'हम अपनी आवाज खो देंगे', परिसीमन सर्वदलीय बैठक में बोले स्टालिन, BJP ने इसे 'राजनीतिक लाभ' करार दिया
MK Stalin On Delimitation: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की ओर से चेन्नई में परिसीमन पर पहली संयुक्त समिति की बैठक में उन्होंने कहा है कि उनका विरोध परिसीमन के खिलाफ नहीं बल्कि निष्पक्ष परिसीमन के लिए है।
बैठक में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन सहित तीन सीएम और एक डिप्टी सीएम के अलावा छह राज्यों के 24 राजनीतिक नेता भाग लेंगे।

इस बैठक में बोलते हुए स्टालिन ने कहा, "निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन वर्तमान जनसंख्या के अनुसार नहीं होना चाहिए। हम सभी को इसका विरोध करने में दृढ़ रहना चाहिए। संसद में हमारे जन प्रतिनिधियों की संख्या कम होने से हमारे विचार व्यक्त करने की ताकत कम हो जाएगी।"
Delimitation: दक्षिण में परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक
अपनी चिंताओं को विस्तार से बताते हुए स्टालिन ने अनुचित परिसीमन प्रक्रिया के व्यापक परिणामों की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर प्रतिनिधित्व घटता है तो दक्षिण राज्यों को धन प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना होगा। हमारी इच्छा के बिना भी कानून बनाए जाएंगे। ऐसे निर्णय लिए जाएंगे जो हमारे लोगों को प्रभावित करेंगे।
स्टालिन ने राज्यों के हितों पर चिंता व्यक्त की और कहा छात्र महत्वपूर्ण अवसर खो देंगे। किसानों को बिना समर्थन के असफलताओं का सामना करना पड़ेगा। हमारी संस्कृति और विकास खतरे में पड़ जाएगा। सामाजिक न्याय प्रभावित होगा। अगर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन होता है या प्रतिनिधित्व कम होता है, तो हम ऐसे नागरिक होंगे जो अपने ही देश में राजनीतिक शक्ति खो देंगे।
अपना रुख दोहराते हुए उन्होंने कहा, "हम ऐसी किसी भी चीज का विरोध नहीं करते जो लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करती हो, लेकिन वह कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए और निष्पक्ष राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित नहीं करना चाहिए। यह विरोध परिसीमन के खिलाफ नहीं है, बल्कि निष्पक्ष परिसीमन के लिए आग्रह है।"
MK Stalin On Delimitation: पिनाराई विजयन ने क्या कहा?
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया और इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया। "लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों का प्रस्तावित परिसीमन हमारे सिर पर मंडरा रहा है... विभिन्न रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बिना किसी परामर्श के परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। यह अचानक उठाया गया कदम किसी संवैधानिक सिद्धांत या किसी लोकतांत्रिक अनिवार्यता से प्रेरित नहीं बल्कि संकीर्ण राजनीतिक हितों से प्रेरित है।
सीएम विजयन ने कहा कि, "यदि जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो इससे उत्तरी राज्यों की सीटों की संख्या में भारी वृद्धि होगी, जबकि संसद में दक्षिणी राज्यों की सीटों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह भाजपा के लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि उत्तर में उनका प्रभाव अधिक है। यदि परिसीमन पूरी तरह से जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो केरल और अन्य दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा, क्योंकि हम 1973 से अपनी जनसंख्या को कम कर रहे हैं, जब पिछला परिसीमन किया गया था, जिसमें लोकसभा में सीटों की संख्या को पुनर्गठित किया गया था।"
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता हन्नान मोल्लाह ने भी इसी तरह की चिंता जताई और योजना के पुनर्मूल्यांकन की मांग की। उन्होंने कहा कि, "जब परिसीमन के बारे में सोचा गया था, तब मौजूदा परिदृश्य की कल्पना नहीं की गई थी। आज दक्षिण में जनसंख्या घट रही है और उत्तर में बढ़ रही है। इसलिए परिसीमन पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए अन्यथा, यह हमारे लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है।"
Delimitation News: 'जनसंख्या नियंत्रण पर कड़े प्रयास किए', उदयनिधि स्टालिन
तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने जनसंख्या वृद्धि को स्थिर करने में दक्षिणी राज्यों के प्रयासों को मान्यता देने के महत्व पर जोर दिया। स्टालिन ने अपने संबोधन में कहा कि दशकों से दक्षिण राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने और प्रबंधित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं।
हमने नीतियाँ पेश कीं, जागरूकता बढ़ाई और वह हासिल किया। जबकि कुछ अन्य राज्यों में जनसंख्या वृद्धि का अनुभव जारी है हमने अपनी जिम्मेदारी से काम किया। डिप्टी सीएम ने कहा कि,"हम कई अन्य राज्यों की तुलना में बहुत पहले जनसंख्या प्रतिस्थापन दर तक पहुँच गए। लेकिन इस उपलब्धि के लिए पुरस्कृत होने के बजाय, अब हम अपना राजनीतिक प्रतिनिधित्व खोने के जोखिम में हैं।"
MK Stalin On Delimitation: भाजपा की प्रतिक्रिया क्या है?
इस बैठक का भाजपा कड़ा विरोध कर रही है और तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष अन्नामलाई ने सत्तारूढ़ डीएमके द्वारा उठाए गए इस मुद्दे को खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि डीएमके के सत्ता में आने के बाद तमिलनाडु के हितों की लगातार बलि दी गई है।
अन्नामलाई ने तमिलनाडु सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने केरल के सीएम को बुलाने पर भी स्टालिन को आड़े हाथ लिया और कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए सीएम कभी भी केरल में उनसे बात करने और मुद्दों को हल करने नहीं गए। लेकिन आज, उन्होंने केरल के सीएम को ऐसे मुद्दे पर बात करने के लिए आमंत्रित किया है जिसे उन्होंने खुद बनाया है। हम तमिलनाडु के सीएम की निंदा करते हैं कि उन्होंने केरल के सीएम को आमंत्रित किया और तमिलनाडु की समस्याओं का समाधान नहीं किया।
अन्नामलाई ने इसके बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और कहा कि वह तमिलनाडु में यह दिखाने के लिए आए हैं कि वह एक अखिल भारतीय नेता हैं और सिद्धारमैया एक क्षेत्रीय नेता हैं। बता दें कि इस बैठक में राज्य भाजपा नेताओं ने तमिलनाडु सरकार के खिलाफ काले झंडे और तख्तियां दिखाईं।












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