है तो यह उस वक्त भी दो राज्यों में फेल हो गया था, जब पूरा देश मोदी के चुनावी कौशल को सलाम कर रहा था। दिल्ली और बिहार में नरेंद्र मोदी ही चेहरा थे, लेकिन दोनों जगहों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

मोदी फैक्टर ने कब-कब काम किया और कब-कब हो गए फेल
मोदी फैक्टर के दम पर अब तक जितनी भी विजय बीजेपी को मिली हैं, उन सभी में एक बात कॉमन है और वो है सत्ता विरोधी लहर। 2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी जब राष्ट्रीय पटल पर उभरकर आए, तब कांग्रेस सत्ता में थी और मोदी सत्ता विरोध लहर पर सवार होकर चुनावी मैदान में उतरे थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में मोदी फैक्टर के दम पर बीजेपी चुनावी जीती। इन सभी राज्यों में भी भाजपा सत्ता को चुनौती दे रही थी, इसलिए जीती। हालांकि, बिहार और दिल्ली में भी भाजपा सत्ता को चुनौती दे रही थी, मोदी फैक्टर भी था, लेकिन हार ही नसीब हुई। दरअसल, इन दोनों जगहों पर स्थानीय क्षत्रप बेहद असरदार थे। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और बिहार में नीतीश कुमार। मतलब दो बातें अब साफ हैं- पहली तो यह कि अकेले मोदी फैक्टर के दम पर राज्यों में भाजपा जीत नहीं सकती है। दूसरी यह है कि जिन राज्यों में सत्ता विरोधी लहर है और वहां स्थानीय क्षत्रप उतने असरदार नहीं हैं, ऐसी जगहों पर मोदी फैक्टर काम करता है। जैसे- हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा से जनता नाखुश थी और भाजपा के पास कोई चेहरा नहीं था, यहां मोदी फैक्टर ने काम किया। इसी प्रकार से यूपी, झारखंड में भी मोदी फैक्टर चला और कारण वही दो, जिनका ऊपर जिक्र किया गया।

क्या 2019 में ब्रैंड मोदी भी होगा सत्ता विरोधी लहर का शिकार
राज्यों में मोदी फैक्टर कब चला और कब फेल हो गया, इसके पीछे के कारण भी समझ आते हैं, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव से ऐन पहले हिंदू हार्टलैंड राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा के बुरे प्रदर्शन से एक सवाल यह भी उठ रहा है कि कहीं रमन सिंह, शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे सिंधिया की तरह अगले आम चुनाव में नरेंद्र मोदी को भी तो सत्ता विरोधी लहर का सामना नहीं करना पड़ेगा। क्या उनकी ब्रैंड वेल्यू अभी बची है? या सत्ता विरोधी लहर अब ब्रैंड मोदी को भी घेरे में ले चुकी है? यह सवाल अब भी बना हुआ है। इन तीनों राज्यों की लोकसभा सीटों पर नजर डालें तो आंकड़ा 65 हो जाता है। 2014 में इन 65 सीटों में से बीजेपी को 62 पर जीत मिली थी। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या ब्रैंड मोदी इन राज्यों में अगले चुनाव में चलेगा या 2019 में ब्रैंड मोदी को भी सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ेगा।
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