राजस्थान-छत्तीसगढ़ छोड़िए... मिजोरम में कर दिया BJP ने डबल धमाका, दिग्गज नेता भी हैरान
Mizoram Election BJP: चार राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के नतीजों के बाद चुनाव आयोग ने सोमवार को मिजोरम विधानसभा चुनाव के परिणाम भी जारी कर दिए, जिसमें जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेपीएम) को 40 में से 27 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिला है।
वहीं, हिंदी भाषी तीन राज्यों में शानदार प्रदर्शन करने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिए भी मिजोरम से डबल खुशखबरी आई है। मिजोरम चुनाव में इस बार भाजपा के दो उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है और ये दोनों ही नेता ईसाई हैं।

आपको बता दें कि 2018 के मिजोरम विधानसभा चुनाव में भाजपा का केवल एक विधायक चुनकर आया था, लेकिन इस बार ये संख्या बढ़कर 2 हो गई है। पिछले चुनाव में भाजपा के टिकट पर बुद्ध धन चकमा मिजोरम की तुइचावंग विधानसभा सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, जो जातीय तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय 'चकमा' से आते हैं। हालांकि इस बार भाजपा ने ये सीट गंवा दी, लेकिन बदले में पार्टी को सैहा और पलक दो विधानसभा सीटों पर जीत मिली है। सैहा सीट से के. बेइछुआ और पलक से भाजपा उम्मीदवार के. ह्रामो चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, के. बेइछुआ और के. ह्रामो दोनों ईसाई हैं और जातीय तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय 'मरास' से आते हैं। मिजोरम में अभी तक ईसाइयों में अपना जनाधार मजबूत करने में नाकाम रही भाजपा के लिए ये बहुत बड़ी राहत की खबर है। खुद भाजपा के दिग्गज नेता भी मिजोरम से मिली इस छोटी, लेकिन महत्वपूर्ण जीत को देखकर हैरान हैं।
'मिजोरम में अभी और मजबूत होगी भाजपा'
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मिजोरम प्रभारी मम्होनलुमो किकोन ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'पिछली विधानसभा में हमारी पार्टी से केवल एक विधायक थे और वो बौद्ध धर्म से थे। इस बार भी भाजपा के टिकट पर जीते दोनों विधायक अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, लेकिन दोनों ईसाई हैं। ये साफ तौर पर एक संकेत है कि भाजपा को मिजोरम की जनता स्वीकार कर रही है और इसकी शुरुआत हो चुकी है। हमें पूरा विश्वास है कि आने वाले दिनों में भाजपा का प्रदर्शन राज्य में और ज्यादा अच्छा होगा।'
23 सीटों पर कितना रहा भाजपा का वोट शेयर?
यहां गौर करने वाली बात एक और है कि 2018 के मुकाबले इस चुनाव में भाजपा का टोटल वोट शेयर घटा है और ये 8.09 फीसदी से गिरकर 5.06 फीसदी पर आ गया है। लेकिन, इसकी वजह है कि भाजपा इस बार मिजोरम की केवल 23 सीटों पर ही चुनाव लड़ी थी, जबकि 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सभी 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।
भाजपा के लिए सबसे मुश्किल राज्य रहा मिजोरम
आपको बता दें कि नॉर्थ-ईस्ट में मिजोरम भाजपा के लिए सियासी तौर पर अभी तक का सबसे मुश्किल राज्य रहा है। भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो अच्छा नहीं रहा है और पार्टी की छवि ईसाई विरोधी मानी जाती रही है। ऐसे में विधानसभा चुनाव के नतीजे पार्टी को राहत देने वाले हैं।
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